महिला आरक्षण विधेयक पर उत्तर प्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र शुरू
लोकसभा में विधेयक के पारित न हो पाने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने महिला सशक्तिकरण पर चर्चा और अपनी प्रतिबद्धता दोहराने के लिए सदन की विशेष बैठक बुलाई है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण विधेयक और महिला सशक्तिकरण के मुद्दों संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
UP Assembly Special Session 2026 : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आज लोकतंत्र के मंदिर की चौखट पर नारी शक्ति के सम्मान और सियासी दांव-पेच की एक नई इबारत लिखी जा रही है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल द्वारा आहूत उत्तर प्रदेश विधानसभा का वर्ष 2026 का यह दूसरा विशेष सत्र सुबह 11 बजे से शुरू हो गया है। इस सत्र का एकमात्र और सबसे बड़ा केंद्र बिंदु महिला आरक्षण (संशोधन) विधेयक है, जिसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तलवारें खिंच चुकी हैं। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही गलियारों में राजनीतिक हमले तेज हो गए थे, जिससे यह साफ है कि आज की चर्चा केवल विधायी कामकाज तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह आने वाले चुनावों के लिए एक बड़े वैचारिक युद्ध का मैदान बनेगी।
इस विशेष सत्र के आयोजन के पीछे का मुख्य उद्देश्य हाल ही में लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक के पारित न हो पाने के बाद उपजी परिस्थितियों पर गहन मंथन करना है। गौरतलब है कि संसद के निचले सदन में इस ऐतिहासिक विधेयक को संवैधानिक रूप से अनिवार्य दो-तिहाई बहुमत प्राप्त नहीं हो सका था, जिसके कारण यह गिर गया। अंतिम मतदान के दौरान विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 मत पड़े थे, जो इसे कानून बनाने के लिए पर्याप्त नहीं थे। अब राज्य सरकार इस विशेष सत्र के माध्यम से महिला सशक्तिकरण की दिशा में अपनी अडिग प्रतिबद्धता को दोहराने और विधेयक के विफल होने के परिणामों पर चर्चा करने की तैयारी में है।
सियासी मोर्चे पर भारतीय जनता पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत पूरे विपक्ष की घेराबंदी शुरू कर दी है। सत्ता पक्ष का स्पष्ट आरोप है कि विपक्षी दलों ने महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने और विधायिकाओं में उनका प्रतिनिधित्व बढ़ाने वाले इस क्रांतिकारी कदम में जानबूझकर बाधा डाली है। भाजपा ने विपक्ष को खुले तौर पर 'महिला-विरोधी' करार दिया है। दूसरी ओर, विपक्ष ने भी कड़ा पलटवार करते हुए योगी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का तर्क है कि सरकार महिला सशक्तिकरण के नाम पर केवल चुनावी लाभ के लिए इस संवेदनशील मुद्दे का राजनीतिकरण कर रही है और जनता का ध्यान मूल समस्याओं से भटकाना चाहती है।
VIDEO | Lucknow: Speaking in the state Assembly during special one-day session to discuss Women's Reservation, Uttar Pradesh CM Yogi Adityanath (@myogiadityanath), says, "In 2023, the central government passed the landmark Nari Shakti Vandan Act. From 2014 to 2023, under the… pic.twitter.com/kqSC9x0jnV
— Press Trust of India (@PTI_News) April 30, 2026
विधेयक के तकनीकी और विधिक पहलुओं की बात करें तो इसका उद्देश्य संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के साथ-साथ सदन की सदस्य संख्या में वृद्धि करने के प्रावधानों को लागू करना था। हालांकि, संख्याबल के अभाव में यह दिल्ली की दहलीज पार नहीं कर सका, लेकिन अब लखनऊ से उठी इसकी गूंज पूरे देश में संदेश देने का प्रयास करेगी। इस सत्र का अंत केवल चर्चा से नहीं बल्कि महिला सशक्तिकरण की नई दिशा तय करने वाले एक कड़े रुख के साथ होने की उम्मीद है। उत्तर प्रदेश, जो देश की सबसे बड़ी विधानसभा का प्रतिनिधित्व करता है, वहां से निकलने वाला संदेश यह तय करेगा कि आने वाले समय में देश की राजनीति में 'आधी आबादी' का हक किस करवट बैठेगा।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
