क्यों अपनी ही मूंछों के नीचे दबे जा रहे हैं 35 इंच मूंछोंवाले 'मोछू दीवान', क्या सरकार सुनेगी सिपाही की दास्तान?
उत्तर प्रदेश के महाराजगंज में तैनात हेड कांस्टेबल प्रमोद प्रसाद उर्फ 'मोछू दीवान' अपनी 35 इंच लंबी रौबदार मूंछों के लिए चर्चा में हैं। पुलिस विभाग से मिलने वाले मामूली भत्ते के बावजूद वे हर महीने हजारों रुपये खर्च कर अपनी विरासत को संवार रहे हैं। जानिए उनकी अनोखी कहानी और मूंछों के रखरखाव की चुनौतियां।

महाराजगंज में तैनात यूपी पुलिस के हेड कांस्टेबल प्रमोद प्रसाद, जिन्हें ‘मोछू दीवान’ कहा जाता है
उत्तर प्रदेश पुलिस के बेड़े में अक्सर अपनी बहादुरी और अनुशासन के किस्से सुनने को मिलते हैं, लेकिन महाराजगंज जिले में तैनात एक जांबाज पुलिसकर्मी अपनी बहादुरी के साथ-साथ अपने चेहरे की आभा यानी अपनी 'रौबदार मूंछों' के लिए पूरे प्रदेश में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। हेड कांस्टेबल प्रमोद प्रसाद, जिन्हें आज जनता प्यार और सम्मान से 'मोछू दीवान' के नाम से पुकारती है, अपनी करीब 35 इंच लंबी और सलीके से संवारी गई मूंछों के कारण एक अलग ही पहचान रखते हैं। उनकी यह विशिष्ट शैली न केवल उन्हें भीड़ से अलग करती है, बल्कि विभाग के भीतर भी उन्हें एक खास रुतबा प्रदान करती है।
मूंछों को शौर्य और मान-मर्यादा का प्रतीक मानने वाले प्रमोद प्रसाद अपनी इस विरासत को संवारने में कोई कसर नहीं छोड़ते। हर सुबह अपनी ड्यूटी पर निकलने से पहले वे घंटों अपनी मूंछों को तराशने और उन्हें सही आकार देने में व्यतीत करते हैं। उनकी इस मेहनत का ही परिणाम है कि राह चलते लोग उन्हें देखकर ठिठक जाते हैं और उनके साथ सेल्फी लेने की होड़ मच जाती है। उत्तर प्रदेश पुलिस, विशेषकर प्रादेशिक आर्म्ड कॉन्स्टेबुलरी (PAC) में बड़ी और प्रभावशाली मूंछें रखने की परंपरा पुरानी रही है, जिसे बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा मासिक भत्ता भी निर्धारित किया गया है।
हालांकि, इस गौरवशाली पहचान को बनाए रखना अब प्रमोद प्रसाद की जेब पर भारी पड़ता दिख रहा है। वर्तमान सरकारी नियमों के अनुसार, उन्हें मूंछों के रखरखाव के लिए प्रतिमाह ₹250 से ₹280 का भत्ता मिलता है। लेकिन हकीकत यह है कि इन लंबी मूंछों की चमक, मजबूती और बनावट बरकरार रखने के लिए उन्हें महंगे तेल, वैक्स और विशिष्ट सौंदर्य प्रसाधनों का उपयोग करना पड़ता है, जिसका कुल खर्च प्रतिमाह 4 से 5 हजार रुपये तक पहुंच जाता है। सरकारी भत्ते और वास्तविक खर्च के बीच यह बड़ा अंतर 'मोछू दीवान' के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है।
प्रमोद प्रसाद को इस बात का मलाल जरूर है कि महंगाई के इस दौर में सरकारी भत्ता मूंछों के रखरखाव के लिए नाकाफी है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि विभाग और सरकार उनके इस समर्पण को देखते हुए भत्ते में उचित बढ़ोतरी करेगी। अपनी वित्तीय सीमाओं के बावजूद उन्होंने अपनी मूंछों की शान में कभी कमी नहीं आने दी है। 'मोछू दीवान' का यह अटूट शौक यह दर्शाता है कि वर्दी के प्रति सम्मान केवल कर्तव्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी विशिष्ट जीवनशैली और व्यक्तित्व को भी प्रदर्शित करता है जो पुलिस बल की छवि को और अधिक प्रभावी और मर्यादित बनाता है।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
