जगदलपुर (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ के इतिहास के सबसे वीभत्स और बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमला मामले में 13 वर्षों के बाद शनिवार को अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया। जगदलपुर स्थित विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी अदालत ने मामले में सुनवाई का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। हालांकि, दोषियों को कितनी सजा दी जाएगी, इसका आदेश अदालत द्वारा विस्तृत फैसला जारी होने के बाद किया जाएगा।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी अदालत ने जिन 10 आरोपियों को दोषी ठहराया है, उनमें प्रमिला मोडियम, चैतू लेकाम उर्फ मुन्ना, सुमित्रा उर्फ सुमित्रा पुनेम मोडियम, मुक्का मंडवी, कोसा कवासी उर्फ कोसाराम, आयाता मरकाम, मड़कमि देवा, जोगा मड़कमि, बंजामी सन्ना उर्फ चमरू उर्फ देंगा और महादेव नाग शामिल हैं। इन आरोपियों पर आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास), 396 (डकैती के दौरान हत्या), 121 (देश के खिलाफ युद्ध छेड़ना), 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के अलावा आर्म्स एक्ट, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और यूएपीए की बेहद गंभीर धाराएं लगाई गई थीं। दोनों पक्षों की अंतिम बहस पूरी होने के बाद विशेष अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। पहले यह फैसला 31 अगस्त को सुनाया जाना तय हुआ था, जिसे बाद में बढ़ाकर 5 सितंबर कर दिया गया था।

सभी 10 आरोपियों के दोषी करार दिए जाने के बाद अब अदालत के सजा संबंधी आदेश पर निगाहें टिकी हैं। विधिक विशेषज्ञों का मानना है कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोषियों को सख्त से सख्त सजा सुनाई जा सकती है।

गौरतलब है कि 25 मई 2013 को बस्तर जिले के दरभा क्षेत्र स्थित झीरम घाटी में नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ कांग्रेस की 'परिवर्तन यात्रा' के काफिले को निशाना बनाया था। यह यात्रा सुकमा से जगदलपुर की ओर लौट रही थी। इसी दौरान घात लगाकर बैठे सैकड़ों नक्सलियों ने काफिले को चारों तरफ से घेर लिया और बारूदी सुरंग (आईईडी) में विस्फोट करने के साथ ही अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी थी।

इस बर्बर हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके पुत्र दिनेश पटेल, 'सलवा जुडूम' के संस्थापक व वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और विधायक उदय मुदलियार समेत कई शीर्ष नेताओं व सुरक्षाकर्मियों की निर्मम हत्या कर दी गई थी। न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार, इस पूरे नरसंहार में 27 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 38 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।

घटना की वीभत्सता को देखते हुए प्रारंभिक जांच के बाद पूरे मामले की बागडोर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपी गई थी। एनआईए ने गहन जांच के उपरांत 25 सितंबर 2014 को विशेष अदालत में आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल किया था। एनआईए ने प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) के विभिन्न कैडर और सैन्य इकाइयों की इसमें मुख्य भूमिका बताई थी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए और डिजिटल व वैज्ञानिक साक्ष्य कोर्ट के सामने रखे। 13 वर्षों बाद आए इस फैसले के साथ झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में दोषसिद्धि का अहम चरण पूरा हुआ है, जबकि अब दोषियों की सजा पर अदालत के विस्तृत आदेश का इंतजार है।

Pratahkal Bureau

Pratahkal Bureau

प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story