कन्नौज में सरकारी शिक्षक राहुल कुमार राजपूत के अपहरण कर 10 लाख रुपये की फिरौती मांगने के मामले का पुलिस ने खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अधीक्षक कन्नौज विनोद कुमार के निर्देशन में अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत अपर पुलिस अधीक्षक अजय कुमार के निकट पर्यवेक्षण तथा क्षेत्राधिकारी सदर शिल्पा वर्मा के नेतृत्व में थाना तालग्राम, थाना कोतवाली कन्नौज, एसओजी और सर्विलांस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए गिरोह के तीन सदस्यों को दबोच लिया। आरोपियों के कब्जे से दो अवैध .315 बोर तमंचे, चार जिंदा कारतूस, एक मोबाइल फोन तथा घटना में प्रयुक्त स्विफ्ट डिजायर कार संख्या DL 2C AP 1080 बरामद की गई।

पुलिस के अनुसार 14 जुलाई 2026 को ग्राम कटरा बहसार थाना तिर्वा निवासी देशराज सिंह ने अपने 31 वर्षीय पुत्र एवं सरकारी शिक्षक राहुल कुमार राजपूत के स्कूल से वापस नहीं लौटने पर गुमशुदगी संख्या 30/2026 दर्ज कराई थी। इसके बाद 20 जुलाई 2026 को देशराज सिंह ने थाना तालग्राम में प्रार्थना पत्र देकर अविनाश राजपूत, सर्वेन्द्र कुमार कुशवाहा, केशव पंडित और सागर पर उनके पुत्र का अपहरण कर मारपीट करने तथा 10 लाख रुपये की फिरौती मांगने का आरोप लगाया। शिकायत के आधार पर गुमशुदगी को तरमीम करते हुए थाना तालग्राम में मुकदमा अपराध संख्या 102/2026 धारा 140(2), 115(2), 3(5) बीएनएस के तहत दर्ज किया गया और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमों का गठन किया गया।

जांच के दौरान 20 जुलाई 2026 को पुलिस ने गश्त और चेकिंग के दौरान मायापुरवा मोड़, बिरौली जंगल के पास से अविनाश राजपूत पुत्र स्वर्गीय हरिश्चन्द्र राजपूत निवासी ग्राम कटरा बहसार थाना तिर्वा, सर्वेन्द्र कुमार कुशवाहा पुत्र राकेश कुमार कुशवाहा निवासी ग्राम फगुआ लोहामढ़ थाना तिर्वा तथा केशव पंडित उर्फ केशव अवस्थी पुत्र राकेश अवस्थी निवासी अशोक नगर थाना तिर्वा को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के कब्जे से दो देशी तमंचे, चार जिंदा कारतूस, एक मोबाइल फोन तथा घटना में प्रयुक्त गोल्डन रंग की स्विफ्ट डिजायर कार बरामद हुई। कार को धारा 207 मोटर वाहन अधिनियम के तहत सीज कर दिया गया तथा बरामदगी के आधार पर मुकदमे में धारा 3/25 आयुध अधिनियम की भी बढ़ोतरी की गई।

पुलिस पूछताछ में सामने आया कि मुख्य आरोपी अविनाश राजपूत और अपहृत शिक्षक राहुल कुमार राजपूत आपस में मित्र थे। अविनाश नोएडा में एक फाइनेंस कंपनी चलाता था, लेकिन धोखाधड़ी के कारण उसे करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। पुलिस के अनुसार अन्य दुर्व्यसनों में भी उसका काफी पैसा खर्च हो गया, जिससे उस पर लगभग दो करोड़ रुपये का कर्ज हो गया। कर्ज चुकाने के लिए उसने अपनी जमीनें गिरवी रखीं, जिन पर ब्याज लगातार बढ़ रहा था और जमीन बंधक रखने वाले लोग बैनामा कराने का दबाव बना रहे थे। अविनाश राहुल की मानसिक स्थिति और उसके परिवार की आर्थिक स्थिति से परिचित था। उसने अपने साथियों सर्वेन्द्र कुमार कुशवाहा, केशव अवस्थी और सागर कश्यप के साथ मिलकर राहुल के अपहरण की योजना बनाई। आरोपियों का मानना था कि राहुल अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र है, उसके पिता प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त हैं, बहन भी अध्यापक है और परिवार आर्थिक रूप से सक्षम है, इसलिए फिरौती आसानी से मिल सकती है।

योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए अविनाश ने अपना एक प्लॉट दो लाख रुपये में गिरवी रखकर उससे प्राप्त धन से दिल्ली से एक सेकेंड हैंड कार खरीदी। इसके बाद वह सर्वेन्द्र के साथ कन्नौज पहुंचा और होटल में ठहरकर कई दिनों तक रेकी की। गर्मी के मौसम में दोपहर के समय स्कूल की छुट्टी के दौरान कम भीड़ होने का फायदा उठाते हुए सुजान सराय से आगे स्कूल से लौट रहे राहुल कुमार राजपूत को जबरन कार में बैठाकर अगवा कर लिया गया। सर्वेन्द्र और अविनाश राहुल को लेकर नोएडा चले गए, जबकि राहुल की मोटरसाइकिल सागर कश्यप लेकर चला गया और केशव अवस्थी अपनी बुलेट मोटरसाइकिल से वापस लौट आया।

नोएडा पहुंचने के बाद राहुल को किराये के कमरे में रखा गया और उसके साथ मारपीट की गई। सर्वेन्द्र राहुल का मोबाइल लेकर ट्रेन से शिकोहाबाद पहुंचा, जहां से उसने राहुल के घर पर 10 लाख रुपये की फिरौती मांगी। इसके बाद उसने मोबाइल फोन तोड़कर नाले में फेंक दिया और वापस नोएडा लौट गया। अगले दिन वह आनंद विहार, दिल्ली पहुंचा और वहां एक दुकानदार का मोबाइल लेकर फिर से राहुल के परिजनों से फिरौती मांगी। पुलिस ने फिरौती के लिए किए गए कॉल की लोकेशन ट्रैक की, जिससे जांच को महत्वपूर्ण सुराग मिले और पुलिस की कार्रवाई लगातार तेज होती गई।

पुलिस का दबाव बढ़ने पर अविनाश और सर्वेन्द्र ने राहुल को कार से दिल्ली के लालकुआं क्षेत्र में छोड़ दिया और फरार हो गए। वहां मौजूद लोगों ने 108 एम्बुलेंस बुलाकर राहुल को अस्पताल पहुंचाया। उपचार के बाद स्थानीय पुलिस और अस्पताल प्रशासन ने इसकी सूचना दी, जिसके बाद दिल्ली और आसपास आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस ने राहुल को सुरक्षित बरामद कर लिया। इसके बाद पूरे अपहरण कांड का खुलासा हुआ और आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास और तेज कर दिए गए।

इसी क्रम में 20 जुलाई 2026 को जीटी रोड तेराजाकेट से तालग्राम जाने वाले मार्ग पर मायापुरवा के निकट संयुक्त पुलिस टीम ने घेराबंदी कर तीनों आरोपियों को अवैध हथियारों और घटना में प्रयुक्त कार सहित गिरफ्तार कर लिया। मामले में अपहरण, फिरौती, मारपीट और आर्म्स एक्ट की धाराओं में अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है, जबकि फरार आरोपी सागर की तलाश जारी है। इस कार्रवाई को थाना कोतवाली कन्नौज, थाना तालग्राम, एसओजी और सर्विलांस की संयुक्त टीम ने अंजाम दिया।

Pratahkal Bureau

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