जयपुर में सिंधी समाज के अबूझ सावे बन बधड़ी के अवसर पर बुधवार 23 सितंबर को 9 जोड़ों का सामूहिक विवाह आयोजित किया जाएगा। भगवान श्री झूलेलाल सेवा समिति, मानसरोवर के तत्वावधान में न्यू सांगानेर रोड स्थित लाइंस पैराडाइज में विवाह समारोह होगा।

संयोजिका शोभा बसंतानी ने बताया कि सामूहिक विवाह से पहले अग्रवाल फार्म स्थित शीश महल झूलेलाल मंदिर से दोपहर 2 बजे सुंदर बैंड की मधुर ध्वनि के साथ दूल्हों की बारात निकाली जाएगी। पल्लव प्रार्थना के साथ गणेश जी महाराज एवं भगवान श्री झूलेलाल की आराधना कर सामूहिक विवाह सम्मेलन का शुभारंभ होगा। भगवान श्री झूलेलाल के वंशज दादा सुंदर ठाकुर बारात को रवाना करेंगे। इस अवसर पर शहर के गणमान्य नागरिक भी बारात में शामिल होंगे।

सभी दूल्हे घोड़ियों पर सवार होकर विवाह स्थल पहुंचेंगे। पंडित सतीश शर्मा के आचार्यत्व में विद्वान पंडितों द्वारा सनातन धर्म पद्धति एवं सिंधी रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह की रस्में संपन्न कराई जाएंगी। भगवान भुवन भास्कर एवं अग्निदेव को साक्षी मानकर वर-वधु परिणय सूत्र में बंधेंगे।

श्री अमरापुर दरबार के संत मोहन प्रकाश जी, पुरसनाराम मंडल के साईं मुकेश साध सहित शहर के गणमान्य नागरिक नवयुगलों को आशीर्वाद देंगे। माधुरी बसंतानी के निर्देशन में महिलाएं खुशी के गीतों पर सिंधी नृत्य की प्रस्तुति देंगी।

नई गृहस्थी बसाने के उद्देश्य से श्री अमरापुर दरबार की ओर से कन्या को आशीर्वाद स्वरूप साड़ी प्रदान की गई है। गोवर्धन आसनानी ने स्वर्ण मंगलसूत्र, प्रमोद नावानी ने स्वर्ण अंगूठी, हनी लखवानी ने ब्रांडेड फ्रिज, नन्दलाल वासुजा ने वाशिंग मशीन, धीरज विशनानी ने ड्रेसिंग टेबल, दीनदयाल वाधवानी ने दूल्हे का सूट तथा शोभा बसंतानी ने दुल्हन का बेस दिया है। इसके अतिरिक्त कपड़े, बर्तन एवं घरेलू उपयोग की अनेक वस्तुएं भी नवविवाहित जोड़ों को उपहार स्वरूप प्रदान की जाएंगी।

समन्वयक तुलसी संगतानी ने बताया कि सनातन धर्म में भगवान विष्णु के वामन अवतार के प्राकट्य दिवस को वामन जयंती के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु ने राजा बलि के अहंकार का नाश करने के लिए वामन अवतार धारण किया था।

सिंधी समाज में वामन जयंती का विशेष महत्व माना जाता है। इसे अबूझ सावे के रूप में भी जाना जाता है। विशेष रूप से चौमासे के दौरान जब सामान्य विवाह मुहूर्त उपलब्ध नहीं होते, तब वामन जयंती के अवसर पर विवाह संस्कार संपन्न कराने की परंपरा सिंधी समाज में देखने को मिलती है। इसी परंपरा के तहत बन बधड़ी के अवसर पर सामूहिक विवाह का आयोजन किया जा रहा है।

सामूहिक विवाह की व्यवस्थाओं को पीयूष बच्चानी, गुलाब राय धीरवानी, धीरज कुमार, भगवान दास बबल, सीमा गोलानी, लीना टिकयानी, ज्योति कवलानी, कविता लालवानी आदि कई कार्यकर्ता संभाल रहे हैं। बुधवार को होने वाला यह आयोजन सिंधी समाज की विवाह परंपरा, धार्मिक आस्था और सामूहिक सहभागिता को एक साथ सामने लाएगा।

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