लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा सरकारी नल की टोंटी चोरी होने का संदर्भ दिए जाने के बाद दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज हुई।

CM Yogi Adityanath Tonti statement Lucknow : उत्तर प्रदेश की राजनीतिक फिजाओं में एक बार फिर 'टोंटी' को लेकर बयानों के तीखे तीर चलने शुरू हो गए हैं, जिसने राज्य के सियासी पारे को अचानक सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। राजधानी लखनऊ में विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर आयोजित 'एक पेड़ मां के नाम' महा-अभियान के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा दिए गए एक बयान ने अचानक राजनीतिक हलचल तेज कर दी। मुख्यमंत्री के इस परोक्ष तंज के बाद विपक्षी खेमे में भारी खलबली मच गई और कुछ ही घंटों के भीतर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का बेहद आक्रामक पलटवार सामने आया। हालांकि सपा प्रमुख ने अपने आधिकारिक बयान में सीधे तौर पर किसी का नाम नहीं लिया है, लेकिन उनके शब्दों की कड़वाहट और तीखापन साफ तौर पर मुख्यमंत्री के बयान की तरफ ही इशारा कर रहा है। इस ताजा जुबानी जंग ने लोकसभा चुनाव के बाद यूपी की राजनीति में शह-मात के खेल को एक बार फिर सार्वजनिक मंच पर ला खड़ा किया है।

इस पूरे विवाद की पटकथा शुक्रवार को लखनऊ में आयोजित सरकारी कार्यक्रम के दौरान लिखी गई, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी पर अपनी बात रख रहे थे। इसी दौरान देश के जल संकट और ग्रामीण विकास का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने 'हर घर नल योजना' की प्रगति का खाका खींचा। लेकिन, इसी भाषण के बीच उन्होंने अचानक एक ऐसा संदर्भ जोड़ दिया जिसने राजनीतिक गलियारों के कान खड़े कर दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने हर घर तक पानी पहुंचाने के लिए नल की योजना को आगे बढ़ाया, लेकिन धरातल पर पता लगता है कि कोई टोंटी चोरी कर रहा है तो कोई अन्य प्रकार से सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने जनता को उनके नागरिक कर्तव्यों की याद दिलाते हुए कहा कि यह हम सबका सामूहिक दायित्व है कि अगर कोई व्यक्ति इस तरह की चोरी कर रहा है या टोंटी खोलकर भाग रहा है, तो उसे बीच में ही टोका जाना चाहिए। मुख्यमंत्री का यह बयान आते ही सियासी हलकों में इसे सीधे तौर पर अखिलेश यादव के पुराने सरकारी बंगले से जुड़े विवादों के संदर्भ के रूप में देखा जाने लगा।

मुख्यमंत्री के इस परोक्ष हमले के तुरंत बाद समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने मोर्चा संभाल लिया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर बेहद सख्त और कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए एक लंबा पोस्ट साझा किया, जिसने राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया। सपा चीफ ने लिखा कि लत से गलत की ओर बढ़ता विवेक इंसानों से सोचने-समझने की क्षमता छीन लेता है और निर्दोष लोगों की हत्याओं का खौफ रातों की नींद उड़ा देता है। उन्होंने बिना नाम लिए सीधे मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि पूरे होश में रहकर इतने उच्च संवैधानिक पद पर बैठकर ऐसा निकृष्ट बयान कोई नहीं दे सकता। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अखिलेश यादव ने चुनावी नतीजों और हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों का संदर्भ देते हुए लिखा कि कुछ लोग अपनी प्रशासनिक और राजनीतिक असफलता के लिए हमेशा दूसरों को दोषी ठहराते हैं। उन्होंने इस बयान को पूरी तरह से 'हार की हताशा' करार दिया और चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अब कुदरत का बुलडोजर घूम चुका है, जो अहंकार को नेस्तनाबूद कर देगा।

इस तीखी बयानबाजी के बीच मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के आधिकारिक मंच से पर्यावरण, कृषि और वैश्विक जलवायु संकट को लेकर भी कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक बातें सामने रखीं। उन्होंने पर्यावरण दिवस के वैश्विक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि जिस मां ने हमें जन्म दिया है और जिस धरती पर हमारा पालन-पोषण हुआ है, उसके प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना और कृतज्ञता ज्ञापित करना हर नागरिक का नैतिक धर्म है। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि अगर बढ़ते प्रदूषण के कारण मौसम चक्र में इसी तरह असंतुलन और अंतर आता रहा, तो इसका सबसे गंभीर और सीधा प्रभाव देश के अन्नदाता यानी किसान पर पड़ेगा। किसानों की आमदनी घटने से देश के सामने अतिवृष्टि और अनावृष्टि (सूखे) का संकट खड़ा हो सकता है, जिससे खाद्य सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा पैदा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया इन पर्यावरणीय चुनौतियों को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है और भारत इसमें अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

लखनऊ के इस मंच से शुरू हुआ यह विवाद केवल बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके गहरे कानूनी और राजनीतिक निहितार्थ हैं। यूपी की सियासत में 'टोंटी' और 'बुलडोजर' जैसे शब्द लंबे समय से दोनों पार्टियों के बीच वैधानिक और नैतिक मर्यादाओं की जंग का प्रतीक रहे हैं। पूर्व में बंगले की टूट-फूट को लेकर हुए सरकारी ऑडिट और जांच रिपोर्टों के कानूनी संदर्भों को एक बार फिर इस राजनीतिक बहस के जरिए हवा मिल गई है। विश्लेषकों का मानना है कि विश्व पर्यावरण दिवस जैसे एक गंभीर और वैश्विक विषय पर आयोजित कार्यक्रम का इस तरह से तीखे राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो जाना यह दर्शाता है कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की विधानसभा और सड़कों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच यह टकराव और अधिक उग्र रूप धारण करने वाला है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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