उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हाल ही में उद्घाटित ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार इसकी भव्यता नहीं बल्कि यहां मौजूद छाया की कमी सुर्खियों में है। अप्रैल 2026 में सामने आए वीडियो में देखा गया कि भीषण गर्मी के बीच स्मारक परिसर में आए लोग तेज धूप से जूझते नजर आ रहे हैं, जिससे शहर की शहरी डिजाइन और सार्वजनिक सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं।

25 दिसंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटित यह 65 एकड़ में फैला विशाल परिसर करीब 230 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। यह परियोजना पहले एक बड़े लैंडफिल क्षेत्र को परिवर्तित कर बनाई गई, जो गोमती रिवर के निकट स्थित है। कमल के आकार में विकसित इस स्मारक में देश के प्रमुख नेताओं, विशेषकर अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं और इसे बड़े सार्वजनिक आयोजनों के लिए डिजाइन किया गया है।



हालांकि, उद्घाटन के महज चार महीने बाद सामने आई ताजा तस्वीरों और वीडियो ने इस परियोजना की एक बड़ी कमी उजागर कर दी है। विशाल खुले प्रांगणों में परिपक्व पेड़ों की अनुपस्थिति के कारण आगंतुकों को सीधे सूर्य की तेज किरणों का सामना करना पड़ रहा है। लखनऊ जैसे शहर में, जहां गर्मियों में तापमान अक्सर 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है, यह स्थिति सार्वजनिक स्थानों की उपयोगिता पर सवाल खड़े करती है।

प्रशासन का कहना है कि निर्माण के दौरान हजारों पौधे, जिनमें मियावाकी तकनीक से लगाए गए पौधे भी शामिल हैं, रोपे गए थे। लेकिन इन पौधों को छायादार पेड़ों में विकसित होने में समय लगेगा, और फिलहाल वे पर्याप्त छाया प्रदान करने में सक्षम नहीं हैं। अधिकारियों के अनुसार, आगामी मानसून सत्र में बड़े पेड़ों के रोपण और हरित क्षेत्र को और विकसित करने की योजना बनाई जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के बड़े लैंडस्केप प्रोजेक्ट्स में हरियाली को परिपक्व होने में वर्षों लगते हैं, जबकि निर्माण कार्य अपेक्षाकृत कम समय में पूरा हो जाता है।

यह मामला केवल एक स्मारक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहरी विकास की उस व्यापक चुनौती को भी उजागर करता है, जहां भव्य वास्तुकला और पर्यावरणीय आराम के बीच संतुलन बनाना आवश्यक हो जाता है। तेजी से विकसित हो रहे शहरों में अक्सर संरचनाएं पहले तैयार हो जाती हैं, जबकि उनके साथ जुड़ी पारिस्थितिक सुविधाएं पीछे रह जाती हैं।

‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ को लेकर उठी यह बहस इस बात की ओर संकेत करती है कि भविष्य में ऐसे परियोजनाओं में केवल प्रतीकात्मक हरियाली नहीं, बल्कि दीर्घकालिक और व्यावहारिक छाया प्रबंधन को प्राथमिकता देनी होगी, ताकि ये स्थान आम नागरिकों के लिए वास्तव में उपयोगी और अनुकूल बन सकें।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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