Ram Mandir Dhwajarohan २०२५ : अयोध्या ने मंगलवार की सुबह वह क्षण देखा, जिसकी प्रतीक्षा करोड़ों रामभक्तों ने सदियों से की थी। श्री राम जन्मभूमि मंदिर के भव्य शिखर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पवित्र केसरिया धर्म ध्वज फहराकर इतिहास के नए अध्याय का उद्घाटन कर दिया। पूरा धाम जयघोष से गूंज उठा और यह दिन राष्ट्र की आध्यात्मिक चेतना में अविस्मरणीय रूप से दर्ज हो गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे “नए युग का शुभारंभ” बताया।

अयोध्या में इस भव्य आयोजन को देखते हुए सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर विशेष इकाइयों तक की तैनाती की गई। पुलिस, स्थानीय इंटेलिजेंस यूनिट और SSB ने महराजगंज में भारत–नेपाल सीमा तक चौकसी बढ़ा दी, ताकि किसी भी अनहोनी की आशंका को पूरी तरह समाप्त किया जा सके। सुरक्षा एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश थे कि सीमा पार करने वाले हर व्यक्ति की पहचान सत्यापित की जाए।

प्रधानमंत्री मोदी ने सुबह मंदिर परिसर में सप्त मंदिर, माता अन्नपूर्णा मंदिर और राम दरबार में दर्शन-पूजन किया। इसके बाद वह गर्भगृह पहुँचे, जहाँ उन्होंने भगवान रामलला के समक्ष पूजा-अर्चना की। दोपहर लगभग 12 बजे वह क्षण आया, जब प्रधानमंत्री ने मंदिर के उत्तर भारतीय नागर वास्तुशैली में निर्मित शिखर पर धर्म ध्वज आरोहित किया। 10 फीट ऊंचा और 20 फीट लंबा यह त्रिकोणीय भगवा ध्वज भगवान श्रीराम की वीरता, तेज और सनातन मूल्यों का प्रतीक है। इस पर अंकित दीप्तिमान सूर्य, ‘ॐ’ चिह्न और कोविदार वृक्ष रामराज्य के आदर्शों और सांस्कृतिक निरंतरता का संदेश देते हैं।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर अपने संदेश में कहा कि प्रभु श्रीराम भारतवर्ष की आत्मा और गौरव के केंद्र हैं, और उनके जीवन आदर्शों का ध्वज फहराना उनके लिए परम सौभाग्य का विषय है। यह तिथि विवाह पंचमी की शुभ घड़ी और गुरु तेग बहादुर जी के शहादत दिवस से भी जुड़ी होने के कारण और अधिक पवित्र मानी गई।

आयोजन के दौरान अयोध्या में उत्साह चरम पर था। अयोध्या के मेयर ने इसे हर नागरिक के लिए गौरवमय क्षण बताया, जबकि साधु-संतों ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की दूरदृष्टि की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज जो भव्य अयोध्या दुनिया देख रही है, वह नेतृत्व की दृढ़ इच्छाशक्ति का परिणाम है। राम जन्मभूमि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि और अन्य धार्मिक आचार्यों ने भी इसे धर्म और सांस्कृतिक उत्थान का ऐतिहासिक संकेत बताया।

मंदिर की बाहरी दीवारों पर वाल्मीकि रामायण के आधार पर उकेरी गई 87 नक्काशियाँ और इसके परकोटे पर बने भारतीय संस्कृति के 79 कांस्य दृश्यों ने मंदिर परिसर को एक जीवित विरासत संग्रहालय का स्वरूप दे दिया है। यह न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी अतुलनीय स्मारक बन चुका है।

अयोध्या के लोग आज के दिन को दशक़ों पुराने संकल्प की पूर्णता मानते हैं। उनका कहना है कि जब तक राम मंदिर का अस्तित्व रहेगा, यह ध्वज और इस ध्वजारोहण के क्षण के साथ प्रधानमंत्री मोदी का नाम स्वर्णाक्षरों में जुड़ा रहेगा। महंत राजूदास ने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नेतृत्व के बिना यह दिन संभव नहीं था।

जैसे ही प्रधानमंत्री मोदी ने ध्वज फहराया, मंदिर परिसर जयघोष से गूंज उठा और अयोध्या ने वह दिव्यता महसूस की, जिसकी गूंज सदियों तक सुनाई देगी। मुख्यमंत्री योगी ने इसे सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का ऐतिहासिक क्षण बताया। राम मंदिर पर यह ध्वज न केवल निर्माण पूर्ण होने का प्रतीक है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा के पुनर्स्थापन का भी।

अयोध्या धाम में यह दिन सिर्फ एक समारोह नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जागरण और राष्ट्रीय एकता की नई शुरुआत बनकर इतिहास में दर्ज हो गया।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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