बुलंदशहर के मोरी गेट मोहल्ले का गुरुवार का सुबह का माहौल दर्द और श्रद्धा से भरा हुआ था। जहां कभी देश की सुरक्षा में डटे रहने वाले एसपीजी कमांडो संजीव तोमर की बहादुरी की चर्चा होती थी, वहीं अब उनकी पार्थिव देह के साथ उठती चीखें और नम होती आंखें पूरे इलाके में गम का सन्नाटा फैलाए हुए थीं। मात्र 32 वर्ष की उम्र में बीमारी के कारण उनका निधन पूरे जिले ही नहीं, बल्कि सुरक्षा बलों में भी गहरी शोक लहर छोड़ गया।

संजीव तोमर, पुत्र चंद्रपाल सिंह, वर्ष 2015 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। उनकी लगन और कर्तव्यनिष्ठा के चलते वर्ष 2021 में उन्हें प्रधानमंत्री की सुरक्षा में कार्यरत विशेष सुरक्षा समूह (SPG) में तैनाती मिली। वर्तमान में वे पीएमओ में प्रधानमंत्री की सुरक्षा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे थे। कुछ समय पहले उन्हें स्पाइनल कार्ड से संबंधित गंभीर बीमारी ने जकड़ लिया, जिसके चलते 27 सितंबर को उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सा टीम के प्रयासों के बावजूद उनकी हालत में कोई सुधार नहीं आया और बुधवार को उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

गुरुवार सुबह जब उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक घर पहुंचा, तो परिवार के विलाप ने वातावरण को दुख से भर दिया। इसके बाद हजारों लोगों की मौजूदगी में उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। नगर के मुख्य बाजार से गुजरती शवयात्रा पर लोगों ने फूल बरसाकर अपने वीर जवान को अंतिम नमन किया। “भारत माता की जय” के जयघोष के बीच यात्रा मस्तराम श्मशान घाट, अनूपशहर पहुंची, जहां दिल्ली से आए 172 सीआरपीएफ कंपनी के इंस्पेक्टर आकाश शर्मा के नेतृत्व में जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया।

स्थानीय प्रशासन, सेना के पूर्व सैनिक तथा जनप्रतिनिधियों ने भी श्रद्धासुमन अर्पित कर अपने वीर कमांडो को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। संजीव तोमर को उनके छोटे भाई जतिन ने मुखाग्नि दी। गरहरा गांव के पूर्व प्रधान सतेंद्र चौहान ने बताया कि संजीव का मूल निवास गरहरा था, बाद में उनके पिता ने मोरी गेट में घर बनाकर बसावट की। वर्ष 2018 में संजीव का विवाह प्रीति के साथ हुआ था। उनके चार वर्ष के जुड़वा बच्चे—बेटी नव्या और बेटा देवांश—अब उनके इस असमय चले जाने से अनाथत्व की कगार पर खड़े हैं।

संजीव तोमर की असमय मृत्यु देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक गहरी क्षति है। एक साहसी, अनुशासित और समर्पित अधिकारी के रूप में उनकी पहचान हमेशा सुरक्षा बलों के इतिहास में दर्ज रहेगी। उनकी अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रमाण था कि देश अपने सच्चे रक्षक को कभी भूल नहीं सकता।

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Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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