मुजफ्फरनगर में कारोबारी राजीव जैन पर कस्टम विभाग का शिकंजा, 40 करोड़ की टैक्स चोरी की जांच
मुजफ्फरनगर में पश्चिम बंगाल कस्टम विभाग ने कारोबारी राजीव जैन के आवास पर छापेमारी कर परिजनों को कानूनी नोटिस दिया। भूटान सीमा से आए 215 ट्रकों में फेरो सिलिकॉन के आयात और 30 से 40 करोड़ रुपये की कथित कर चोरी की जांच जारी है।

तस्वीर में पश्चिम बंगाल कस्टम विभाग के अधिकारी मुजफ्फरनगर के पार्श्वनाथ कॉलोनी स्थित कारोबारी राजीव जैन के आवास पर कार्रवाई के दौरान कानूनी नोटिस सौंपते नजर आ रहे हैं।
मुजफ्फरनगर में कथित तौर पर 30 से 40 करोड़ रुपये की सीमा शुल्क चोरी के मामले में पश्चिम बंगाल कस्टम विभाग की विशेष टीम ने बुधवार दोपहर प्रमुख कारोबारी राजीव जैन के आवास पर छापेमारी की। भारत-भूटान सीमा के रास्ते फेरो सिलिकॉन के आयात से जुड़े इस मामले में टीम स्थानीय पुलिस बल के साथ भारत माता मंदिर के समीप पार्श्वनाथ कॉलोनी स्थित उनके निवास पर पहुंची। हालांकि, कारोबारी घर पर मौजूद नहीं मिले। इसके बाद अधिकारियों ने उनके परिजनों को कानूनी नोटिस सौंपा और जांच में शामिल होने के निर्देश दिए।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, पिछले दो महीनों में भूटान सीमा के रास्ते फेरो सिलिकॉन से लदे 215 ट्रकों के भारत में प्रवेश और उनसे जुड़े सीमा शुल्क के कथित हेरफेर की जांच की जा रही है। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक, इस मामले में करीब 30 से 40 करोड़ रुपये की कस्टम ड्यूटी चोरी की आशंका है।
मामले की शुरुआत 25 अक्टूबर को भारत-भूटान सीमा पर हुई कार्रवाई से हुई। कस्टम विभाग की सतर्कता टीम ने फेरो सिलिकॉन से लदे दो संदिग्ध ट्रकों को रोका था। भूटान से भारत में माल लाने वाले इन ट्रकों के चालान और आयात संबंधी दस्तावेजों की जांच के दौरान अधिकारियों को कई गड़बड़ियां और अनियमितताएं मिलीं। इसके बाद दोनों ट्रकों को मौके पर ही जब्त कर लिया गया।
कार्रवाई के बाद कस्टम विभाग ने आयात से जुड़े नेटवर्क की जांच शुरू की। अधिकारियों ने दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन और माल की आवाजाही से संबंधित रिकॉर्ड खंगाले। शुरुआती पड़ताल में बड़े पैमाने पर कथित कर चोरी से जुड़े सुराग सामने आए, जिनका संबंध मुजफ्फरनगर से जुड़ता पाया गया।
कस्टम विभाग की ओर से जारी नोटिस के अनुसार, सितंबर और अक्टूबर के दौरान भूटान सीमा पार कर फेरो सिलिकॉन से लदे करीब 215 ट्रकों ने भारतीय क्षेत्र में प्रवेश किया था। जांच में 8 सितंबर, 16 सितंबर, 19 सितंबर, 7 अक्टूबर और 25 अक्टूबर की तारीखों को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन तिथियों पर भारत में प्रवेश करने वाले ट्रकों के रिकॉर्ड और उनके आयात दस्तावेजों का गहन मिलान किया जा रहा है।
इतनी बड़ी मात्रा में औद्योगिक कच्चे माल के आयात में कर संबंधी अनियमितताओं की आशंका जताई गई है। हालांकि, कस्टम अधिकारियों के अनुसार, मूल दस्तावेजों की जांच और भौतिक सत्यापन पूरा होने के बाद ही कथित कर चोरी की सटीक राशि निर्धारित की जा सकेगी।
जांच रिपोर्ट के आधार पर सामने आया है कि फेरो सिलिकॉन का आयात मुजफ्फरनगर निवासी कारोबारी राजीव जैन के स्वामित्व वाली फर्म ‘श्री वैंकटेश्वर इंटरप्राइजेज’ के नाम पर किया गया था। जांच में आशंका जताई गई है कि इसी फर्म के माध्यम से आयातित माल भारतीय बाजारों में खपाया जा रहा था।
बुधवार को मुजफ्फरनगर पहुंची पश्चिम बंगाल कस्टम विभाग की टीम ने शहर कोतवाली और खालापार थाना पुलिस को साथ लेकर पार्श्वनाथ कॉलोनी स्थित राजीव जैन के मकान पर छापा मारा। कारोबारी की अनुपस्थिति में अधिकारियों ने उनके परिजनों को औपचारिक कानूनी नोटिस सौंपा। नोटिस के माध्यम से राजीव जैन को जांच में शामिल होने के साथ आयात से संबंधित सभी बैंक लेनदेन और बिल प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल, इस मामले में कारोबारी या उनकी फर्म की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
फेरो सिलिकॉन लोहे और सिलिकॉन से बना मिश्रधातु पदार्थ है, जिसका प्रमुख उपयोग इस्पात निर्माण और ढलाई उद्योगों में होता है। स्टील निर्माण के दौरान इसका इस्तेमाल ऑक्सीजन की मात्रा कम करने और धातु की ताकत, मजबूती तथा गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए किया जाता है।
सीमा पार व्यापार में फेरो सिलिकॉन जैसे औद्योगिक कच्चे माल के आयात के लिए सीमा शुल्क, उत्पाद की सही श्रेणी, मूल्यांकन और मूल देश से संबंधित प्रमाणिक दस्तावेज महत्वपूर्ण होते हैं। मौजूदा मामले में इन्हीं वैधानिक दस्तावेजों में कथित हेरफेर के जरिए कर चोरी किए जाने का संदेह है।
भूटान सीमा से पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक फैले इस मामले की जांच के बाद मुजफ्फरनगर के उद्योग और व्यापार जगत में हलचल है। स्थानीय व्यवसायियों के बीच कार्रवाई को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कस्टम विभाग के अधिकारियों के संकेत के अनुसार, आने वाले दिनों में जांच का दायरा बढ़ाया जा सकता है। इसके तहत ट्रांसपोर्टरों, सीमा शुल्क एजेंटों (CHA) और माल प्राप्त करने वाली अन्य संबंधित शेल कंपनियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।
फिलहाल, 215 ट्रकों के आयात रिकॉर्ड, दो जब्त ट्रकों से मिले दस्तावेजों और कारोबारी राजीव जैन की फर्म से जुड़े कथित लेनदेन की पड़ताल इस मामले के प्रमुख पहलू हैं। जांच पूरी होने और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही कथित कर चोरी की वास्तविक राशि तथा संबंधित पक्षों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

Om Prakash Pal
नाम: ओम प्रकाश पाल
वर्तमान पद: स्वतंत्र पत्रकार, लेखक एवं स्तंभकार
कार्यक्षेत्र: नेशनल ब्यूरो (राष्ट्रीय स्तर)
बीट (मुख्य विषय): राजनीति, संसद, केंद्रीय मंत्रालय, कृषि, साहित्य, खेल एवं प्रशासन (बिजनेस को छोड़कर सभी विषयों पर कार्य)
पत्रकारिता अनुभव: लगभग 39 वर्ष
परिचय एवं अनुभव
ओम प्रकाश पाल पिछले 39 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर नेशनल ब्यूरो में विशेष संवाददाता के रूप में लगभग 20 वर्षों तक संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) की रिपोर्टिंग की है।
एक मान्यता प्राप्त पत्रकार के रूप में उन्होंने केंद्रीय गृह, रक्षा, रेलवे, सड़क परिवहन, श्रम एवं रोजगार, जलशक्ति और कृषि जैसे प्रमुख केंद्रीय मंत्रालयों को कवर किया है।
विभिन्न समाचार पत्रों में योगदान:
- अमर उजाला एवं दैनिक जागरण: पत्रकारिता के शुरुआती वर्षों का अनुभव।
- शाह टाइम्स: न्यूज़ एडिटर (News Editor) के पद पर सेवाएं।
- हरिभूमि (दिल्ली): वरिष्ठ संवाददाता के रूप में कार्य।
राजनीति विज्ञान और कृषि विषयों के जानकार होने के साथ-साथ उन्होंने साहित्य और खेल के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्य किया है। वर्तमान में वह एक स्वतंत्र पत्रकार, लेखक और स्तंभकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता
- स्नातक (Graduate)
- B.Ed (बैचलर ऑफ एजुकेशन)
- पत्रकारिता में डिप्लोमा (Diploma in Journalism)
- साहित्य रत्न
- कृषि विशारद
