देश की पहली शहरी रोपवे परियोजना अंतिम चरण में ; वाराणसी में जल्द शुरू होगा संचालन
वाराणसी में देश की पहली शहरी सार्वजनिक परिवहन रोपवे परियोजना अंतिम चरण में है। कैंट से गोदौलिया तक 3.7 किमी मार्ग पर ट्रायल रन शुरू हो चुके हैं और 2026 में संचालन की उम्मीद है। यह रोपवे 16 मिनट में यात्रा पूरी करेगा और लगभग 1 लाख यात्रियों को सेवा देने की क्षमता रखता है, जिससे शहर की भीड़भाड़ में बड़ी राहत मिलेगी।

वाराणसी रोपवे परियोजना का निर्माण कार्य अंतिम चरण में
देश की पहली शहरी सार्वजनिक परिवहन रोपवे परियोजना के रूप में विकसित की जा रही महत्वाकांक्षी योजना उत्तर प्रदेश के पवित्र नगर वाराणसी में तेजी से अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है। इस परियोजना के अंतर्गत काशी रोपवे का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है और अब यह प्रणाली ट्रायल तथा फिनिशिंग चरण में प्रवेश कर चुकी है। अधिकारियों के अनुसार, इसका पूर्ण संचालन वर्ष 2026 की शुरुआत तक शुरू किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। यह परियोजना शहरी भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों के लिए एक आधुनिक और वैकल्पिक परिवहन मॉडल के रूप में विकसित की जा रही है, जिसे मेट्रो जैसी क्षमता के साथ वायु मार्ग से संचालित किया जाएगा।
वाराणसी में चल रही इस परियोजना का अधिकांश सिविल निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अंतिम चरण में विशेष रूप से गोदौलिया क्षेत्र स्थित स्टेशन पर फिनिशिंग कार्य जारी है, जिसे परियोजना का सबसे जटिल हिस्सा माना जा रहा है। इसी बीच, पूरे रूट पर फुल-लेंथ ट्रायल रन भी शुरू कर दिए गए हैं, जिससे प्रणाली की तकनीकी और सुरक्षा क्षमता का परीक्षण किया जा रहा है।
यह रोपवे परियोजना वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन क्षेत्र से शुरू होकर गोदौलिया चौक तक विस्तारित है। इसका उद्देश्य शहर के अत्यधिक भीड़भाड़ वाले पुराने क्षेत्रों में आवागमन को सुगम बनाना है। इस मार्ग पर कुल पाँच प्रमुख स्टेशन प्रस्तावित हैं, जिनमें वाराणसी कैंट, काशी विद्यापीठ, रथयात्रा, गिरजाघर और गोदौलिया चौक शामिल हैं। यह पूरा मार्ग लगभग 3.7 किलोमीटर से 4.2 किलोमीटर लंबा बताया जा रहा है, जो विभिन्न चरणों के आधार पर थोड़ा भिन्न हो सकता है।
BIG NEWS from Varanasi -
— News Arena India (@NewsArenaIndia) June 22, 2026
India's first urban public transport ropeway is almost ready for the launch. pic.twitter.com/NtJO9fmpMO
इस रोपवे प्रणाली के माध्यम से पूरी यात्रा का समय लगभग 16 मिनट निर्धारित किया गया है, जो सड़क मार्ग की तुलना में काफी कम है। अनुमानित रूप से यह प्रणाली प्रतिदिन लगभग 90,000 से 1,00,000 यात्रियों को सेवा देने में सक्षम होगी। प्रति घंटे इसकी दिशा-वार क्षमता लगभग 3,000 यात्रियों की होगी, जबकि इसमें लगभग 150 से 220 गोंडोला कैबिन संचालित होने की संभावना है। प्रत्येक कैबिन में लगभग 10 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी।
इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 645 करोड़ रुपये से 815 करोड़ रुपये के बीच बताई जा रही है, जिसमें रखरखाव संबंधी प्रावधान भी शामिल हैं। इसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत विकसित किया जा रहा है और इसका कार्यान्वयन नेशनल हाईवेज लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है, जो भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
यह प्रणाली भारत की पहली ऐसी शहरी रोपवे परियोजना है, जिसे निरंतर शहरी सार्वजनिक परिवहन के रूप में डिजाइन किया गया है। यह बाय-कैबल एरियल ट्रांजिट तकनीक पर आधारित है और लगभग 40 से 50 मीटर की ऊँचाई पर संचालित होगी। इसे हर मौसम में उपयोग योग्य बनाया गया है तथा 24x7 सुरक्षा निगरानी प्रणाली के साथ इमरजेंसी सुविधाओं से भी लैस किया जा रहा है। कम भूमि उपयोग और ऊर्जा दक्षता इस परियोजना की प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं।
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य वाराणसी के घनी आबादी वाले और ऐतिहासिक क्षेत्रों में यातायात दबाव को कम करना है। यह रोपवे काशी विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध घाट और गोदौलिया बाजार जैसे प्रमुख क्षेत्रों तक तेज और सुगम कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। सड़क मार्ग से जहाँ यह यात्रा लगभग 45 से 60 मिनट लेती है, वहीं रोपवे के माध्यम से इसे मात्र 16 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। यह प्रणाली विशेष रूप से संकरी गलियों और विरासत क्षेत्रों के लिए एक व्यवहारिक समाधान के रूप में देखी जा रही है।
वाराणसी में विकसित हो रही यह रोपवे परियोजना भारत में शहरी सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है। यह न केवल देश की पहली शहरी रोपवे प्रणाली है, बल्कि दुनिया के उन चुनिंदा शहर-आधारित रोपवे नेटवर्क में से एक है, जिन्हें दैनिक परिवहन के लिए विकसित किया जा रहा है। यह मॉडल आने वाले समय में अन्य भीड़भाड़ वाले भारतीय शहरों के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत कर सकता है, जहाँ पारंपरिक सड़क परिवहन सीमित क्षमता के कारण चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
वाराणसी में विकसित हो रही यह रोपवे परियोजना केवल एक परिवहन साधन नहीं, बल्कि शहरी गतिशीलता के एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखी जा रही है। जैसे-जैसे यह प्रणाली अपने अंतिम परीक्षण और संचालन चरण की ओर बढ़ रही है, वैसे-वैसे यह स्पष्ट हो रहा है कि यह परियोजना भारत के शहरी परिवहन ढांचे में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का संकेत है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
