शेरगंज स्थित श्री अजीतनाथ जिनालय रविवार सुबह उस समय धर्ममय हो उठा, जब परम पूज्य वैज्ञानिक संत आचार्य श्री 108 निर्भय सागर जी महाराज के परम प्रभावक तीन शिष्यों—मुनि श्री 108 सुदत्त सागर जी महाराज, नगर जलेसर गौरव मुनि श्री 108 पदमदत्त सागर जी महाराज तथा मुनि श्री 108 भूदत्त सागर जी महाराज का अपनी जन्मभूमि पर भव्य मंगल प्रवेश हुआ। मुनिराजों के नगर आगमन पर जैन समाज और स्थानीय श्रद्धालुओं ने गाजे-बाजे, जयकारों और श्रद्धाभाव के साथ उनका स्वागत किया। पूरे नगर में धार्मिक उल्लास और भक्ति का वातावरण दिखाई दिया।

मंगल प्रवेश के उपरांत मुनि श्री के पावन सानिध्य में सर्वप्रथम श्री जी का अभिषेक एवं शांतिधारा पूजन विधि-विधान से संपन्न कराया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने मुनिराजों के पाद प्रक्षालन कर उन्हें शास्त्र भेंट किए। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हुए।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री ने आत्म-कल्याण और आत्म-अवलोकन का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि इस संसार में सबसे सुंदर वस्तु ‘आत्म-तत्व’ है और मनुष्य को निरंतर उसी की आराधना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अब तक मनुष्य केवल बाहरी और पराई वस्तुओं का ही अवलोकन करता आया है तथा उसका अधिकांश समय पर-वस्तु के चिंतन में व्यतीत हुआ है, जबकि वे वस्तुएं मोक्ष मार्ग में कभी साधक सिद्ध नहीं हुईं। मनुष्य निरंतर शुभ-अशुभ कर्मों का आश्रव करता हुआ उसके फल भोग रहा है। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति का चरम लक्ष्य यह होना चाहिए कि वह पर-अवलोकन के साथ आत्म-अवलोकन भी करे।

मुनि श्री ने जीवन में संस्कारों की आवश्यकता पर विशेष बल देते हुए कहा कि संस्कारों से संस्कारित होना ही मनुष्य पर्याय का परम गुण है। अच्छे संस्कार किसी भी साधारण जीवन को महान और वंदनीय बनाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति का संकल्प होना चाहिए कि वह श्रेष्ठ संस्कारों के माध्यम से स्वयं के साथ-साथ दूसरों को भी सद्भावना की राह दिखाए। आत्म-कल्याण के मार्ग पर चलने, अपने अंश, वंश, धर्म और देश के हित के लिए संस्कारवान होना अत्यंत आवश्यक है। जब तक जीवन में उत्तम संस्कार नहीं होंगे, तब तक धर्म और राष्ट्र का उत्थान संभव नहीं है।

चातुर्मास और धार्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में जैन समाज के प्रबुद्ध जनों और श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस अवसर पर मुख्य रूप से शरद जैन, महेंद्र जैन, नरेंद्र जैन, महेश जैन, कैलाश चंद जैन, विदीत जैन, विवेक जैन, टिंकल जैन, गोलू जैन, पदम चंद जैन, प्रशांत जैन, सतीश चंद जैन, अशोक जैन और गुंजन जैन सहित बड़ी संख्या में महिला-पुरुष एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। मुनिराजों के ऐतिहासिक मंगल प्रवेश ने पूरे जलेसर नगर को आध्यात्मिक ऊर्जा और धार्मिक आस्था से सराबोर कर दिया।

Pratahkal Bureau

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