भारत का 100वां रामसर स्थल बना यूपी का सुरहाताल; पीएम मोदी ने जताई खुशी
उत्तर प्रदेश के बलिया में स्थित जय प्रकाश नारायण पक्षी अभ्यारण्य को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलने से जैव विविधता के संरक्षण और स्थानीय पर्यावरण को मजबूती मिलेगी।

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में स्थित जय प्रकाश नारायण पक्षी अभ्यारण्य (सुरहाताल) को देश का 100वां रामसर स्थल घोषित किए जाने के बाद वहां की समृद्ध आर्द्रभूमि और जैव विविधता को दर्शाता एक दृश्य।
India 100th Ramsar site Surha Taal : भारत ने वैश्विक पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन के मोर्चे पर एक ऐसी ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है, जिसने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का मस्तक ऊंचा कर दिया है। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में स्थित प्रसिद्ध जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (सुरहाताल) को आधिकारिक तौर पर भारत का 100वां रामसर स्थल घोषित कर दिया गया है। रामसर स्थलों की सूची में इस 'महाशतक' को छूते ही पूरे देश में गर्व की लहर दौड़ गई है। स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस गौरवशाली उपलब्धि पर बेहद खुशी जाहिर करते हुए इसे पर्यावरण और आर्द्रभूमियों (वेटलैंड्स) के संरक्षण के प्रति भारत के अटूट संकल्प का एक जीवंत प्रमाण बताया है। विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर सामने आई इस बड़ी कामयाबी ने न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के पारिस्थितिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है।
इस ऐतिहासिक घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर देशवासियों के साथ अपनी प्रसन्नता साझा की। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि यह महज एक संख्या नहीं, बल्कि प्रकृति को सहेजने के भारत के सदियों पुराने दर्शन की जीत है। उन्होंने बलिया के सुरहाताल (जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार) की अनूठी भौगोलिक और जैविक महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह खूबसूरत आर्द्रभूमि पक्षी जैव विविधता के मामले में बेहद समृद्ध है। यह जलाशय न केवल अनगिनत स्थानीय पक्षी प्रजातियों का स्थायी बसेरा है, बल्कि सुदूर देशों से आने वाले हजारों मेहमान यानी प्रवासी पक्षियों का भी मुख्य पसंदीदा आवास स्थल है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि इस स्थल को अंतरराष्ट्रीय महत्व मिलने से यहां के पूरे इकोसिस्टम को एक नया जीवन और वैश्विक पहचान मिलेगी।
सुरहाताल का यह सफर भारत की पर्यावरण केंद्रित नीतियों के क्रियान्वयन की एक अद्भुत मिसाल है। सरकारी स्तर पर इसे रामसर साइट का दर्जा मिलना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि देश में आर्द्रभूमियों के संरक्षण और पुनर्जीवन के प्रयासों को कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान जमीनी स्तर पर विज्ञान, अत्याधुनिक नवाचार, सरकारी नीतियों और सबसे महत्वपूर्ण—स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी के समन्वय से पर्यावरण संरक्षण को एक जन-आंदोलन का रूप दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरहाताल को मिला यह अंतरराष्ट्रीय तमगा क्षेत्र में अवैध शिकार पर पूरी तरह रोक लगाने, जल की गुणवत्ता सुधारने और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरित, समृद्ध और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने में मील का पत्थर साबित होगा।
A century as far as Ramsar sites are concerned!Glad that the Jai Prakash Narayan Bird Sanctuary (Surha Tal) in Ballia, Uttar Pradesh has been designated as India’s 100th Ramsar site. This wetland is rich in avifaunal biodiversity, attracting several migratory and resident… pic.twitter.com/HENtPJoRnt— Narendra Modi (@narendramodi) June 5, 2026
इस महान गौरव के कानूनी और वैश्विक संदर्भों पर गौर करें तो इसकी जड़ें वर्ष 1972 के 'यूनाइटेड नेशंस कॉन्फ्रेंस ऑन द ह्यूमन एनवायरनमेंट' से जुड़ी हुई हैं। इसी ऐतिहासिक सम्मेलन के बाद संयुक्त राष्ट्र ने हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी, जिसका पहला आधिकारिक आयोजन साल 1973 में हुआ था। आज संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) के नेतृत्व में वैश्विक स्तर पर बढ़ते जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण जैसी गंभीर चुनौतियों से निपटने के लिए यह दिवस दुनिया को सतत जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा देता है। भारत ने इस वैश्विक अभियान के तहत "एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य" के सनातन सिद्धांत और प्रधानमंत्री के 'मिशन लाइफ' (LiFE) की मूल भावना को अपना वैचारिक आधार बनाया है।
सुरहाताल का भारत के 100वें रामसर स्थल के रूप में चुना जाना इस बात की पुरजोर तस्दीक करता है कि विकास की अंधी दौड़ के बीच भी भारत अपनी प्राकृतिक विरासतों को सहेजने के लिए पूरी तरह कटिबद्ध है। वैश्विक मंच पर रामसर साइट के रूप में सुरहाताल की यह गूंज जैव विविधता के संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने के भारत के प्रयासों को नए पंख देगी। यह ऐतिहासिक उपलब्धि पूरी दुनिया को यह कड़ा संदेश देती है कि प्रकृति का संरक्षण ही मानव अस्तित्व की रक्षा का एकमात्र मार्ग है और भारत इस मार्ग पर पूरी दृढ़ता तथा जिम्मेदारी के साथ दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार खड़ा है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
