उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा के मेधावियों को धामी ने किया सम्मानित
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय शैक्षिक उत्कृष्टता पुरस्कार समारोह में 63 मेधावी छात्रों और 6 प्रधानाचार्यों को सम्मानित किया।

देहरादून स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत और अन्य अधिकारियों के साथ मेधावी छात्र-छात्राएं।
उत्तराखंड के मेधावी विद्यार्थियों की उपलब्धियों को सम्मानित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रतिभाशाली छात्र-छात्राएं प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य के आधार स्तंभ हैं। उन्होंने शिक्षा को आधुनिक तकनीक, नवाचार, व्यावहारिक ज्ञान और भारतीय जीवन मूल्यों से जोड़ने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को सरकार की प्राथमिकता बताया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय शैक्षिक उत्कृष्टता पुरस्कार वितरण समारोह में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद की वर्ष 2026 की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षाओं में शीर्ष 10 स्थान प्राप्त करने वाले 63 मेधावी छात्र-छात्राओं तथा उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम देने वाले छह विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को सम्मानित किया गया।
समारोह में हाईस्कूल के 38 और इंटरमीडिएट के 25 विद्यार्थियों को पुरस्कार प्रदान किए गए। हाईस्कूल परीक्षा में अक्षत गोपाल ने 98.20 प्रतिशत अंक हासिल कर प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं, इंटरमीडिएट परीक्षा में गीतिका पंत और सुशीला मेहंदीरत्ता ने संयुक्त रूप से 98 प्रतिशत अंक प्राप्त कर पहला स्थान हासिल किया। इसके अतिरिक्त हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर पर उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम देने वाले तीन-तीन विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को प्रशस्ति पत्र और मुख्यमंत्री ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया।
मुख्यमंत्री ने सभी सम्मानित विद्यार्थियों और प्रधानाचार्यों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प का परिणाम है। इस उपलब्धि में शिक्षकों और अभिभावकों का भी महत्वपूर्ण योगदान है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2026 में प्रदेश का हाईस्कूल परीक्षाफल 92.10 प्रतिशत और इंटरमीडिएट का परीक्षाफल 85.11 प्रतिशत रहा, जो सराहनीय उपलब्धि है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदेश के विद्यार्थी आगे भी अपनी प्रतिभा और परिश्रम के बल पर राज्य और देश का नाम रोशन करेंगे।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे एकात्म मानववाद और अंत्योदय के प्रणेता होने के साथ महान विचारक, शिक्षाविद् और समाजसेवी थे। उनका मानना था कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसमें राष्ट्रप्रेम, नैतिक मूल्यों, सामाजिक समरसता और व्यावहारिक ज्ञान का भी समावेश होना चाहिए। उनके विचार आज भी शिक्षित, सशक्त और आत्मनिर्भर समाज के निर्माण की प्रेरणा देते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से देश की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, व्यावहारिक और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। उत्तराखंड राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल है। राज्य सरकार शिक्षा में नवाचार, डिजिटल लर्निंग और भारतीय जीवन मूल्यों को बढ़ावा देने के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दे रही है।
शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की योजनाओं और व्यवस्थाओं की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि नंदा गौरा योजना के अंतर्गत 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाली पात्र छात्राओं को 51 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा रही है। दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 500 विद्यालयों में वर्चुअल क्लासरूम और सेंट्रल स्टूडियो की व्यवस्था की जा रही है। प्रदेश में 189 अटल उत्कृष्ट विद्यालय स्थापित किए गए हैं तथा सरकारी विद्यालयों में एनसीईआरटी की पुस्तकों को अनिवार्य किया गया है।
उन्होंने कहा कि विद्यालयों की प्रयोगशालाओं को आधुनिक बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि विद्यार्थियों में व्यावहारिक ज्ञान और नई तकनीकों की समझ विकसित हो सके। मुख्यमंत्री बालाश्रय योजना के माध्यम से अनाथ बच्चों की निःशुल्क शिक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अपनी प्रतिभा निखारने के समान अवसर उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड के पूर्ण साक्षर राज्य बनने की उपलब्धि को प्रदेश के लिए गौरव का विषय बताया। उन्होंने इस अभियान से जुड़े शिक्षकों, अधिकारियों, स्वयंसेवकों और प्रदेशवासियों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि पूर्ण साक्षर राज्य बनना मंजिल नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। अब प्रत्येक नागरिक को डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता और जीवनोपयोगी कौशल से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ना है।
उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि प्रत्येक नागरिक नई तकनीकों का उपयोग अपने जीवन को बेहतर बनाने, आजीविका को मजबूत करने और समाज की प्रगति में योगदान देने के लिए कर सके।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है। इस संकल्प को साकार करने में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और युवा पीढ़ी की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश के मेधावी विद्यार्थी अपने ज्ञान, कौशल और परिश्रम के बल पर सफलता के नए आयाम स्थापित करेंगे तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
समारोह में शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, विधायक श्रीमती सविता कपूर, सचिव शिक्षा सुश्री ज्योति यादव, अपर सचिव शिक्षा श्रीमती नमामि बंसल और शिक्षा विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विद्यार्थियों की शैक्षिक उपलब्धियों को सम्मानित करने के साथ प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण, तकनीक आधारित और मूल्यपरक शिक्षा को आगे बढ़ाने की सरकार की प्रतिबद्धता भी सामने आई।

Pratahkal Bureau
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