PM-Kisan Samman Nidhi : उत्तर प्रदेश के लाखों किसान परिवारों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सतर्क कर देने वाली खबर सामने आई है। प्रदेश में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ ले रहे उन हजारों किसानों की सांसें अटक गई हैं जिनकी किस्तें तकनीकी खामियों के चलते बीच में ही रुक गई हैं। कृषि विभाग ने इस गंभीर स्थिति को देखते हुए अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है और स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि समय रहते जानकारी अपडेट नहीं की गई, तो लाभार्थी का नाम हमेशा के लिए पोर्टल से हटा दिया जाएगा। सरकार के इस सख्त रुख ने ग्रामीण अंचलों में हलचल तेज कर दी है, क्योंकि यह केवल एक तकनीकी अपडेट नहीं बल्कि किसानों के हक की राशि का सवाल है।

कृषि विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश भर में लगभग 16,56,252 किसान परिवार ऐसे चिन्हित किए गए हैं जिनकी सूचनाएं अधूरी या त्रुटिपूर्ण हैं। विवरण में स्पष्टता न होने के कारण भारत सरकार ने इन परिवारों के किस्तों के भुगतान पर फिलहाल अस्थायी रोक लगा दी है। इस संकट से निपटने के लिए विभाग ने अब एक विशेष अभियान का बिगुल फूंका है। प्रभावित किसानों को निर्देशित किया गया है कि वे सबसे पहले अपनी 'फार्मर रजिस्ट्री' की प्रक्रिया को पूर्ण करें। इसके पश्चात उन्हें आधिकारिक पोर्टल पर जाकर ‘अपडेट मिसिंग इंफार्मेशन’ लिंक के माध्यम से अपने सभी आवश्यक दस्तावेजों को नए सिरे से अपलोड करना होगा। विभाग ने दो टूक शब्दों में कहा है कि पोर्टल पर अपलोड किए जाने वाले सभी दस्तावेज पूरी तरह स्पष्ट और पठनीय होने चाहिए।

इस पूरी प्रक्रिया में एक बड़ा जोखिम भी शामिल है जो किसानों की रातों की नींद उड़ा सकता है। सरकारी निर्देशों के मुताबिक, यदि किसी किसान ने गलत जानकारी दी या उसके द्वारा अपलोड किए गए दस्तावेज अस्पष्ट पाए गए, तो सत्यापन अधिकारी द्वारा आवेदन निरस्त कर दिया जाएगा। सबसे डरावनी बात यह है कि एक बार आवेदन अस्वीकृत होने के बाद सुधार का दूसरा मौका नहीं मिलेगा। विभाग ने साफ कर दिया है कि समय सीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी न करने वाले अवशेष प्रकरणों को भारत सरकार स्थायी रूप से पोर्टल से डिलीट कर देगी, जिससे भविष्य में मिलने वाली सभी किस्तों का मार्ग बंद हो जाएगा।

वर्तमान में प्रदेश का कृषि महकमा युद्ध स्तर पर इन त्रुटियों को सुधारने में जुटा है। किसानों की सहायता के लिए क्षेत्रीय कृषि कार्मिकों और जिला उप कृषि निदेशक कार्यालयों को मुस्तैद कर दिया गया है। यह अभियान न केवल किसानों के दस्तावेजों को दुरुस्त करने का जरिया है, बल्कि यह उन पात्र परिवारों के लिए आखिरी उम्मीद भी है जो सरकारी सहायता के भरोसे अपनी खेती की गाड़ी खींच रहे हैं। अब देखना यह होगा कि दी गई मोहलत के भीतर कितने किसान अपनी पात्रता सिद्ध कर पाते हैं और कितने परिवारों का नाम सरकारी फाइलों से हमेशा के लिए ओझल हो जाता है।

Updated On
Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

Next Story