पुष्कर सिंह धामी ने लेखक गाँव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव का किया विमोचन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में साहित्य पर्यटन को बढ़ावा देने और राज्य में दो साहित्य ग्राम स्थापित करने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून के थानों में लेखक गाँव महोत्सव के समापन पर किया संबोधित।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को देहरादून के थानों स्थित लेखक गाँव में आयोजित लेखक गाँव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव-2026 के समापन समारोह में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने लेखक गाँव की पत्रिका "धरती का स्वर्ग उत्तराखंड" और "देवभूमि का काव्य पुष्प" पुस्तिका का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि से निकले विचारों ने हमेशा समाज को प्रेरित करने और आगे बढ़ाने का काम किया है। उन्होंने साहित्यिक विरासत के संरक्षण, स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने और उत्तराखंड को साहित्यिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए राज्य सरकार के प्रयासों की जानकारी दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लेखक गाँव समाज को दिशा देने वाले विचारों का प्रतीक है, जो वर्तमान के साथ भविष्य का भी निर्माण कर रहा है। यह प्रदेश की स्थानीय प्रतिभाओं को नया मंच देने के साथ साहित्यिक मानचित्र पर उत्तराखंड को नई पहचान दिला रहा है। उन्होंने भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी का स्मरण करते हुए कहा कि अटल जी शब्दों के साधक थे। उनकी लेखनी में पर्वतों जैसी दृढ़ता और गंगा जैसी गहराई थी। उन्होंने सिखाया कि शब्द भी राष्ट्र निर्माण के शस्त्र बन सकते हैं।
धामी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड हमेशा से रचनात्मकता, ज्ञान और संस्कृति का केंद्र रही है। यहां से निकले विचारों ने समाज को प्रेरित किया है। उत्तराखंड में ऋषियों ने अनेक महान ग्रंथों की रचना की। देवभूमि के प्राकृतिक सौंदर्य ने भी हमेशा लेखकों, कवियों और विचारकों को प्रेरित किया है। साहित्य हमारे मूल्यों और विचारों को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लेखकों, कवियों और रचनाकारों ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान भी लेखकों और साहित्यकारों ने योगदान दिया। उनके अनुसार, लेखक और रचनाकार केवल शब्दों के निर्माता नहीं होते, बल्कि समाज के चिंतक और मार्गदर्शक भी होते हैं।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार साहित्य और संस्कृति के संरक्षण के लिए निरंतर काम कर रही है। उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान, साहित्य भूषण और लाइफ टाइम अचीवमेंट जैसे पुरस्कारों के माध्यम से प्रदेश के उत्कृष्ट साहित्यकारों को सम्मानित किया जा रहा है। हिंदी सहित विभिन्न स्थानीय भाषाओं में ग्रंथ प्रकाशन के लिए साहित्यकारों को अनुदान भी दिया जा रहा है। इसके साथ ही उत्तराखंड को साहित्यिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में दो साहित्य ग्रामों की स्थापना की जा रही है। इन ग्रामों में साहित्यकारों के लिए आवासीय सुविधा, आधुनिक पुस्तकालय, संगोष्ठी कक्ष और अध्ययन स्थल जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इस पहल से साहित्यकारों को राज्य में अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड की साहित्यिक विरासत को और अधिक समृद्ध बनाने के लिए संकल्पित है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सांस्कृतिक और साहित्यिक धरोहर के पुनर्जागरण के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री से प्रेरणा लेकर राज्य सरकार भी उत्तराखंड के बिखरे हुए साहित्य को संकलित, संरक्षित और पुनर्स्थापित करने के लिए ठोस एवं प्रभावी कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार विकास के साथ अपनी विरासत को बचाने का काम भी कर रही है।
केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड में ऐतिहासिक विकास कार्य हो रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों से सीमांत क्षेत्रों में रिवर्स माइग्रेशन निरंतर बढ़ रहा है। आदि कैलाश और नीति-माणा क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या में भी ऐतिहासिक वृद्धि हुई है।
टम्टा ने कहा कि पहले जिन स्थानों तक पहुंचने में पांच दिन लगते थे, आज वहां का सफर महज कुछ घंटों में पूरा हो रहा है। उन्होंने सीमांत क्षेत्रों में हो रहे बदलावों का उल्लेख करते हुए विकास कार्यों को महत्वपूर्ण बताया।
समापन समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रकाश सिंह, प्रोफेसर प्रदीप भारद्वाज, प्रो. राकेश सुंदरियाल, डॉ. विदुषी निशंक और अन्य लोग मौजूद रहे। महोत्सव के दौरान साहित्यिक विरासत के संरक्षण, रचनाकारों को सुविधाएं उपलब्ध कराने और उत्तराखंड की साहित्यिक पहचान को विस्तार देने पर राज्य सरकार की प्रतिबद्धता सामने आई।

Pratahkal Bureau
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