घंटाघर मैदान में रातभर गूंजी कजली, रानी सिंह और खोखा मिर्जापुरी ने बांधा समां
मिर्जापुर के घंटाघर मैदान में मंगलवार रात कजली महोत्सव में रानी सिंह और खोखा मिर्जापुरी समेत कलाकारों ने प्रस्तुतियां दीं। मनोज श्रीवास्तव ने कजली की देश-विदेश तक बनी पहचान को गौरव बताया।

तस्वीर में बाएं से एक व्यक्ति और दाएं तरफ राष्ट्रवादी मंच के अध्यक्ष मनोज श्रीवास्तव मिर्जापुर के घंटाघर मैदान में कजली महोत्सव के दौरान मंच पर नजर आ रहे हैं।
मिर्जापुर। नगर के घंटाघर मैदान में मंगलवार की रात कजली के पारंपरिक सुरों से माहौल देर रात तक गूंजता रहा। भादों माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर लोक संगीत प्रचारिणी समिति के तत्वावधान में आयोजित कजली महोत्सव में लोक कलाकारों ने प्रस्तुतियां देकर श्रोताओं को बांधे रखा। मैदान में मौजूद लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रवादी मंच के अध्यक्ष मनोज श्रीवास्तव ने कजली कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि मिर्जापुर की पहचान केवल प्राकृतिक और धार्मिक विरासत से ही नहीं, बल्कि समृद्ध लोक संस्कृति से भी है। जिले की माटी में पैदा हुई कजली आज देश की सीमाओं को पार कर विदेशों में भी गाई और सुनी जा रही है। यह मिर्जापुर के लिए गौरव की बात है।
मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि कजली को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने और इसकी मौलिकता को कायम रखने वाले लोक कलाकार सांस्कृतिक विरासत के संवाहक हैं। बदलते दौर में लोक विधाओं को जीवित रखने के लिए ऐसे आयोजनों की निरंतरता जरूरी है। उन्होंने कलाकारों और आयोजकों को कजली जैसी लोक परंपरा को सहेजने के लिए बधाई दी।
महोत्सव में लोक गायिका रानी सिंह, खोखा मिर्जापुरी समेत तमाम कलाकारों ने प्रस्तुति दी। कलाकारों ने पारंपरिक कजली के साथ लोक संस्कृति से जुड़े गीत प्रस्तुत किए, जिससे घंटाघर मैदान का माहौल पूरी तरह कजलीमय हो गया। एक के बाद एक प्रस्तुतियों के बीच श्रोता देर रात तक कार्यक्रम का आनंद लेते रहे।
आयोजकों ने बताया कि भादों माह में कजली का विशेष महत्व है। मिर्जापुर की कजली की अपनी अलग गायकी, भाषा और भाव-भंगिमा है, जिसके कारण इसकी पहचान देश-विदेश तक बनी है। महोत्सव का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी लोक संस्कृति से जोड़ना और कजली की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाना है। कार्यक्रम के दौरान कलाकारों और अतिथियों का स्वागत किया गया। बड़ी संख्या में लोग कजली महोत्सव सुनने के लिए घंटाघर मैदान पहुंचे।

Santosh Giri
नाम: संतोष देव गिरि
वर्तमान पद: स्वतंत्र पत्रकार
कार्यक्षेत्र: मिर्ज़ापुर / सोनभद्र (विंध्याचल मंडल मुख्यालय), उत्तर प्रदेश
अनुभव: 20 से अधिक वर्ष (दो दशक से भी ज़्यादा)
बीट: जनसरोकार, जल-जंगल-जमीन, वन्यजीव, आदिवासी व वंचित समाज, कृषि, पर्यावरण, स्थानीय प्रशासन, राजनीति व अन्य प्रमुख विषय
परिचय
संतोष देव गिरि पिछले दो दशकों से अधिक समय से मीडिया के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। वर्तमान में वह स्वतंत्र रूप से जनसरोकार के मसलों पर लेखन और रिपोर्टिंग कर रहे हैं। उनका मुख्य ध्यान जल-जंगल-जमीन, वन्यजीव संरक्षण, आदिवासी व वंचित समाज के अधिकारों, कृषि तथा प्रकृति पर निर्भर लोगों की समस्याओं और मुद्दों पर रहता है। वह विंध्याचल मंडल (मिर्ज़ापुर और सोनभद्र) मुख्यालय से इन क्षेत्रों की विभिन्न गतिविधियों को कवर करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव
अपने लंबे पत्रकारिता सफर में वह देश के कई प्रमुख समाचार पत्रों और मीडिया संस्थानों के साथ कार्य कर चुके हैं:
- दैनिक जागरण
- हिंदुस्तान
- राष्ट्रीय सहारा
- सहारा समय
- दैनिक मान्यवर
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- हमवतन
- लोकमत
शैक्षणिक योग्यता
स्नातक (Graduate)
