20 साल पहले अपने हाथों से लगाया पेड़ कटने पर फूट-फूटकर रोई महिला, सर्रागोंदी गांव में जमीन माफिया पर आरोप...
अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि विकास के कारण कटे हुए पेड़ों के बदले नए पेड़ लगाए जाते हैं। लेकिन आज तक जितने जंगल और पेड़ कट चुके हैं, उनके बदले खड़ा किया गया जंगल वास्तविक रूप में सामने नहीं आया है।

छत्तीसगढ़ के सर्रागोंदी गांव से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहै एक वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, कि एक कटे पेड़ के सामने महिला फूट-फूटकर रो रही हैं, क्योंकि उनके द्वारा लगाए गए पेड़ को एक प्रॉपर्टी डीलर ने काट दिया। इस घटना के विरोध में ग्रामीण महिला के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं और स्थानीय प्रशासन से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह पेड़ जमीन व्यापारी के निर्देश पर काटा गया। मामला विशेष रूप से इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि भारत में पहले ही पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने वाले कई पेड़ काटे जा चुके हैं, और देश वायु प्रदूषण के मामले में विश्व स्तर पर चिंताजनक स्थिति में है। यह घटना याद दिलाती है कि पहले बिश्नोई जैसी आदिवासी समुदायें अपने पेड़ों की रक्षा के लिए अपने जीवन तक का बलिदान देती थीं। लेकिन आज, विकास के नाम पर ऐसे पेड़ बेजा कट रहे हैं।
अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि विकास के कारण कटे हुए पेड़ों के बदले नए पेड़ लगाए जाते हैं। लेकिन आज तक जितने जंगल और पेड़ कट चुके हैं, उनके बदले खड़ा किया गया जंगल वास्तविक रूप में सामने नहीं आया है। वीडियो में महिला के दर्द और उनकी भावनाएं दिखाती हैं कि लोग अपने पेड़ों से मानवीय जुड़ाव रखते हैं, उन्हें अपने बच्चों की तरह पालते और बड़ा करते हैं। जब कोई बिल्डर या जमीन व्यापारी बिना अनुमति के ऐसे पेड़ काटता है, तो यह केवल व्यक्तिगत नुकसान नहीं, बल्कि पर्यावरणीय और सामाजिक हानि भी है।
कानूनी पहलुओं की दृष्टि से, पेड़ काटने के लिए स्थानीय वन विभाग की अनुमति आवश्यक होती है। यदि बिना अनुमति किसी पेड़ को काटा जाता है, तो यह पर्यावरण संरक्षण कानूनों का उल्लंघन माना जाता है और इसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इस घटना में ग्रामीणों द्वारा प्रदर्शन किए जाने और सोशल मीडिया पर मामले के उजागर होने के बाद प्रशासन की नजर इस मामले पर लगी हुई है।
इस घटना ने समाज के सामने यह संदेश रखा है कि पेड़ न केवल पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि वे स्थानीय समुदायों की भावनाओं और जीवन के लिए भी अहम हैं। किसी भी विकास गतिविधि में पर्यावरण और सामाजिक जिम्मेदारी को नजरअंदाज करना दीर्घकालीन नकारात्मक प्रभाव छोड़ सकता है।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
