sugarcane control order 2026 भाकियू अराजनैतिक ने हापुड़ में दिया धरना
गन्ना (नियंत्रण) आदेश 2026 के नए ड्राफ्ट में क्रशर परिभाषा, शक्कर वर्गीकरण और 24 घंटे में भुगतान सुनिश्चित करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा गया।

तस्वीर में जिला मुख्यालय परिसर में जमीन पर बैठकर धरना प्रदर्शन करते किसान।
हापुड़ (उत्तर प्रदेश) में भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने जिला मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित ‘गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 2026’ के ड्राफ्ट पर आपत्ति जताई। संगठन ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर ड्राफ्ट में संशोधन और किसानों व खांडसारी उद्योग के हित में महत्वपूर्ण सुझावों को शामिल करने की मांग की।
भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) का कहना है कि प्रस्तावित ‘गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 2026’ में किए जा रहे कुछ संशोधन गन्ना किसानों और खांडसारी (लघु उद्योग) दोनों के हितों के खिलाफ हैं। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों के गन्ना किसानों, गुड़ एवं खांडसारी निर्माताओं के साथ हाल ही में हुई बैठक के बाद संगठन ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए सरकार को विस्तृत मांग पत्र और महत्वपूर्ण सुझाव भेजे हैं।
संगठन ने धारा 2(ए) में क्रशर की परिभाषा में सुधार की मांग की है। संगठन के अनुसार नए नियम में सभी क्रशर और कोल्हुओं को एक ही श्रेणी में लाने का प्रयास किया जा रहा है। वर्तमान में कोल्हुओं में भी बड़े रोलर इस्तेमाल हो रहे हैं। ऐसे में इकाई का आकार रोलर के बजाय पेराई क्षमता (Crushing Capacity) के आधार पर तय किया जाना चाहिए और सभी इकाइयों को एक ही श्रेणी में रखा जाना चाहिए।
धारा 2(एफ) में शक्कर के वर्गीकरण पर भी संगठन ने आपत्ति दर्ज कराई है। संगठन का कहना है कि ड्राफ्ट में शक्कर को राब और खांडसारी चीनी के साथ जोड़ा गया है, जबकि वास्तव में शक्कर पिसा हुआ गुड़ ही है। इसलिए इसे केवल गुड़ की श्रेणी में रखा जाना चाहिए।
धारा 3 के तहत चीनी मिलों द्वारा गन्ने के उचित लाभकारी मूल्य (FRP/SAP) और आय-आधारित निर्धारण की मांग की गई है। संगठन के अनुसार वर्तमान में गन्ने की कीमत का निर्धारण केवल चीनी की रिकवरी के आधार पर होता है, जो अनुचित है। चीनी मिलें अब गन्ने के सह-उत्पादों (By-products) से भी भारी मुनाफा कमा रही हैं।
संगठन ने मांग की है कि गन्ने के मूल्य की गणना करते समय चीनी के साथ-साथ एथेनॉल, मोलासेस (शीरा), बैगास (खोई), प्रेस मड और बिजली उत्पादन से होने वाली आय को भी अनिवार्य रूप से जोड़ा जाए। इसके अलावा लागत में जमीन का किराया, पूंजी पर ब्याज व रिस्क और मैनेजमेंट को भी शामिल किया जाए।
संगठन ने धारा 3(1)C का भी विरोध किया है। संगठन की मांग है कि इस धारा में उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर चीनी उपलब्धता के प्रावधान को समाप्त किया जाए, क्योंकि संगठन के अनुसार इस प्रावधान की आड़ में किसानों को उनके उत्पाद का सही मूल्य देने से रोका जाता है।
गन्ना भुगतान को लेकर संगठन ने धारा 3 की उपधारा (3A) के तहत 14 दिनों में भुगतान के नियम पर भी कड़ा रुख अपनाया है। संगठन का कहना है कि कानून में 14 दिनों के भीतर भुगतान का नियम पहले से है, लेकिन बजाज हिंदुस्तान, मोदी शुगर, सिंभावली शुगर, राणा शुगर जैसे बड़े चीनी मिल समूह इसका उल्लंघन कर रहे हैं। संगठन के अनुसार उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में किसानों का हजारों करोड़ रुपये बकाया है। संगठन का आरोप है कि मिलें किसानों का पैसा रोककर उसका उपयोग अपने अन्य व्यवसायों में कर रही हैं।
संगठन ने 14 दिनों के बाद ब्याज देने के प्रावधान को भी जमीनी स्तर पर व्यर्थ बताया और ब्याज माफी का विरोध किया है। संगठन के अनुसार राज्य सरकारें अपने कानूनों के अनुसार ब्याज माफ कर देती हैं। किसान 90 प्रतिशत पूंजी सिंचाई, उर्वरक, कीटनाशक और मजदूरी पर पहले ही खर्च कर चुका होता है, इसलिए उसे तुरंत भुगतान की आवश्यकता होती है।
भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने अपनी प्रमुख मांगों में किसानों के गन्ने का भुगतान मिल में डिलीवरी के 24 घंटे के अंदर सीधे उनके खातों में किए जाने की मांग रखी है। साथ ही चीनी मिलों का एक अनिवार्य एस्क्रो खाता (Escrow Account) खुलवाने की मांग की गई है, ताकि चीनी और अन्य सह-उत्पादों की बिक्री से आने वाला पैसा सबसे पहले किसानों के भुगतान के लिए सुरक्षित हो सके।
जिला मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन और जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन के जरिए संगठन ने ‘गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 2026’ के प्रस्तावित प्रावधानों में किसानों और खांडसारी निर्माताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए संशोधन की मांग सरकार के सामने रखी है।

Sunil Giri
नाम: सुनील गिरि
वर्तमान पद: जिला संवाददाता
कार्यक्षेत्र: हापुड़ (उत्तर प्रदेश)
बीट (मुख्य विषय): क्राइम, राजनीति एवं जिला स्तर की सभी बीट
विशेषज्ञता: राजनीतिक विश्लेषण, अपराध संबंधी कवरेज और जिला स्तरीय रिपोर्टिंग
परिचय
सुनील गिरि उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह हापुड़ से जिला संवाददाता के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सुनील गिरि मुख्य रूप से राजनीति और क्राइम (अपराध) से जुड़ी खबरों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। राजनीतिक विषयों पर सटीक विश्लेषण करने के साथ-साथ वह जिले की हर छोटी-बड़ी गतिविधि और जनसरोकार के सभी मुद्दों को नियमित रूप से कवर करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव
सुनील गिरि को टीवी, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में 2002 से (20 से अधिक वर्षों का) लंबा और व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह निम्नलिखित प्रमुख मीडिया संस्थानों व न्यूज़ चैनलों के साथ जुड़कर अपनी सेवाएं दे रहे हैं:
- पंजाब केसरी टीवी
- इंडिया डेली 24×7 न्यूज़ चैनल
- MH1 न्यूज़ चैनल
- रॉयल न्यूज़ (वेबसाइट)
- इंडिया पब्लिक खबर (वेबसाइट)
शैक्षणिक योग्यता
उन्होंने अपनी शिक्षा 12वीं (12th Pass) तक पूरी की है। दो दशकों से अधिक समय से हापुड़ जिले में लगातार सक्रिय रहने के कारण क्षेत्र की सामाजिक, प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव बहुत गहरा है।
