राजौरी गार्डन स्थित आरजी हॉस्पिटल्स में निसंतानता का इलाज कराने पहुंचे 26 वर्षीय युवक के शरीर के अंदर अविकसित गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब जैसी महिला जननांग संरचनाएं मिलने का अत्यंत दुर्लभ मामला सामने आया है। चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति को पर्सिस्टेंट म्यूलरियन डक्ट सिंड्रोम (पीएमडीएस) कहा जाता है। वैश्विक चिकित्सा साहित्य में अब तक इस स्थिति के 300 से भी कम मामले दर्ज किए गए हैं।

अस्पताल के प्रवक्ता के अनुसार, 26 वर्ष की उम्र में बांझपन के इलाज के दौरान पहली बार इस स्थिति का पता चलना बेहद दुर्लभ है। मरीज के पेट में दोनों टेस्टिस मौजूद थे, जहां शरीर का तापमान स्क्रोटम की तुलना में अधिक होता है। दशकों तक पेट के अंदर रहने के कारण दोनों टेस्टिस बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे और उनमें कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ गया था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए आरजी हॉस्पिटल्स की सर्जिकल टीम ने न्यूनतम चीरे वाली लेप्रोस्कोपिक सर्जरी करने का निर्णय लिया। अस्पताल के मुख्य यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुशील खरबंदा के नेतृत्व में बहुविषयक टीम ने दूरबीन विधि से ऑपरेशन किया। सर्जरी के दौरान पता चला कि छोटा गर्भाशय और उससे जुड़ी ट्यूब जैसी संरचनाएं सीधे पेट में मौजूद टेस्टिस से बंधी हुई थीं। कैंसर के बढ़ते खतरे और अंगों के पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने के कारण सर्जिकल टीम ने गर्भाशय, ट्यूब्स और दोनों टेस्टिस को काटकर शरीर से अलग कर दिया।

यह मामला उस समय सामने आया, जब 26 वर्षीय मरीज विवाह के बाद बच्चा न होने की समस्या को लेकर अस्पताल के रिप्रोडक्टिव मेडिसिन विभाग पहुंचा। प्राथमिक जांच में वीर्य विश्लेषण कराया गया, जिसमें एज़ूस्पर्मिया की पुष्टि हुई। एज़ूस्पर्मिया वह चिकित्सकीय स्थिति है, जिसमें पुरुष के वीर्य में शुक्राणु पूरी तरह अनुपस्थित होते हैं।

इसके बाद डॉक्टरों ने मरीज का शारीरिक परीक्षण किया। इसमें पता चला कि उसके दोनों टेस्टिस स्क्रोटम यानी अंडकोश की थैली में मौजूद नहीं थे। इस स्थिति को डॉक्टरी भाषा में क्रिप्टोर्चिडिज्म कहा जाता है। इसमें अंडकोष जन्म के बाद अपनी प्राकृतिक जगह पर नीचे नहीं उतरते और पेट के अंदर ही अटके रह जाते हैं।

अंडकोषों की सटीक स्थिति और एज़ूस्पर्मिया के असली कारण का पता लगाने के लिए डॉक्टरों ने एडवांस्ड इमेजिंग और आनुवंशिक जांच का सहारा लिया। पेल्विक एमआरआई स्कैन ने डॉक्टरों को हैरान कर दिया। स्कैन में निचले पेट के अंदर एक छोटा, कम विकसित गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब जैसी म्यूलेरियन संरचनाएं मौजूद दिखाई दीं।

इसके बाद किए गए जेनेटिक टेस्ट यानी आनुवंशिक जांच में मरीज का क्रोमोसोम पैटर्न 46,XY निकला। यह वैज्ञानिक प्रमाण था कि आनुवंशिक और शारीरिक तौर पर मरीज पूरी तरह से एक पुरुष है। दोनों जांचों के संयोजन के आधार पर डॉक्टरों ने निष्कर्ष निकाला कि यह पीएमडीएस का मामला है, जिसमें पुरुष जेनेटिक्स होने के बावजूद शरीर के भीतर महिला जननांग के अवशेष बने रहते हैं।

लेप्रोस्कोपिक ऑपरेशन के बाद निकाले गए ऊतकों की सूक्ष्मदर्शी से जांच की गई। मुख्य यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुशील खरबंदा ने बताया कि जांच में बाएं टेस्टिकल में जर्म सेल नियोप्लासिया इन सिटू (जीसीएनआईएस) पाया गया, जो टेस्टिकुलर कैंसर से ठीक पहले की स्थिति होती है।

मरीज के ब्लड टेस्ट में कैंसर मार्कर सामान्य आए थे, फिर भी बायोप्सी में कैंसर-पूर्व बदलाव मिले। इससे स्पष्ट हुआ कि पेट के अंदर लंबे समय तक रुके रहने वाले टेस्टिस में सामान्य ब्लड रिपोर्ट के बावजूद कैंसर का खतरा बना रहता है। समय रहते की गई सर्जरी ने मरीज को भविष्य में होने वाले गंभीर खतरे से बचा लिया। आरजी हॉस्पिटल्स में सामने आया यह मामला वैश्विक स्तर पर 300 से भी कम दर्ज पीएमडीएस मामलों में शामिल हो गया है।

Om Prakash Pal

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नाम: ओम प्रकाश पाल

वर्तमान पद: स्वतंत्र पत्रकार, लेखक एवं स्तंभकार

कार्यक्षेत्र: नेशनल ब्यूरो (राष्ट्रीय स्तर)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, संसद, केंद्रीय मंत्रालय, कृषि, साहित्य, खेल एवं प्रशासन (बिजनेस को छोड़कर सभी विषयों पर कार्य)

पत्रकारिता अनुभव: लगभग 39 वर्ष

परिचय एवं अनुभव 

ओम प्रकाश पाल पिछले 39 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर नेशनल ब्यूरो में विशेष संवाददाता के रूप में लगभग 20 वर्षों तक संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) की रिपोर्टिंग की है।

एक मान्यता प्राप्त पत्रकार के रूप में उन्होंने केंद्रीय गृह, रक्षा, रेलवे, सड़क परिवहन, श्रम एवं रोजगार, जलशक्ति और कृषि जैसे प्रमुख केंद्रीय मंत्रालयों को कवर किया है।

विभिन्न समाचार पत्रों में योगदान:

  • अमर उजाला एवं दैनिक जागरण: पत्रकारिता के शुरुआती वर्षों का अनुभव।
  • शाह टाइम्स: न्यूज़ एडिटर (News Editor) के पद पर सेवाएं।
  • हरिभूमि (दिल्ली): वरिष्ठ संवाददाता के रूप में कार्य।

राजनीति विज्ञान और कृषि विषयों के जानकार होने के साथ-साथ उन्होंने साहित्य और खेल के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्य किया है। वर्तमान में वह एक स्वतंत्र पत्रकार, लेखक और स्तंभकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

शैक्षणिक योग्यता 

  • स्नातक (Graduate)
  • B.Ed (बैचलर ऑफ एजुकेशन)
  • पत्रकारिता में डिप्लोमा (Diploma in Journalism)
  • साहित्य रत्न
  • कृषि विशारद

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