फर्जी ईमेल नेटवर्क का भंडाफोड़, यूपी एटीएस ने कानपुर से पकड़ा आरोपी
दिल्ली-एनसीआर के स्कूलों और मुंबई मेयर कार्यालय को धमकी देने वाले फर्जी ईमेल नेटवर्क का खुलासा, आरोपी 5 लाख आईडी बेचकर क्रिप्टो में लेता था भुगतान।

कानपुर से गिरफ्तार आरोपी, जिसने फर्जी ईमेल नेटवर्क के जरिए बम धमकियां भेजने का काम किया था।
लखनऊ। दिल्ली-एनसीआर, नोएडा और गुरुग्राम के स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकियां देने के लिए इस्तेमाल किए गए फर्जी ईमेल नेटवर्क का उत्तर प्रदेश एटीएस (ATS) ने पर्दाफाश किया है। जांच के दौरान इस नेटवर्क के तार कानपुर तक पहुंचे, जहां से एटीएस ने 24 वर्षीय अंकित शंखवार को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर फर्जी पहचान और प्रॉक्सी नेटवर्क की मदद से करीब 5 लाख ईमेल आईडी तैयार कर उन्हें पाकिस्तान, बांग्लादेश सहित कई देशों के खरीदारों को बेचने का आरोप है। इन ईमेल आईडी के बदले वह क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से भुगतान प्राप्त करता था।
एटीएस की जांच में सामने आया है कि आरोपी के लैपटॉप से बरामद डेटा में दिल्ली-एनसीआर और नोएडा के स्कूलों को भेजी गई बम धमकियों में इस्तेमाल ईमेल आईडी भी शामिल हैं। इसके अलावा 23 अक्टूबर 2026 को मुंबई मेयर कार्यालय को बम से उड़ाने की धमकी देने के लिए इस्तेमाल की गई ईमेल आईडी का सुराग भी इसी लैपटॉप से मिला है।
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी के लैपटॉप में कई एक्सेल फाइलें मिली हैं, जिनमें करीब 5 लाख फर्जी ईमेल आईडी के साथ उनके पासवर्ड, रिकवरी मेल और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) से संबंधित विवरण दर्ज हैं। इन डिजिटल रिकॉर्ड्स से धमकी भरे ईमेल के पीछे सक्रिय नेटवर्क की पड़ताल में महत्वपूर्ण जानकारी मिली है।
पूछताछ में अंकित शंखवार ने बताया कि वह वर्ष 2021 से फर्जी ईमेल आईडी बनाने का काम कर रहा था। विदेशी ग्राहकों तक पहुंचने के लिए वह फेसबुक के 'Buy & Sell' ग्रुप्स और व्हाट्सऐप का इस्तेमाल करता था। उसका मुख्य संपर्क बांग्लादेशी नागरिक अलामीन इस्लाम से था। आरोपी फर्जी ईमेल आईडी उपलब्ध कराने के बदले बिनांस क्रिप्टो वॉलेट के माध्यम से टेथर (USDT) में भुगतान लेता था। एटीएस के मुताबिक, वह अब तक करीब 6,000 टेथर प्राप्त कर चुका है।
एटीएस ने आरोपी के कब्जे से एक स्मार्टफोन और एक लैपटॉप बरामद किया है। जांच में यह भी सामने आया है कि वह व्हाट्सऐप के जरिए पाकिस्तान, बांग्लादेश, मिस्र, तुर्की और अमेरिका जैसे देशों के मोबाइल नंबरों के संपर्क में था। अपनी पहचान छिपाने के लिए आरोपी प्रॉक्सी नेटवर्क और वाई-फाई का इस्तेमाल करता था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए यूपी एटीएस अब इस पूरे विदेशी नेटवर्क की गहन जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि तैयार की गई फर्जी ईमेल आईडी का इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों या किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने के लिए तो नहीं किया गया। इस मामले में लखनऊ स्थित पुलिस थाने में संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपी को अदालत में पेश करने और पुलिस कस्टडी रिमांड हासिल करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। अब जांच का केंद्र इस नेटवर्क से जुड़े विदेशी संपर्कों और धमकी भरे ईमेल के पीछे की संभावित साजिश का पता लगाना है।

Om Prakash Pal
नाम: ओम प्रकाश पाल
वर्तमान पद: स्वतंत्र पत्रकार, लेखक एवं स्तंभकार
कार्यक्षेत्र: नेशनल ब्यूरो (राष्ट्रीय स्तर)
बीट (मुख्य विषय): राजनीति, संसद, केंद्रीय मंत्रालय, कृषि, साहित्य, खेल एवं प्रशासन (बिजनेस को छोड़कर सभी विषयों पर कार्य)
पत्रकारिता अनुभव: लगभग 39 वर्ष
परिचय एवं अनुभव
ओम प्रकाश पाल पिछले 39 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर नेशनल ब्यूरो में विशेष संवाददाता के रूप में लगभग 20 वर्षों तक संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) की रिपोर्टिंग की है।
एक मान्यता प्राप्त पत्रकार के रूप में उन्होंने केंद्रीय गृह, रक्षा, रेलवे, सड़क परिवहन, श्रम एवं रोजगार, जलशक्ति और कृषि जैसे प्रमुख केंद्रीय मंत्रालयों को कवर किया है।
विभिन्न समाचार पत्रों में योगदान:
- अमर उजाला एवं दैनिक जागरण: पत्रकारिता के शुरुआती वर्षों का अनुभव।
- शाह टाइम्स: न्यूज़ एडिटर (News Editor) के पद पर सेवाएं।
- हरिभूमि (दिल्ली): वरिष्ठ संवाददाता के रूप में कार्य।
राजनीति विज्ञान और कृषि विषयों के जानकार होने के साथ-साथ उन्होंने साहित्य और खेल के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्य किया है। वर्तमान में वह एक स्वतंत्र पत्रकार, लेखक और स्तंभकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता
- स्नातक (Graduate)
- B.Ed (बैचलर ऑफ एजुकेशन)
- पत्रकारिता में डिप्लोमा (Diploma in Journalism)
- साहित्य रत्न
- कृषि विशारद
