69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में लखनऊ में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का भारी प्रदर्शन; सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले शिक्षा मंत्री के आवास का किया घेराव।

UP Assistant Teacher Recruitment Case : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की सड़कें सोमवार को एक ऐसे कारुणिक और विचलित कर देने वाले दृश्य की गवाह बनीं, जिसने मानवता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया। भीषण गर्मी और तपती कोलतार की सड़कों पर 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती के सैकड़ों अभ्यर्थी अपने घुटनों और छाती के बल रेंगते हुए न्याय की गुहार लेकर शिक्षा मंत्री के आवास का घेराव करने पहुंचे। वर्षों से नियुक्ति की बाट जोह रहे इन युवाओं का यह 'मछली नुमा' प्रदर्शन केवल एक विरोध नहीं, बल्कि उस सिस्टम के प्रति उनकी गहरी हताशा का प्रतीक था, जो उन्हें सड़कों पर रेंगने के लिए विवश कर रहा है। जैसे ही अभ्यर्थियों का यह जत्था रेंगता हुआ मंत्री आवास के करीब पहुंचा, भारी पुलिस बल ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, जिससे मौके पर काफी समय तक तनाव और हड़कंप की स्थिति बनी रही।

इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के केंद्र में आरक्षण और न्याय की वह लंबी लड़ाई है जो साल 2018 से लगातार जारी है। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का सीधा आरोप है कि इस भर्ती प्रक्रिया में संवैधानिक आरक्षण के नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। अभ्यर्थियों के अनुसार, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को मिलने वाले 27 प्रतिशत आरक्षण की जगह महज 3.68 प्रतिशत और अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग को 21 प्रतिशत के स्थान पर केवल 16.2 प्रतिशत ही लाभ दिया गया। इस विसंगति को लेकर अभ्यर्थी लंबे समय से आंदोलनरत हैं। सोमवार को प्रदर्शनकारियों का सबसे बड़ा डर 19 मई 2026 को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई को लेकर था। अभ्यर्थियों का कहना है कि यह उनकी सुनवाई की 31वीं तारीख है, लेकिन सरकार की ओर से अदालत में कोई प्रभावी पैरवी नहीं की जा रही है, जिसके कारण मामला लटका हुआ है।

कानूनी पेचीदगियों पर नजर डालें तो 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती का यह विवाद फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय के विचाराधीन है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। इससे पूर्व, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूरी मेरिट लिस्ट को रद्द करते हुए तीन महीने के भीतर नई सूची तैयार करने का सख्त आदेश दिया था, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अंतरिम रोक लगा रखी है। बेसिक शिक्षा विभाग का पक्ष है कि मामला न्यायालय में होने के कारण वे बंधे हुए हैं, जबकि अभ्यर्थियों का तर्क है कि सरकार की ढुलमुल पैरवी ही उनकी नियुक्ति में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।

इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में भी भूचाल ला दिया है। विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे दलितों और पिछड़ों के अधिकारों का सीधा हनन बताया है। पार्टी ने सोशल मीडिया के माध्यम से आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर सुप्रीम कोर्ट में मामले को लटका रही है ताकि नियुक्ति प्रक्रिया को आगे न बढ़ाना पड़े। अभ्यर्थियों का दर्द उनकी आंखों और शरीर पर पड़े घर्षण के निशानों में साफ झलक रहा था, जिनका कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, यह रेंगने की प्रक्रिया उनके संघर्ष का हिस्सा बनी रहेगी। लखनऊ की सड़कों से उठी यह गूंज अब दिल्ली के गलियारों तक पहुंच गई है, जहां कल होने वाली सुनवाई इन हजारों युवाओं के भविष्य का फैसला करेगी।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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