मुजफ्फरनगर में प्रदूषण नियंत्रण मानकों की अनदेखी पर प्रशासन की छापेमारी
मुजफ्फरनगर में प्रशासन और प्रदूषण बोर्ड की संयुक्त टीम ने राणा स्टील और सर्वोत्तम रोलिंग मिल पर की औचक छापेमारी, प्रदूषण नियंत्रण उपकरण बंद मिले

मुजफ्फरनगर में प्रदूषण नियंत्रण मानकों की जांच के दौरान राणा स्टील मिल के बाहर औचक निरीक्षण करती प्रशासनिक टीम
मुजफ्फरनगर में प्रदूषण नियंत्रण मानकों की अनदेखी के खिलाफ प्रशासन और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। बुधवार देर रात प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त टीम ने शहर की दो प्रमुख औद्योगिक इकाइयों राणा स्टील और सर्वोत्तम रोलिंग मिल में अचानक छापेमारी की। जांच के दौरान राणा स्टील में प्रदूषण नियंत्रण के लिए लगाए गए उपकरण पूरी तरह बंद मिले। मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों ने विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार कर लखनऊ मुख्यालय भेज दी है।
संयुक्त कार्रवाई का नेतृत्व सिटी मजिस्ट्रेट दीपक पाल और क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी गीतेश कुमार ने किया। बुधवार देर रात अधिकारियों का काफिला अचानक रोलिंग मिलों के मुख्य द्वार पर पहुंचा तो दोनों औद्योगिक इकाइयों के प्रबंधन में हड़कंप मच गया। टीम ने मिल परिसर में प्रवेश कर चिमनियों, एयर पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइस और अन्य संयंत्रों के संचालन की गहन जांच की।
निरीक्षण के दौरान राणा स्टील में प्रदूषण नियंत्रण के लिए स्थापित अनिवार्य उपकरण चालू स्थिति में नहीं मिले। अधिकारियों के अनुसार, उद्योगों के संचालन के साथ इन संयंत्रों का चालू रहना वैधानिक रूप से अनिवार्य है। उपकरण बंद मिलने पर टीम ने मौके पर ही पंचनामा तैयार किया और संबंधित तथ्यों को रिकॉर्ड में दर्ज किया।
मुजफ्फरनगर के सिटी मजिस्ट्रेट दीपक कुमार पाल ने कहा कि औद्योगिक इकाइयों में प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्थाओं का नियमानुसार संचालन बेहद जरूरी है। राणा स्टील में उपकरण बंद मिलने के मामले को बेहद गंभीरता से लिया गया है। पूरी रिपोर्ट तैयार कर लखनऊ स्थित उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। वहां से दिशा-निर्देश मिलते ही वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय सूत्रों और प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, राणा स्टील समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद कादिर राणा की औद्योगिक इकाई है। शासन स्तर पर रिपोर्ट भेजे जाने के बाद अब इस इकाई पर सीलिंग या भारी वित्तीय जुर्माने जैसी दंडात्मक कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
संयुक्त टीम ने इसके बाद सर्वोत्तम रोलिंग मिल का भी रुख किया। यहां टीम ने चिमनियों से निकलने वाले धुएं के घनत्व, उत्सर्जन मानकों और प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों की कार्यप्रणाली से जुड़े दस्तावेजों का मिलान किया। अधिकारियों ने मिल प्रबंधन को स्पष्ट चेतावनी दी कि किसी भी स्थिति में प्रदूषण नियंत्रण मानकों से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
प्रशासन की इस अचानक हुई मध्यरात्रि कार्रवाई के बाद मुजफ्फरनगर के औद्योगिक क्षेत्रों में खलबली मच गई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आने वाले दिनों में शहर की अन्य इंडस्ट्रियल इकाइयों और रोलिंग मिलों में भी इसी तरह का औचक निरीक्षण अभियान चलाया जाएगा। ऐसे में राणा स्टील में प्रदूषण नियंत्रण उपकरण बंद मिलने के मामले में अब लखनऊ मुख्यालय से मिलने वाले दिशा-निर्देश और आगे की वैधानिक कार्रवाई पर नजर रहेगी।

Om Prakash Pal
नाम: ओम प्रकाश पाल
वर्तमान पद: स्वतंत्र पत्रकार, लेखक एवं स्तंभकार
कार्यक्षेत्र: नेशनल ब्यूरो (राष्ट्रीय स्तर)
बीट (मुख्य विषय): राजनीति, संसद, केंद्रीय मंत्रालय, कृषि, साहित्य, खेल एवं प्रशासन (बिजनेस को छोड़कर सभी विषयों पर कार्य)
पत्रकारिता अनुभव: लगभग 39 वर्ष
परिचय एवं अनुभव
ओम प्रकाश पाल पिछले 39 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर नेशनल ब्यूरो में विशेष संवाददाता के रूप में लगभग 20 वर्षों तक संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) की रिपोर्टिंग की है।
एक मान्यता प्राप्त पत्रकार के रूप में उन्होंने केंद्रीय गृह, रक्षा, रेलवे, सड़क परिवहन, श्रम एवं रोजगार, जलशक्ति और कृषि जैसे प्रमुख केंद्रीय मंत्रालयों को कवर किया है।
विभिन्न समाचार पत्रों में योगदान:
- अमर उजाला एवं दैनिक जागरण: पत्रकारिता के शुरुआती वर्षों का अनुभव।
- शाह टाइम्स: न्यूज़ एडिटर (News Editor) के पद पर सेवाएं।
- हरिभूमि (दिल्ली): वरिष्ठ संवाददाता के रूप में कार्य।
राजनीति विज्ञान और कृषि विषयों के जानकार होने के साथ-साथ उन्होंने साहित्य और खेल के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्य किया है। वर्तमान में वह एक स्वतंत्र पत्रकार, लेखक और स्तंभकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता
- स्नातक (Graduate)
- B.Ed (बैचलर ऑफ एजुकेशन)
- पत्रकारिता में डिप्लोमा (Diploma in Journalism)
- साहित्य रत्न
- कृषि विशारद
