उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में जमीन के नीचे छिपाकर रखी गई भारी नकदी मिलने से हड़कंप मच गया। गंगापार के नवाबगंज थाना क्षेत्र स्थित बरईपुर (रामनगर) गांव में एक मकान के कमरे के फर्श के नीचे करीब 5 फीट गहरे गड्ढे में दबाकर रखे गए तीन ड्रम बरामद किए गए हैं। इन ड्रमों में काली पन्नी में लपेटकर रखी गई 500 रुपये के नोटों की गड्डियां और थपियां भरी हुई थीं। नकदी की मात्रा इतनी अधिक बताई जा रही है कि पुलिस और बैंक की टीमें नोट गिनने वाली मशीनों के साथ मौके पर जुटी हुई हैं। गांव में बरामद रकम 60 करोड़ रुपये से अधिक होने के दावे किए जा रहे हैं, हालांकि आधिकारिक तौर पर कुल राशि की पुष्टि होना बाकी है।

पुलिस के अनुसार, बरामदगी नवाबगंज थाना क्षेत्र के बरईपुर गांव में मकान के भीतर खुदाई के दौरान हुई। मकान मालिक राजेश यादव उर्फ बबलू और उसका भाई करीब 15 साल पहले महाराष्ट्र के मुंबई और पुणे में एक कंपनी या फर्म में काम करते थे। लगभग 5 वर्ष पूर्व दोनों गांव लौट आए। इसके बाद उन्होंने कई बीघा जमीन, नए ट्रैक्टर-ट्राली और पिकअप वाहन खरीद लिए। ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि आरोपी नोटबंदी के दौरान कंपनी से भारी रकम लेकर गांव आया था। इसके बाद उसने नकदी को नीले और स्टील के बड़े ड्रमों में भरकर अपने मकान के एक कमरे के फर्श के नीचे गड्ढा खोदकर छिपा दिया था।

जानकारी के मुताबिक, हाल ही में आरोपी का अपने पट्टीदार से किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। कहासुनी के दौरान जमीन में दबाकर रखी गई नकदी का राज सामने आ गया। इसी बीच पुलिस द्वारा चलाए जा रहे विशेष चेकिंग और अपराध नियंत्रण अभियान के दौरान एक मुखबिर ने डीसीपी गंगानगर सोनम कुमार को इस संबंध में सटीक सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हो गई और बुधवार रात आरोपी के मकान की घेराबंदी कर उसे हिरासत में ले लिया।

आरोपी से कड़ाई से पूछताछ करने और उसकी निशानदेही पर पुलिस ने कमरे का फर्श तुड़वाकर करीब 5 फीट गहरी खुदाई कराई। खुदाई के दौरान एक के बाद एक तीन ड्रम बाहर निकाले गए। ड्रम खोले गए तो उनमें 500-500 रुपये के कड़क नोटों की गड्डियां और थपियां भरी मिलीं। इतनी बड़ी मात्रा में नकदी देखकर मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी भी दंग रह गए। इसके बाद आनन-फानन में बैंक अधिकारियों को नोट गिनने वाली मशीनों के साथ बुलाया गया।

प्राथमिक जानकारी के अनुसार, कई करोड़ रुपये की गिनती की जा चुकी है। हालांकि, बरामद नकदी की वास्तविक कुल राशि अभी सामने नहीं आई है। गांव में इस रकम के 60 करोड़ रुपये से अधिक होने के दावे किए जा रहे हैं। पुलिस और बैंक की टीमें नोटों की गिनती में जुटी हैं, जबकि नकदी के स्रोत का पता लगाने के लिए आरोपी से लगातार पूछताछ की जा रही है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आयकर विभाग और अन्य जांच एजेंसियों को भी सूचित कर दिया है। डीसीपी गंगानगर सोनम कुमार ने बताया कि बरईपुर में भारी नकदी मिलने के बाद आरोपी से लगातार पूछताछ की जा रही है। नोटों की पूरी गिनती समाप्त होने और जांच पूरी होने के बाद ही बरामद रकम की आधिकारिक पुष्टि की जा सकेगी। इसके साथ ही नकदी के स्रोत के संबंध में भी जांच की जा रही है।

फिलहाल सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने पूरे मकान को सील कर दिया है। अब आयकर विभाग और अन्य जांच एजेंसियों की कार्रवाई के साथ नकदी की वास्तविक मात्रा और उसके स्रोत का खुलासा होने का इंतजार है।

Om Prakash Pal

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नाम: ओम प्रकाश पाल

वर्तमान पद: स्वतंत्र पत्रकार, लेखक एवं स्तंभकार

कार्यक्षेत्र: नेशनल ब्यूरो (राष्ट्रीय स्तर)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, संसद, केंद्रीय मंत्रालय, कृषि, साहित्य, खेल एवं प्रशासन (बिजनेस को छोड़कर सभी विषयों पर कार्य)

पत्रकारिता अनुभव: लगभग 39 वर्ष

परिचय एवं अनुभव 

ओम प्रकाश पाल पिछले 39 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर नेशनल ब्यूरो में विशेष संवाददाता के रूप में लगभग 20 वर्षों तक संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) की रिपोर्टिंग की है।

एक मान्यता प्राप्त पत्रकार के रूप में उन्होंने केंद्रीय गृह, रक्षा, रेलवे, सड़क परिवहन, श्रम एवं रोजगार, जलशक्ति और कृषि जैसे प्रमुख केंद्रीय मंत्रालयों को कवर किया है।

विभिन्न समाचार पत्रों में योगदान:

  • अमर उजाला एवं दैनिक जागरण: पत्रकारिता के शुरुआती वर्षों का अनुभव।
  • शाह टाइम्स: न्यूज़ एडिटर (News Editor) के पद पर सेवाएं।
  • हरिभूमि (दिल्ली): वरिष्ठ संवाददाता के रूप में कार्य।

राजनीति विज्ञान और कृषि विषयों के जानकार होने के साथ-साथ उन्होंने साहित्य और खेल के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्य किया है। वर्तमान में वह एक स्वतंत्र पत्रकार, लेखक और स्तंभकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

शैक्षणिक योग्यता 

  • स्नातक (Graduate)
  • B.Ed (बैचलर ऑफ एजुकेशन)
  • पत्रकारिता में डिप्लोमा (Diploma in Journalism)
  • साहित्य रत्न
  • कृषि विशारद

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