मिर्जापुर के हलिया विकासखंड की मनिगढ़ा ग्राम पंचायत में विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की शिकायत के बाद जिलाधिकारी मिर्जापुर के जांच आदेश के बावजूद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ने का मामला सामने आया है। आरोप है कि गांव में कई विकास कार्य धरातल के बजाय कागजों पर किए गए हैं। शिकायत के बाद जांच के निर्देश दिए गए, लेकिन जांच प्रक्रिया में संबंधित अधिकारियों और ग्राम पंचायत स्तर से सहयोग नहीं मिलने का आरोप लगाया जा रहा है।

हलिया विकासखंड पहले भी मनरेगा से जुड़े करोड़ों रुपये के घोटाले के मामले में चर्चा में रहा है। इस मामले में सीबीआई ने 54 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। अब इसी विकासखंड की मनिगढ़ा ग्राम पंचायत में कथित भ्रष्टाचार की शिकायत और जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

शिकायत के बाद जिलाधिकारी मिर्जापुर ने मामले की जांच के आदेश दिए। सूत्रों के मुताबिक जांच टीम की ओर से दो बार पत्र जारी किए जा चुके हैं, लेकिन बीडीओ हलिया, संबंधित सेक्रेटरी और ग्राम प्रधान की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं किया जा रहा है। आरोप है कि जांच के लिए आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं और स्थलीय सत्यापन की प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ रही है।

मामले में ग्राम पंचायत के प्रधान पद को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। मनिगढ़ा में प्रधान पद पर पिछड़ी जाति की महिला निर्वाचित हैं, लेकिन आरोप है कि ग्राम पंचायत का संचालन किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किया जा रहा है। शिकायत में इसे ‘पति-प्रधान’ या ‘प्रॉक्सी प्रधान’ मॉडल के तौर पर बताया गया है। आरोप है कि महिला प्रधान के स्थान पर कोई अन्य व्यक्ति ग्राम पंचायत की जिम्मेदारियां संभाल रहा है।

वहीं, भ्रष्टाचार की शिकायत करने वाले व्यक्ति पर दबाव बनाए जाने का भी आरोप है। शिकायतकर्ता के अनुसार उसे शिकायत वापस लेने के लिए कभी प्रलोभन दिया जा रहा है तो कभी धमकाया जा रहा है। ऐसे में जांच प्रक्रिया और शिकायतकर्ता की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें प्रशासक बनाए जाने की व्यवस्था के बीच मनिगढ़ा ग्राम पंचायत में कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि इसी स्थिति का फायदा उठाकर संबंधित लोग कार्रवाई नहीं होने की धारणा के साथ काम कर रहे हैं।

अब मामला जिलाधिकारी के जांच आदेश और जांच टीम की ओर से जारी किए गए दो पत्रों के बाद आगे की कार्रवाई पर टिका है। जांच में दस्तावेज उपलब्ध होते हैं या नहीं, स्थलीय सत्यापन होता है या नहीं और शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है, यह प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

Santosh Giri

Santosh Giri

नाम: संतोष देव गिरि

वर्तमान पद: स्वतंत्र पत्रकार

कार्यक्षेत्र: मिर्ज़ापुर / सोनभद्र (विंध्याचल मंडल मुख्यालय), उत्तर प्रदेश

अनुभव: 20 से अधिक वर्ष (दो दशक से भी ज़्यादा)

बीट: जनसरोकार, जल-जंगल-जमीन, वन्यजीव, आदिवासी व वंचित समाज, कृषि, पर्यावरण, स्थानीय प्रशासन, राजनीति व अन्य प्रमुख विषय

परिचय

संतोष देव गिरि पिछले दो दशकों से अधिक समय से मीडिया के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। वर्तमान में वह स्वतंत्र रूप से जनसरोकार के मसलों पर लेखन और रिपोर्टिंग कर रहे हैं। उनका मुख्य ध्यान जल-जंगल-जमीन, वन्यजीव संरक्षण, आदिवासी व वंचित समाज के अधिकारों, कृषि तथा प्रकृति पर निर्भर लोगों की समस्याओं और मुद्दों पर रहता है। वह विंध्याचल मंडल (मिर्ज़ापुर और सोनभद्र) मुख्यालय से इन क्षेत्रों की विभिन्न गतिविधियों को कवर करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव

अपने लंबे पत्रकारिता सफर में वह देश के कई प्रमुख समाचार पत्रों और मीडिया संस्थानों के साथ कार्य कर चुके हैं:

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शैक्षणिक योग्यता

स्नातक (Graduate)

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