सुरेश खन्ना ई-रिक्शा से पहुंचे विधानसभा; यूपी के वित्त मंत्री की अनोखी पहल
उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री ने सरकारी वाहन छोड़ ई-रिक्शा से यात्रा की ताकि जनता के बीच पर्यावरण संरक्षण और ईंधन की बचत को लेकर जागरूकता फैलाई जा सके।

उत्तर प्रदेश सरकार के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ईंधन संरक्षण का संदेश देने के लिए लखनऊ में ई-रिक्शा पर सवार होकर विधानसभा पहुंचे।
Suresh Khanna e rickshaw Assembly : उत्तर प्रदेश की सियासत और प्रशासनिक गलियारों में उस समय हर कोई हैरान रह गया, जब राज्य के कद्दावर नेता और वित्त मंत्री सुरेश खन्ना अपनी चमचमाती सरकारी गाड़ियों के काफिले को छोड़कर अचानक एक साधारण ई-रिक्शा पर सवार होकर विधानसभा पहुंचे। उनके साथ उनके विभाग के कर्मचारी भी इस सफर में शामिल थे। देश और दुनिया में बढ़ते ईंधन संकट और पर्यावरण असंतुलन के बीच, यूपी के वित्त मंत्री का यह कदम केवल एक राजनीतिक सुर्ख़ियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने और ईंधन संरक्षण के प्रति जनता को जागरूक करने का एक बेहद गहरा और गंभीर संदेश है। विधानसभा के मुख्य द्वार पर जब सुरक्षाकर्मियों और मीडियाकर्मियों ने वित्त मंत्री को ई-रिक्शा से उतरते देखा, तो वहां मौजूद हर शख्स इस अभूतपूर्व दृश्य को देखता रह गया।
इस अनोखी पहल के बाद पत्रकारों से बेहद संजीदगी के साथ बातचीत करते हुए वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शीर्ष नेतृत्व की ओर से जो अपेक्षाएं की गई हैं, उन्हें अमली जामा पहनाना देश के प्रत्येक नागरिक की नैतिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारी है। उन्होंने वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम पदार्थों की लगातार बढ़ती कीमतों और सीमित संसाधनों की ओर इशारा करते हुए एक बड़ा संकल्प लिया। सुरेश खन्ना ने घोषणा की कि वे अब से सप्ताह में कम से कम एक दिन पूरी तरह इलेक्ट्रिक व्हीकल यानी ई-वाहन का ही इस्तेमाल करेंगे, जिससे वे अपने कार्यालय जाएंगे और उसी से वापस घर लौटेंगे। उन्होंने समाज के हर वर्ग से अपील की कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की भावनाओं का सम्मान करते हुए आम जनता को भी सप्ताह में कम से कम एक दिन पेट्रोल और डीजल बचाने का पुरजोर प्रयास करना चाहिए।
यह पहली बार नहीं है जब उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री ने पर्यावरण और राष्ट्रहित में अपनी जीवनशैली को इस तरह जनता के सामने पेश किया हो। इससे पहले भी वे लगातार ऐसे प्रयोग करते रहे हैं। बीते दिनों 21 मई को सुरेश खन्ना अचानक एक मोटरसाइकिल पर सवार होकर विधानसभा पहुंचे थे, जिसने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक हलकों में खूब चर्चा बटोरी थी। उस वक्त भी उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपजे गंभीर भू-राजनीतिक हालातों का हवाला देते हुए कहा था कि वैश्विक परिस्थितियों के कारण आज नेताओं और नीति निर्माताओं से यह अपेक्षा की जाती है कि वे पारंपरिक तेल पर अपनी निर्भरता को कम करें। इसके भी पहले, 14 मई को उन्होंने एक कदम और आगे बढ़ाते हुए साइकिल चलाकर अपने दफ्तर की दूरी तय की थी और स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का एक दोहरा संदेश दिया था।
अपनी इन लगातार कोशिशों के पीछे छिपे आर्थिक और आधिकारिक पहलुओं को समझाते हुए वित्त मंत्री ने देश की अर्थव्यवस्था से जुड़े कुछ बेहद महत्वपूर्ण और चौंकाने वाले आंकड़े भी साझा किए। उन्होंने बताया कि भारत अपनी कुल ईंधन आवश्यकताओं का लगभग 85 से 86 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करके पूरा करता है। इस भारी-भरकम आयात के कारण देश की गाढ़ी कमाई और विदेशी मुद्रा भंडार का एक बहुत बड़ा हिस्सा बाहर चला जाता है, जो किसी भी विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है। मौजूदा वैश्विक तनाव, युद्ध की स्थितियां और अंतरराष्ट्रीय दबावों के इस दौर में पूरी दुनिया एक बड़े आर्थिक संकट की तरफ बढ़ रही है। ऐसे में वित्त मंत्री का मानना है कि वैश्विक महाशक्तियों को अपने तमाम मसले और विवाद आपसी बातचीत से सुलझाने चाहिए ताकि पूरी मानवता संकट में न पड़े।
यूपी के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना की इस अनूठी और दूरदर्शी पहल ने देश के प्रशासनिक महकमे में एक नई बहस छेड़ दी है। एक कद्दावर मंत्री द्वारा ज़मीनी स्तर पर आकर ई-रिक्शा, साइकिल और मोटरसाइकिल का उपयोग करना यह साबित करता है कि नीतियों का क्रियान्वयन केवल फाइलों और भाषणों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसकी शुरुआत खुद नेतृत्व से होनी चाहिए। उनकी यह मुहिम न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के नागरिकों को अपनी राष्ट्रीय जिम्मेदारियों का अहसास कराती है। आने वाले समय में यदि इस पहल को व्यापक जनसमर्थन मिलता है, तो यह निश्चित रूप से भारत के ईंधन आयात बिल को कम करने और पर्यावरण को स्वच्छ बनाने की दिशा में एक युगांतरकारी कदम साबित होगा।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
