लखनऊ के चारबाग स्टेशन पर प्लेटफॉर्म नंबर 5 का टिन शेड गिरने से टीटीई समेत 3 लोग घायल। रेलवे ने साइट इंजीनियर को किया सस्पेंड, जांच के आदेश।

Charbagh Platform 5 accident UP storm : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सबसे व्यस्त और ऐतिहासिक चारबाग रेलवे स्टेशन पर एक बड़ा हादसा होने से हड़कंप मच गया। स्टेशन परिसर में अचानक एक विशालकाय टिन शेड भरभराकर नीचे गिर गया, जिसकी चपेट में आने से एक ट्रैवलिंग टिकट एग्जामिनर (टीटीई) समेत तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। राज्य में पिछले कुछ समय से चल रहे भारी तूफान और खराब मौसम को इस हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है, लेकिन इसके साथ ही रेलवे प्रशासन की ओर से रख-रखाव में बरती गई घोर लापरवाही की आशंका ने भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस अप्रत्याशित घटना के बाद स्टेशन पर अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया और यात्रियों में डर की लहर दौड़ गई।

यह हादसा उस वक्त हुआ जब स्टेशन पर यात्रियों की भारी चहल-पहल थी। चश्मदीदों के मुताबिक, अचानक तेज हवाओं के साथ आए तूफान के कारण जर्जर हो चुका टिन शेड का एक बड़ा हिस्सा अपनी जगह से उखड़ गया और सीधे नीचे खड़े लोगों पर जा गिरा। घटना की भयावहता को देखते हुए रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के जवानों ने बिना वक्त गंवाए मुस्तैदी दिखाई और मलबे में दबे घायलों को तुरंत रेस्क्यू किया। आरपीएफ और स्थानीय प्रशासन की मदद से तीनों घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है और वर्तमान में सभी की हालत स्थिर बताई जा रही है। हादसे के बाद मलबे को हटाने और ट्रैक को साफ करने के लिए कुछ समय के लिए ट्रेनों के परिचालन को भी रोकना पड़ा, जिससे यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

हादसे की गंभीरता को देखते हुए उत्तर रेलवे (नॉर्दर्न रेलवे) के उच्च अधिकारियों ने त्वरित और सख्त रुख अख्तियार किया है। शुरुआती जांच में प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर उत्तर रेलवे ने संबंधित साइट इंजीनियर को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। इसके साथ ही, इस पूरे घटनाक्रम की तह तक जाने के लिए एक उच्च स्तरीय आंतरिक जांच समिति का गठन कर दिया गया है। यह समिति इस बात की गहनता से जांच करेगी कि क्या शेड के रख-रखाव में कोई तकनीकी चूक हुई थी या फिर अधिकारियों द्वारा समय पर सुरक्षा ऑडिट नहीं किया गया था। रेलवे के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने वाले अन्य कर्मचारियों के खिलाफ भी कड़ी कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।


यह घटना केवल एक स्थानीय हादसा नहीं है, बल्कि इसने देश के सबसे पुराने और ऐतिहासिक रेलवे स्टेशनों के बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) की जर्जर स्थिति को लेकर एक बार फिर से गंभीर बहस छेड़ दी है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में हुए पुल ढहने के हादसे की तरह ही, चारबाग स्टेशन की यह घटना भी सरकारी विभागों में इंफ्रास्ट्रक्चर की देखरेख और उनकी गुणवत्ता में आ रही लगातार कमियों के पैटर्न को उजागर करती है।

इस घटना का समापन इस कड़वे सच को रेखांकित करता है कि जब तक देश के व्यस्ततम सार्वजनिक स्थलों के बुनियादी ढांचे का समयबद्ध और कड़ा सुरक्षा ऑडिट नहीं किया जाएगा, तब तक मासूम यात्रियों की जान ऐसे ही जोखिम में बनी रहेगी। चारबाग जैसे अति-संवेदनशील और वीआईपी रेलवे स्टेशन पर हुआ यह टिन शेड का गिरना रेलवे प्रशासन के लिए एक अंतिम चेतावनी है कि आधुनिकीकरण के बड़े दावों के बीच जमीनी स्तर पर यात्रियों की बुनियादी सुरक्षा से कोई समझौता न किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसे जानलेवा हादसों की पुनरावृत्ति को पूरी तरह रोका जा सके।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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