राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी “वंदे गंगा जल संरक्षण जन-अभियान” के अंतर्गत शनिवार को लसाड़िया पंचायत समिति की ग्राम पंचायत टेकण में जिला प्रशासन के निर्देशन में एक भव्य जल चौपाल का आयोजन किया गया। इस विशेष चौपाल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को जल संरक्षण, जल प्रबंधन, वाटर बजटिंग सहित विभिन्न कल्याणकारी सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में कई प्रशासनिक अधिकारियों और विभिन्न विभागीय प्रतिनिधियों ने शिरकत कर ग्रामीणों को आजीविका संवर्धन, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और सहकारिता से जुड़ी योजनाओं की गहन व विस्तृत जानकारी प्रदान की।

जल चौपाल को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए अतिरिक्त जिला कलक्टर डॉ. दिनेश राय सपेला ने जल की महत्ता पर विशेष बल दिया। उन्होंने गंभीर स्वर में कहा कि जल केवल एक प्राकृतिक संसाधन मात्र नहीं है, बल्कि यह हमारी आने वाली पीढ़ियों की एक अमूल्य धरोहर है। डॉ. सपेला ने स्पष्ट किया कि 'वंदे गंगा जल संरक्षण जन-अभियान' पूर्णतः जनभागीदारी पर टिकी हुई एक दूरदर्शी मुहिम है, जिसकी वास्तविक सफलता तभी सुनिश्चित हो सकती है जब प्रत्येक नागरिक पानी की एक-एक बूंद के महत्व को समझे और उसके संरक्षण का दृढ़ संकल्प ले। उन्होंने उपस्थित ग्रामीण जनसमूह से वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) करने, अपने पारंपरिक जल स्रोतों का जीर्णोद्धार व संरक्षण करने तथा जल के विवेकपूर्ण व सीमित उपयोग को अपनी दैनिक जीवनशैली का अनिवार्य हिस्सा बनाने का पुरजोर आह्वान किया। उन्होंने आगे जोड़ा कि जल संरक्षण का यह कार्य केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है, अपितु यह हमारा सामूहिक सामाजिक उत्तरदायित्व है जिसके लिए सभी के संगठित प्रयासों की महती आवश्यकता है।

इसी क्रम में जल चौपाल के दौरान कृषि विभाग के अधिकारियों ने उपस्थित किसानों को विभागीय योजनाओं से रूबरू कराते हुए बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में आय वृद्धि के उद्देश्य से विभिन्न योजनाओं के माध्यम से बकरी वितरण, मुर्गी पालन के लिए 25-25 चूजों के सेट का वितरण और उन्नत किस्म के प्रमाणित बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अधिकारियों ने इस बात को विशेष रूप से रेखांकित किया कि वर्तमान में संचालित इस जल संरक्षण अभियान के अंतर्गत कुल नौ विभाग आपस में पूर्ण तालमेल और समन्वित रूप से कार्य कर रहे हैं ताकि ग्रामीणों को सभी जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ एक ही मंच पर पहुंचाया जा सके।

ग्रामीणों को तकनीकी विषयों से जोड़ने के लिए अधीक्षण अभियंता वाटरशेड रतन सिंह भाटी ने बेहद सरल और सुबोध भाषा में “वाटर बजटिंग” (जल गणना) की अनूठी अवधारणा को समझाया। उन्होंने ग्रामीणों को प्रेरित करते हुए बताया कि जिस प्रकार सरकार पूरे एक वित्तीय वर्ष के लेखा-जोखा के लिए बजट तैयार करती है, ठीक उसी तर्ज पर अब गांवों में भी उपलब्ध जल संसाधनों और उनकी वास्तविक मांग का सटीक आकलन कर जल बजट तैयार किया जाता है। भाटी ने समझाया कि किसी विशिष्ट क्षेत्र में वर्षा की संभावनाओं, वहां मौजूद पारंपरिक जल स्रोतों, तालाबों, जलाशयों और पानी के उपयोग की वर्तमान स्थिति का गहन विश्लेषण कर यह तय किया जाता है कि गांव में कितना पानी उपलब्ध है और भविष्य की आवश्यकताओं के लिए कितने जल को संरक्षित करने की जरूरत है। उन्होंने आगे विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि वाटर बजटिंग के माध्यम से यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि वर्तमान में निर्मित जल संरचनाएं कितनी उपयोगी सिद्ध हो रही हैं तथा अतिरिक्त जल संचयन संरचनाओं (एनिकेट, तालाब आदि) की कहां-कहां नितांत आवश्यकता है। इसके साथ ही उन्होंने किसानों को जल दक्ष आधुनिक सिंचाई प्रणालियों को अपनाने की महत्वपूर्ण सलाह दी और कहा कि पारंपरिक सिंचाई पद्धतियों के स्थान पर फव्वारा, बूंद-बूंद (ड्रिप) एवं अन्य सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों के वैज्ञानिक उपयोग से 25 से 30 प्रतिशत तक अमूल्य जल की सीधे तौर पर बचत की जा सकती है।

स्वास्थ्य क्षेत्र पर प्रकाश डालते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. महेंद्र परमार ने स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकताओं और योजनाओं की कड़ियों को ग्रामीणों के सामने रखा। उन्होंने विशेष रूप से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, उचित पोषण और सरकार की महत्वाकांक्षी “लाड़ो प्रोत्साहन योजना” के संबंध में विस्तार से जानकारी साझा की। उन्होंने ग्रामीणों को जागरूक करते हुए इन निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं का समाज के अंतिम छोर तक अधिकाधिक लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।

सहकारिता के ढांचे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से सहकारिता विभाग के सहायक रजिस्ट्रार ओंकार लाल बुनकर ने चौपाल में अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि लसाड़िया क्षेत्र में सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों और आम ग्रामीणों को विभिन्न प्रकार की रीढ़ संबंधी व वित्तीय सुविधाएं सुलभ कराई जा रही हैं। उन्होंने टेकण ग्राम पंचायत के निवासियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि की जानकारी देते हुए बताया कि यहां लैम्प्स (LAMPS - लार्ज एरिया मल्टी-पर्पज को-ऑपरेटिव सोसाइटी) का विधिवत गठन किया जा चुका है, जिसके माध्यम से अब कोई भी पात्र ग्रामीण बेहद आसानी से ऋण एवं अन्य उपयोगी सहकारी योजनाओं का त्वरित लाभ प्राप्त कर सकता है।

शिक्षा की आवश्यकता को सर्वोपरि बताते हुए जिला शिक्षा अधिकारी माया बजाड़ ने मानवीय जीवन में शिक्षा के महत्व पर गहरा प्रकाश डाला। उन्होंने दृढ़तापूर्वक कहा कि शिक्षा प्राप्त करना प्रत्येक बच्चे का मूलभूत और मौलिक अधिकार है। उन्होंने चौपाल में उमड़े ग्रामीणों से भावुक अपील करते हुए कहा कि वे अपने बच्चों को खेतों या अन्य कामों में लगाने के बजाय नियमित रूप से विद्यालय भेजें और उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाएं। उन्होंने व्यावहारिक उदाहरण देते हुए समझाया कि सरकार बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए विद्यालय भवनों के निर्माण, आधुनिक शैक्षणिक संसाधनों की उपलब्धता एवं शिक्षकों के वेतन पर व्यापक स्तर पर लोक धन का व्यय कर रही है, अतः अब अभिभावकों का भी यह परम दायित्व बनता है कि वे अपने बच्चों को अनिवार्य रूप से शिक्षा से जोड़ें और उनके स्वर्णिम भविष्य का मार्ग प्रशस्त करने में सहभागी बनें।

चौपाल में उस समय स्थानीय जुड़ाव देखने को मिला जब आयुर्वेद विभाग के डॉ. जितेन्द्र जोशी ने मंच से सीधे स्थानीय वागड़ी भाषा में ग्रामीणों से संवाद स्थापित किया। उन्होंने वागड़ी भाषा में बात करते हुए आयुर्वेदिक जीवनशैली, स्वस्थ दिनचर्या और पर्यावरण संरक्षण के अंतर्संबंधों को बेहद खूबसूरती से रेखांकित किया। डॉ. जोशी ने सचेत करते हुए कहा कि आधुनिक समय में बदलती जीवनशैली के कारण अनेक असाध्य बीमारियां लगातार पैर पसार रही हैं, जिनसे सुरक्षित बचने के लिए हमें पुनः अपनी प्राकृतिक, पारंपरिक एवं संतुलित जीवन पद्धति की ओर लौटना होगा। उन्होंने पूरे गांव को प्लास्टिक मुक्त जीवन जीने, स्वच्छता बनाए रखने और स्वास्थ्यवर्धक आदतों को आत्मसात करने का कड़ा संदेश दिया।

इस जल चौपाल की एक अनूठी विशेषता यह रही कि यह केवल एकतरफा संवाद नहीं था। चौपाल के दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित ग्रामीणों ने अपनी विभिन्न स्थानीय समस्याओं, प्रशासनिक अड़चनों और बहुमूल्य सुझावों को खुलकर सीधे आला अधिकारियों के समक्ष रखा। मंच पर मौजूद अधिकारियों ने ग्रामीणों की समस्याओं को पूरी संवेदनशीलता से सुना और मौके पर ही संबंधित विभागीय अधीनस्थ कर्मचारियों व अधिकारियों को त्वरित एवं आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के कड़े विधिक व प्रशासनिक निर्देश प्रदान किए।

कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी व व्यावहारिक बनाने में प्रदान सेवा संस्थान के प्रतिनिधियों ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संस्थान के कार्यकर्ताओं ने आकर्षक पोस्टरों, चार्टों एवं सजीव व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से मानव जीवन में जल की अपरिहार्य आवश्यकता, विवेकपूर्ण जल उपयोग एवं वैज्ञानिक जल गणना की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही सरल ढंग से प्रदर्शित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि किस प्रकार घर, खेत और संपूर्ण गांव के स्तर पर पानी की मांग और उसकी कुल उपलब्धता का सटीक आकलन कर ग्रामीण खुद अपने स्तर पर जल संरक्षण की एक बेहद कारगर और बेहतर सूक्ष्म कार्ययोजना तैयार कर सकते हैं।

कार्यक्रम के समापन सत्र में लसाड़िया के उपखंड अधिकारी ने जल चौपाल में पधारे सभी विभागीय उच्चाधिकारियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों के जुझारू प्रतिनिधियों तथा अत्यंत भारी संख्या में आए टेकण के ग्रामीण भाई-बहनों व मातृशक्ति का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने अंत में उपस्थित जनसैलाब को संकल्प दिलाते हुए आह्वान किया कि जल संकट के इस दौर में जल संरक्षण को मात्र एक अभियान न समझकर इसे हर घर-गांव का एक सशक्त जनआंदोलन बनाना होगा, तभी हमारी धरा और हमारा भविष्य सुरक्षित रह पाएगा।

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