लातूर जिला बैंक ने बांटे 1,780 करोड़ रुपये के फसल ऋण, लगातार चार साल 100 करोड़ से अधिक मुनाफा
लातूर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक ने पांच वर्षों में 1,780 करोड़ रुपये का फसल ऋण वितरित किया और 249 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया। चेयरमैन धिरज देशमुख ने चुनाव से पहले बैंक की वित्तीय उपलब्धियों, किसान योजनाओं और रोजगार के आंकड़े पेश किए।

लातूर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के चुनाव के लिए सहकार पैनल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी देते चेयरमैन धिरज देशमुख व पदाधिकारी.
लातूर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक ने पिछले पांच वर्षों में आर्थिक अनुशासन, पारदर्शी कामकाज और किसानों के हित में संचालित योजनाओं के माध्यम से अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत की है। बैंक ने इस अवधि में 1,780 करोड़ रुपये का फसल ऋण वितरित किया है। जिले में कुल फसल ऋण वितरण में बैंक की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से अधिक रही है। इसके अलावा बैंक ने लगातार चार वर्षों तक 100 करोड़ रुपये से अधिक का वार्षिक सकल लाभ दर्ज किया है। यह जानकारी बैंक के मौजूदा चेयरमैन धिरज विलासराव देशमुख ने पत्रकार परिषद में दी।
लातूर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के पंचवर्षीय चुनाव के मद्देनजर पुराने एमआईडीसी क्षेत्र स्थित होटल भारत फाइनडाइन में 'सहकार पैनल' की ओर से पत्रकार परिषद आयोजित की गई थी। इस दौरान धिरज देशमुख ने बैंक की स्थापना से लेकर अब तक की यात्रा और पिछले पांच वर्षों की वित्तीय प्रगति का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। इस अवसर पर सहकार पैनल के उम्मीदवार और पदाधिकारी बड़ी संख्या में मौजूद थे।
देशमुख ने बताया कि बैंक की प्रगति के पीछे लोकनेता विलासराव देशमुख की विकास दृष्टि और सहकार महर्षि दिलीपराव देशमुख का दूरदर्शी नेतृत्व रहा है। पिछले पांच वर्षों में संचालक मंडल ने पारदर्शी और नियोजित तरीके से कामकाज किया। बैंक ने अपनी स्थापना के बाद के 38 वर्षों में अर्जित कुल शुद्ध लाभ से भी अधिक, यानी पिछले पांच वर्षों में 249 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है। इस अवधि में बैंक ने 92.71 करोड़ रुपये का आयकर भी चुकाया है।
किसानों को आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से बैंक ने फसल ऋण वितरण को प्राथमिकता दी। पिछले पांच वर्षों में फसल ऋण वितरण में 830 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई और कुल 1,780 करोड़ रुपये का कर्ज वितरित किया गया। इस दौरान लगभग 45 हजार नए कर्जदार सदस्य बैंक से जुड़े। छत्रपति शिवाजी महाराज शेतकरी सम्मान योजना और महात्मा ज्योतिराव फुले शेतकरी कर्जमुक्ति योजना के माध्यम से हजारों किसानों को कर्जमाफी और प्रोत्साहन अनुदान का लाभ दिलाया गया।
इसके अलावा लोकनेता विलासराव देशमुख ब्याज रियायत योजना के तहत किसानों के कर्ज पर लगने वाले 13.74 करोड़ रुपये के ब्याज का भुगतान बैंक ने अपने स्वयं के कोष से किया।
कृषि के साथ-साथ कृषि मशीनीकरण, रेशम उद्योग, ड्रैगन फ्रूट की खेती और अन्य कृषि आधारित व्यवसायों को भी आर्थिक सहायता दी गई। हार्वेस्टर खरीदने के लिए 133 किसानों को और 143 चीनी मिलों को कर्ज उपलब्ध कराया गया। ट्रैक्टर-ट्रेलर योजना के तहत 367 सदस्यों को 32.37 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया। रेशम उद्योग को बढ़ावा देने के लिए शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर कर्ज की सुविधा दी गई। इन योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला है।
महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए बैंक ने महिला स्वयं सहायता समूहों की ऋण सीमा दो लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दी है। बैंक से कुल 16,447 महिला स्वयं सहायता समूह जुड़े हुए हैं। इनमें से 8,237 समूहों को 93.32 करोड़ रुपये का ऋण दिया गया है। महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए 100 करोड़ रुपये का अलग से प्रावधान भी किया गया है।
किसान सदस्यों के बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए बैंक ने 25.13 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया है। इसके अलावा 36 विद्यार्थियों को विदेश में शिक्षा प्राप्त करने के लिए भी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है।
बैंक ने सीधी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से कुल 375 पदों पर नियुक्तियां की हैं। इनमें लातूर जिले के 263 युवाओं को रोजगार का अवसर मिला। बैंक ने मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई और टैप एंड गो एटीएम कार्ड जैसी डिजिटल सुविधाएं भी शुरू की हैं। जिन 435 गांवों में बैंक की शाखाएं नहीं हैं, वहां आठ मोबाइल वैन के माध्यम से बैंकिंग सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं।
निवेश के क्षेत्र में भी बैंक ने पिछले पांच वर्षों के दौरान 457 करोड़ रुपये का रिटर्न हासिल किया है। वित्तीय प्रबंधन और उल्लेखनीय प्रदर्शन के लिए बैंक को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर लगभग 13 पुरस्कार मिले हैं। इनमें वैकुंठभाई मेहता पुरस्कार के साथ नाबार्ड और बैंको के पुरस्कार भी शामिल हैं।
इस बीच, बैंक चुनाव को लेकर विपक्ष की ओर से उसके कामकाज पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए धिरज देशमुख ने कहा कि बैंक के कामकाज का अध्ययन किए बिना आरोप लगाने के बजाय विपक्ष को अपना विजन और विकास का रोडमैप जनता के सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिले की सहकारिता चळवळ की जिम्मेदारी किसके हाथों में सौंपी जानी चाहिए, इसका फैसला जागरूक मतदाता करेंगे।
कुल मिलाकर, सहकार पैनल ने चुनाव से पहले बैंक की पिछले पांच वर्षों की उपलब्धियों का विवरण मतदाताओं के सामने रखा है। इसमें किसानों को फसल ऋण, महिला स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता, युवाओं को रोजगार, डिजिटल बैंकिंग सुविधाओं और ग्रामीण क्षेत्रों तक बैंकिंग सेवाओं के विस्तार को प्रमुखता दी गई है।

Limbraj Panhalkar (Latur)
नाम: लिंबराज शिवराम पन्हाळकर
वर्तमान पद: जिला रिपोर्टर (लातूर)
कार्यक्षेत्र: लातूर (महाराष्ट्र)
बीट : क्राइम (अपराध) एवं सभी प्रकार की रिपोर्टिंग
अनुभव: 20 साल
परिचय
लिंबराज शिवराम पन्हाळकर महाराष्ट्र के लातूर जिले के एक वरिष्ठ और अनुभवी समाचार संवाददाता हैं। वह वर्तमान में लातूर जिला रिपोर्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। लिंबराज पन्हाळकर क्षेत्र की सभी प्रकार की प्रशासनिक और स्थानीय खबरों को कवर करते हैं, लेकिन मुख्य रूप से क्राइम (अपराध) से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग में उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता है।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
लिंबराज पन्हाळकर को मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में 20 वर्षों का एक लंबा और गहरा अनुभव है। दो दशकों से लातूर क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण स्थानीय मुद्दों, कानून-व्यवस्था और क्षेत्रीय गतिविधियों पर उनकी मजबूत पकड़ है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
बी.ए. जर्नलिज्म (B.A. in Journalism): उन्होंने पत्रकारिता विषय में स्नातक (Graduation) की डिग्री हासिल की है।
