जिसे लोग मान रहे 'ईश्वरीय चमत्कार', वह दरअसल है एक जानलेवा बीमारी; जानें बिजनौर में मूर्ति की परिक्रमा कर रहे कुत्ते का दर्दनाक सच
बिजनौर में हनुमान जी की मूर्ति की परिक्रमा कर रहे कुत्ते को लोग चमत्कार मान पूज रहे हैं, लेकिन हकीकत में वह 'कैनाइन डिस्टेंपर' नामक जानलेवा बीमारी से जूझ रहा है। इस न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर में जानवर अपना मानसिक संतुलन खो देता है और गोल-गोल घूमने लगता है। जानें इस वायरल वीडियो के पीछे का पूरा वैज्ञानिक सच और बीमारी के लक्षण।

बिजनौर। आस्था और विज्ञान के बीच का द्वंद्व अक्सर समाज में चर्चा का विषय बन जाता है। इन दिनों उत्तर प्रदेश का बिजनौर जिला एक ऐसी ही अनोखी, लेकिन चिंताजनक घटना का गवाह बना हुआ है। यहाँ एक कुत्ता लगातार बजरंगबली की मूर्ति के चक्कर लगा रहा है। इस दृश्य को देखकर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने इसे 'ईश्वरीय चमत्कार' मान लिया है और उस बेजुबान को पूजना शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया पर यह वीडियो आग की तरह फैल रहा है, जिसे 'भक्ति की शक्ति' के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। लेकिन, इस 'चमत्कार' के पीछे की हकीकत बेहद दर्दनाक और वैज्ञानिक है, जिसे जानना हर जागरूक नागरिक के लिए आवश्यक है।
आस्था का केंद्र या बीमारी का लक्षण?
बिजनौर के एक मंदिर परिसर में पिछले कुछ दिनों से एक कुत्ता लगातार गोल-गोल घूमकर हनुमान जी की मूर्ति की परिक्रमा कर रहा है। आम तौर पर जानवरों का ऐसा व्यवहार देखने को नहीं मिलता, इसलिए श्रद्धालुओं ने इसे दैवीय संकेत मान लिया। लोग इसे भगवान का दूत मानकर नतमस्तक हो रहे हैं। हालांकि, पशु चिकित्सा विशेषज्ञों और विज्ञान के नजरिए से देखें, तो यह कोई भक्ति नहीं, बल्कि एक गंभीर बीमारी की निशानी है।
क्या है वैज्ञानिक हकीकत?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कुत्ता 'कैनाइन डिस्टेंपर' (Canine Distemper) नामक एक अत्यंत संक्रामक और जानलेवा वायरल बीमारी से ग्रसित है। यह वायरस सीधे कुत्ते के तंत्रिका तंत्र (Nervous System) पर हमला करता है, जिससे उसका दिमागी संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाता है।
इस बीमारी की गंभीरता को इन बिंदुओं से समझा जा सकता है:
- न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर: जब वायरस दिमाग तक पहुंचता है, तो जानवर को दिशा का ज्ञान नहीं रहता और वह एक ही जगह या किसी वस्तु के चारों ओर गोल-गोल घूमने लगता है (Circling)। इसे भक्ति समझना एक भूल है।
- शारीरिक लक्षण: इस संक्रमण में कुत्ते को तेज बुखार, खाँसी, आँखों और नाक से पानी आना, उल्टी, दस्त और सुस्ती जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
- दौरे पड़ना: स्थिति बिगड़ने पर जानवर को दौरे (Seizures) पड़ने लगते हैं, जो अंततः उसकी मृत्यु का कारण बन सकते हैं।
इलाज की जरूरत, पूजा की नहीं
यह स्थिति कड़े शब्दों में समाज की जागरूकता पर सवाल खड़ी करती है। जिस बेजुबान को तत्काल चिकित्सा और सहानुभूति की आवश्यकता है, उसे भीड़ ने अंधविश्वास के चलते घेर रखा है। 'कैनाइन डिस्टेंपर' श्वसन और पाचन तंत्र को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर देता है। यह बीमारी इतनी संक्रामक है कि यह हवा और संपर्क के माध्यम से अन्य कुत्तों में भी फैल सकती है। यद्यपि इसका कोई निश्चित इलाज (Specific Cure) नहीं है, लेकिन समय रहते सहायक उपचार (Supportive Care) से उसकी पीड़ा को कम किया जा सकता है।
इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि जागरूकता के अभाव में हम अक्सर किसी की पीड़ा को चमत्कार का नाम दे देते हैं। उस कुत्ते को 'भगवान का दूत' बनाने के बजाय, उसे एक पशु चिकित्सक के पास ले जाना ही सच्ची मानवता और ईश्वर की सेवा है। प्रशासन और स्थानीय पशु कल्याण संस्थाओं को संज्ञान लेकर उक्त कुत्ते को आइसोलेट करने और उपचार मुहैया कराने की आवश्यकता है, ताकि अंधविश्वास के शोर में एक बेजुबान की जान न चली जाए।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
