मोंठ (झांसी)। डिजिटल इंडिया के इस दौर में साइबर अपराधी लगातार मासूम लोगों को अपनी ठगी का शिकार बना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिसिया तंत्र की सुस्ती पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रही है। ऐसा ही एक झकझोर देने वाला मामला झांसी जनपद के मोंठ थाना क्षेत्र से सामने आया है, जहां साइबर अपराधियों ने एक युवक के बैंक खाते में सेंध लगाकर जीवनभर की गाढ़ी कमाई पार कर दी। पीड़ित युवक अब न्याय पाने के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है और स्थानीय पुलिस से निराश होकर उसने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) की चौखट पर न्याय की गुहार लगाई है।प्राप्त विवरण के अनुसार, मोंठ थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम बम्हरौली के निवासी श्यामू गुप्ता पुत्र मुन्नालाल अचानक शातिर साइबर ठगों के जाल में फंस गए। पीड़ित श्यामू गुप्ता के मुताबिक, बीते पांच अप्रैल को उनके बैंक खाते से उनकी बिना किसी जानकारी, सहमति या ओटीपी साझा किए बिना ही अचानक एक लाख 18 हजार दो रुपये ($1,18,002$) गायब हो गए। मोबाइल पर धनराशि कटने का मैसेज देखकर पीड़ित के पैरों तले जमीन खिसक गई। आनन-फानन में मामले की लिखित शिकायत लेकर पीड़ित मोंठ थाना पुलिस के पास पहुंचा, लेकिन पीड़ित का आरोप है कि घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी स्थानीय पुलिस ने मामले में कोई ठोस या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की।न्याय के लिए थानों के चक्कर काट-काट कर थक चुके पीड़ित श्यामू गुप्ता ने बताया कि शिकायत दर्ज कराने के बाद से वह लगातार मोंठ थाने की परिक्रमा कर रहे हैं, लेकिन वहां मौजूद अधिकारियों द्वारा उनकी फरियाद को लगातार अनसुना किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर सुनवाई न होने और पुलिसिया उदासीनता से बुरी तरह परेशान होकर अंततः पीड़ित ने झांसी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कार्यालय का रुख किया। पीड़ित ने एसएसपी को एक शिकायती पत्र सौंपकर पूरे मामले से अवगत कराया है और अपने डूबे हुए पैसे वापस दिलाने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त विधिक कार्रवाई करने की मांग की है।दूसरी तरफ, इस पूरे मामले पर मोंठ थाने में तैनात उपनिरीक्षक (एसआई) रजनीकांत सिंह ने पुलिस का पक्ष रखते हुए बताया कि जैसे ही श्यामू गुप्ता ने शिकायत दर्ज कराई थी, पुलिस ने तत्काल सक्रियता दिखाते हुए उनकी शिकायत को राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर दर्ज करा दिया था। पुलिस इस मामले की गहनता से जांच कर रही है और संबंधित बैंक प्रबंधन से भी खाते के लेन-देन (ट्रांजैक्शन) के संबंध में आधिकारिक जानकारी मांगी गई है। हालांकि, उपनिरीक्षक ने मामले में एक तकनीकी पेच का खुलासा करते हुए बताया कि पीड़ित के साथ किस प्रकृति और किस मॉड्यूल के तहत साइबर फ्रॉड को अंजाम दिया गया, इसकी पूरी तकनीकी जानकारी हासिल करने में बाधा आ रही है; क्योंकि जब पीड़ित श्यामू गुप्ता थाने में शिकायत दर्ज कराने आया था, तब तक उसका मोबाइल फोन पूरी तरह से फॉर्मेट हो चुका था, जिससे महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य नष्ट हो गए।यह घटना दर्शाती है कि साइबर अपराधियों के हौसले किस कदर बुलंद हैं और तकनीकी अज्ञानता के कारण साक्ष्य मिट जाने से पुलिसिया तफ्तीश की राह भी कितनी कठिन हो जाती है। अब देखना यह होगा कि एसएसपी के हस्तक्षेप के बाद क्या झांसी पुलिस इस ठगी का पर्दाफाश कर पीड़ित श्यामू गुप्ता को उसका हक दिला पाती है या नहीं।

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Pratahkal HQ

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