3 साल की मासूम समेत 6 को बनाया शिकार ; लुधियाना में बेकाबू हुआ आवारा कुत्ता
लुधियाना के लुबानगढ़ गांव में संदिग्ध रेबीज ग्रस्त आवारा कुत्ते ने 3 साल की बच्ची समेत 6 लोगों पर हमला किया। प्रशासन ने आपात कार्रवाई शुरू की, लेकिन कुत्ता अभी भी फरार है। बढ़ते डॉग बाइट मामलों के बीच यह घटना गंभीर चिंता का विषय बन गई है।

सड़क पर घूमते हुए आवारा कुत्तों का झुंड
पंजाब के लुधियाना जिले के पास स्थित लुबानगढ़ गांव में एक संदिग्ध रेबीज से संक्रमित आवारा कुत्ते के हमले ने पूरे इलाके में भय और अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया। कुछ ही समय के भीतर इस कुत्ते ने छह लोगों को निशाना बनाया, जिनमें एक तीन वर्षीय मासूम बच्ची भी शामिल है, जिसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। अचानक हुए इन हमलों ने ग्रामीणों को दहशत में डाल दिया और प्रशासन को तत्काल सतर्क होना पड़ा।
घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और पशु चिकित्सा विभाग ने मिलकर एक संयुक्त अभियान शुरू किया। गांव और आसपास के इलाकों में व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया, जिसके तहत छह कुत्तों को पकड़कर निगरानी में रखा गया है। हालांकि, जिस कुत्ते पर रेबीज होने का संदेह है, वह अभी भी पकड़ से बाहर बताया जा रहा है। इस बीच, सभी घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उन्हें एंटी-रेबीज वैक्सीन और आवश्यक चिकित्सा उपचार दिया जा रहा है। प्रशासन ने ग्रामीणों को सतर्क रहने और बच्चों को अकेले बाहर न जाने देने की सलाह दी है।
यह घटना लुधियाना में बढ़ते आवारा कुत्तों के हमलों की एक और कड़ी के रूप में सामने आई है। हाल के समय में शहर और आसपास के क्षेत्रों में कुत्तों के काटने के मामलों में लगातार वृद्धि देखी गई है, जिनमें कई पीड़ित बच्चे भी शामिल हैं। यह स्थिति नगर प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रही है, खासकर जब हजारों की संख्या में ऐसे मामले सामने आ रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, रेबीज एक अत्यंत खतरनाक और लगभग हमेशा जानलेवा बीमारी है, यदि समय पर इलाज न मिले। हालांकि, समय रहते वैक्सीनेशन और उपचार से इसे पूरी तरह रोका जा सकता है। एक संक्रमित कुत्ता कम समय में कई लोगों को काट सकता है, जिससे स्थिति तेजी से गंभीर हो सकती है।
लुबानगढ़ की यह घटना न केवल स्थानीय प्रशासन के लिए एक चुनौती बनकर उभरी है, बल्कि यह पूरे देश में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता को भी उजागर करती है। समय पर नियंत्रण और प्रभावी उपायों की कमी ऐसे हादसों को और बढ़ावा दे सकती है, जिससे आम नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
