मिर्जापुर निवासी तथा सर्वोच्च न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय में वकालत करने वाले अधिवक्ता शिशिर पाण्डेय की पैरवी में संजय श्याम सुंदर नारंग और उनकी फर्म मेसर्स ENCON को वसई-विरार के कथित अवैध निर्माण और रिश्वतखोरी से जुड़े धनशोधन मामले में महत्वपूर्ण न्यायिक राहत मिली है। अपीलीय ट्रिब्यूनल ने 20 अगस्त 2026 को नारंग और ENCON के बैंक खातों तथा सावधि जमाओं की फ्रीजिंग जारी रखने और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को रोके रखने की अनुमति देने वाला आदेश उनके संबंध में रद्द कर दिया।

मामले में खास बात यह रही कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुका था और संजय श्याम सुंदर नारंग को आरोपी भी बनाया गया था। इसके बावजूद ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि चार्जशीट दाखिल होने से संपत्ति मुक्त करने की उसकी अपीलीय शक्ति समाप्त नहीं होती।

ट्रिब्यूनल के सदस्य वी. अनंदराजन ने पाया कि फ्रीज की गई संपत्तियों और कथित अपराध की आय के बीच ठोस संबंध स्थापित नहीं किया गया था। कथित अपराध की आय का स्पष्ट निर्धारण भी नहीं हुआ था। दूसरी ओर, अपीलकर्ताओं ने धन के स्रोतों के समर्थन में दस्तावेज प्रस्तुत किए थे। इन दस्तावेजों में दिए गए विशिष्ट स्पष्टीकरणों का ED की ओर से खंडन नहीं किया गया।

ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि साक्ष्य की कमी को अटकलों, अनुमानों या सामान्य टिप्पणियों से पूरा नहीं किया जा सकता। केवल जांच जारी होना भी संपत्तियों की फ्रीजिंग जारी रखने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। चुनौती दिए गए आदेश को “no legs to stand on”, अर्थात टिकने योग्य आधार से रहित बताते हुए ट्रिब्यूनल ने दोनों अपीलें स्वीकार कर लीं।

यह मामला महाराष्ट्र के मुंबई महानगर क्षेत्र स्थित वसई-विरार में कथित अवैध निर्माण और रिश्वतखोरी से जुड़ी धनशोधन जांच का है। इसी व्यापक मामले में वसई-विरार नगर निगम के पूर्व आयुक्त अनिल पवार भी गिरफ्तार होकर न्यायिक हिरासत में गए थे। बॉम्बे हाई कोर्ट ने 15 अक्टूबर 2025 को उनकी गिरफ्तारी को अवैध घोषित करते हुए रिहाई का आदेश दिया था।

इससे पहले गाइडेंस एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी से जुड़े लगभग ₹8 करोड़ की धनराशि और बैंक खातों की फ्रीजिंग के विवाद में भी अधिवक्ता शिशिर पाण्डेय की पैरवी में राहत मिलने की समाचार रिपोर्ट सामने आई थी। रिपोर्ट के अनुसार, पटियाला हाउस न्यायालय ने 22 नवंबर 2025 को खातों की फ्रीजिंग से राहत दी थी।

दस्तावेजों की गहन समीक्षा और ठोस कानूनी दलीलों पर आधारित इन सफलताओं ने अधिवक्ता शिशिर पाण्डेय के पेशेवर प्रयासों को विशेष महत्व दिया है। मिर्जापुर से जुड़े अधिवक्ता की यह उपलब्धि स्थानीय विधि समुदाय के लिए भी गर्व का विषय है।

हालांकि, नारंग और ENCON को मिली वर्तमान राहत केवल संपत्तियों की फ्रीजिंग और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्रतिधारण से संबंधित है। यह लंबित आपराधिक मामले में दोषमुक्ति का निर्णय नहीं है।

Santosh Giri

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नाम: संतोष देव गिरि

वर्तमान पद: स्वतंत्र पत्रकार

कार्यक्षेत्र: मिर्ज़ापुर / सोनभद्र (विंध्याचल मंडल मुख्यालय), उत्तर प्रदेश

अनुभव: 20 से अधिक वर्ष (दो दशक से भी ज़्यादा)

बीट: जनसरोकार, जल-जंगल-जमीन, वन्यजीव, आदिवासी व वंचित समाज, कृषि, पर्यावरण, स्थानीय प्रशासन, राजनीति व अन्य प्रमुख विषय

परिचय

संतोष देव गिरि पिछले दो दशकों से अधिक समय से मीडिया के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। वर्तमान में वह स्वतंत्र रूप से जनसरोकार के मसलों पर लेखन और रिपोर्टिंग कर रहे हैं। उनका मुख्य ध्यान जल-जंगल-जमीन, वन्यजीव संरक्षण, आदिवासी व वंचित समाज के अधिकारों, कृषि तथा प्रकृति पर निर्भर लोगों की समस्याओं और मुद्दों पर रहता है। वह विंध्याचल मंडल (मिर्ज़ापुर और सोनभद्र) मुख्यालय से इन क्षेत्रों की विभिन्न गतिविधियों को कवर करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव

अपने लंबे पत्रकारिता सफर में वह देश के कई प्रमुख समाचार पत्रों और मीडिया संस्थानों के साथ कार्य कर चुके हैं:

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स्नातक (Graduate)

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