डेढ़ साल के बच्चे के पेट से निकला 'हल्क', 45 मिनट की जद्दोजहद से सुरक्षित निकाला गया फंसा हुआ हल्क
अहमदाबाद सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने एंडोस्कोपी के जरिए डेढ़ साल के बच्चे के पेट से निगला हुआ 'हल्क' खिलौना निकालकर उसकी जान बचाई। 45 मिनट तक चली इस जटिल प्रक्रिया की पूरी कहानी और डॉक्टरों द्वारा माता-पिता के लिए जारी की गई विशेष चेतावनी जानने के लिए पढ़ें यह विस्तृत रिपोर्ट। गुजरात स्वास्थ्य तंत्र की बड़ी सफलता।

अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में चिकित्सा कौशल और तत्परता का एक ऐसा उदाहरण सामने आया है, जिसने न केवल एक मासूम की जान बचाई, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की संवेदनशीलता को भी रेखांकित किया है। घटना डेढ़ वर्षीय बालक वंश की है, जिसने खेलते समय अनजाने में 'हल्क' नाम का एक प्लास्टिक का खिलौना निगल लिया था। जैसे ही परिजनों को इस बात का आभास हुआ कि बालक ने खिलौना निगल लिया है और उसे सांस लेने व असहजता महसूस हो रही है, उसे तत्काल अहमदाबाद सिविल अस्पताल ले जाया गया। वहां मौजूद डॉक्टरों की टीम ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बिना समय गंवाए उपचार की प्रक्रिया शुरू की, क्योंकि खिलौना बच्चे के आंतरिक अंगों को नुकसान पहुँचा सकता था।
डॉक्टरों और स्वास्थ्य टीम ने लगभग 45 मिनट तक चली एक जटिल और चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया के बाद एंडोस्कोपी की सहायता से उस खिलौने को बाहर निकालने में सफलता प्राप्त की। इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि खिलौने को निकालते समय बालक के गले या पेट की कोमल परतों को कोई चोट न पहुंचे। अस्पताल की चिकित्सा टीम के उत्कृष्ट समन्वय और सटीक निर्णय क्षमता के कारण, बिना किसी सर्जिकल कट या गंभीर क्षति के खिलौने को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। राज्य सरकार के मार्गदर्शन में संचालित गुजरात का स्वास्थ्य तंत्र इस सफल ऑपरेशन के माध्यम से एक बार फिर नागरिकों के भरोसे पर खरा उतरा है।
वर्तमान में वंश पूरी तरह स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। अस्पताल प्रशासन और विशेषज्ञ डॉक्टरों ने इस घटना के माध्यम से सभी माता-पिता के लिए एक महत्वपूर्ण परामर्श जारी किया है। डॉक्टरों का कहना है कि छोटे बच्चों के आसपास छोटे खिलौने या ऐसी वस्तुएं रखना जानलेवा साबित हो सकता है, जिन्हें वे निगल सकें। यह सफल ऑपरेशन न केवल चिकित्सा विज्ञान की जीत है, बल्कि यह समाज के लिए एक चेतावनी भी है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर मामूली सी लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है। सिविल अस्पताल की इस उपलब्धि ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि निष्ठा और टीम वर्क से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
