Dhurandhar 2 के लिए लखनऊ में भिड़ गए पिता और थिएटर स्टाफ ; वजह जान हो जाएंगे हैरान
लखनऊ में ‘A-रेटेड’ फिल्म Dhurandhar 2: The Revenge को लेकर विवाद, जब नाबालिग को प्रवेश से रोके जाने पर पिता और थिएटर स्टाफ के बीच झड़प हो गई। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद नियमों, अभिभावकीय अधिकार और कानून के पालन पर बहस तेज हो गई।

धुरंधर 2 विवाद लखनऊ
लखनऊ में हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म Dhurandhar 2: The Revenge को लेकर एक ऐसा विवाद सामने आया है, जिसने सिनेमा हॉल में नियमों के पालन और दर्शकों की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना उस समय हुई जब एक परिवार अपने नाबालिग बच्चे के साथ फिल्म देखने पहुंचा, लेकिन थिएटर स्टाफ द्वारा प्रवेश से मना किए जाने पर मामला अचानक तनावपूर्ण हो गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक व्यक्ति अपने नाबालिग बेटे को साथ लेकर फिल्म देखने के लिए सिनेमा हॉल पहुंचा था। चूंकि यह फिल्म ‘A’ श्रेणी में प्रमाणित है, जिसके तहत 18 वर्ष से कम आयु के दर्शकों को प्रवेश की अनुमति नहीं होती, इसलिए थिएटर स्टाफ ने नियमों के अनुसार बच्चे को अंदर जाने से रोक दिया।
Lulu mall, Lucknow UP: Kid stopped from watching Dhurandhar 2, family member loses control and clashes with theatre staff. pic.twitter.com/9rBSjRumrd
— Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 27, 2026
हालांकि, बच्चे के पिता ने इस फैसले का विरोध करते हुए यह तर्क दिया कि उनका बेटा “पर्याप्त रूप से परिपक्व” है और फिल्म देख सकता है। लेकिन जब स्टाफ ने नियमों का हवाला देते हुए अपनी बात पर अडिग रहने का निर्णय लिया, तो स्थिति तेजी से बिगड़ने लगी। विवाद बढ़ते-बढ़ते हाथापाई में बदल गया, जिसमें आरोप है कि व्यक्ति ने थिएटर कर्मचारियों के साथ मारपीट की। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए सुरक्षा कर्मियों को हस्तक्षेप करना पड़ा।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद इस पूरे मामले ने व्यापक चर्चा का रूप ले लिया। कई लोगों ने थिएटर स्टाफ के निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि वे केवल निर्धारित नियमों का पालन कर रहे थे, जबकि कुछ लोगों ने अभिभावकों के अधिकारों पर भी सवाल उठाए।
इस विवाद की जड़ में फिल्म का ‘A’ प्रमाणन है, जिसे केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) द्वारा जारी किया जाता है। यह प्रमाणन स्पष्ट रूप से निर्धारित करता है कि 18 वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति को ऐसी फिल्मों को सिनेमाघरों में देखने की अनुमति नहीं है। सिनेमाघरों के लिए इन नियमों का पालन करना कानूनी रूप से अनिवार्य होता है, और किसी भी प्रकार की लापरवाही उन्हें कानूनी दायरे में ला सकती है।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब इस फिल्म को लेकर इस तरह का विवाद सामने आया हो। फिल्म की भारी लोकप्रियता, इसकी तीव्र हिंसा से भरपूर सामग्री और लंबे समय तक चलने की अवधि के कारण पहले भी कई स्थानों पर दर्शकों और प्रबंधन के बीच तनाव की स्थिति बन चुकी है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
