क्या कड़े आईएमईआई नियमों से डिजिटल फ्रॉड पर लगेगा अंकुश? उल्लंघन पर जेल
भारत में आईएमईआई से छेड़छाड़ पर टेलीकम्युनिकेशन एक्ट के तहत कड़े प्रावधान लागू हैं। तीन साल तक की कैद और 50 लाख रुपये तक जुर्माने के बीच जानिए नए नियम डिजिटल फ्रॉड पर कैसे असर डाल सकते हैं।

तस्वीर में ओ.पी. पाल, लेखक एवं स्वतंत्र पत्रकार, नजर आ रहे हैं।
भारत में तेजी से बढ़ते डिजिटल बदलाव के बीच दूरसंचार उपकरणों, खासतौर पर मोबाइल फोन, का इस्तेमाल रोजमर्रा की जिंदगी, व्यापार और शासन व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। मोबाइल नेटवर्क और उपकरण डिजिटल भुगतान, ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन वित्तीय सेवाओं और नागरिक केंद्रित विभिन्न डिजिटल पहलों को सीधे समर्थन दे रहे हैं। तकनीक पर निर्भरता बढ़ने के साथ दूरसंचार नेटवर्क और उपकरणों की सुरक्षा व अखंडता बनाए रखना भी बड़ी चुनौती बन गया है। इसी बीच साइबर अपराध और डिजिटल फ्रॉड का दायरा बढ़ा है।
भारतीय नागरिकों के लिए भारत सरकार का संचार साथी प्लेटफॉर्म सुरक्षा कवच के रूप में काम कर रहा है, लेकिन डिजिटल फ्रॉड की चुनौती बनी हुई है। इसी चुनौती से निपटने की दिशा में भारत सरकार ने टेलीकम्युनिकेशन एक्ट के तहत दूरसंचार उपकरणों, मोबाइल हैंडसेट और अन्य दूरसंचार उपकरणों के आईएमईआई नंबर से छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ नियमों को सख्त किया है और कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। ऐसे में सवाल है कि क्या इन सख्त नियमों और प्रावधानों से देश में डिजिटल फ्रॉड पर अंकुश लग सकेगा।
ओ.पी. पाल, लेखक एवं स्वतंत्र पत्रकार, के अनुसार भारत की दूरसंचार यात्रा तकनीकी प्रगति और सामूहिक जिम्मेदारी का संगम है। दूरसंचार विभाग के जुलाई के आंकड़ों के मुताबिक देश में सक्रिय वायरलेस मोबाइल सब्सक्राइबरों की संख्या 1,204.01 मिलियन को पार कर चुकी थी। यह संख्या भारत के जुड़े हुए डिजिटल इकोसिस्टम के व्यापक दायरे को दर्शाती है।
देश में लागू कानूनी प्रावधान, संचार साथी और डिवाइस सेतु जैसे सरकारी वेरिफिकेशन टूल्स तथा नागरिकों में बढ़ती तकनीकी जागरूकता मिलकर डिजिटल नेटवर्क को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने में भूमिका निभाते हैं। डिजिटल भरोसे को बनाए रखने में सरकार, उद्योग जगत और आम यूजर्स की महत्वपूर्ण भूमिका है। जागरूक और सतर्क नागरिक डिजिटल फ्रॉड तथा तकनीकी छेड़छाड़ के खिलाफ महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच साबित हो सकता है। सरकार और समाज के आपसी सहयोग से आने वाली पीढ़ियों के लिए भारत की डिजिटल कनेक्टिविटी को सुरक्षित, संप्रभु और मजबूत बनाए रखने की जिम्मेदारी सामने आती है।
देश में डिजिटल विस्तार के साथ सुरक्षा से जुड़ी नई और जटिल चुनौतियां भी सामने आई हैं। इनमें इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी यानी आईएमईआई नंबर के गलत इस्तेमाल या उससे छेड़छाड़ की समस्या गंभीर है। आईएमईआई में अनधिकृत बदलाव से बदली हुई पहचान वाले उपकरणों का इस्तेमाल आसान हो जाता है और दूरसंचार नेटवर्क पर किसी डिवाइस की वास्तविक पहचान करना कठिन हो सकता है। इससे कानून लागू करने वाली एजेंसियों, उपभोक्ता सुरक्षा और राष्ट्रीय नेटवर्क सुरक्षा के सामने चुनौती पैदा होती है। ऐसे में सुरक्षित और भरोसेमंद दूरसंचार इकोसिस्टम के लिए डिवाइस आइडेंटिफायर की अखंडता बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
आईएमईआई 15 अंकों की विशिष्ट संख्या होती है, जो दुनिया भर के दूरसंचार नेटवर्क पर किसी मोबाइल डिवाइस की अनूठी पहचान करती है। इसके शुरुआती आठ अंक टाइप एलोकेशन कोड यानी टीएसी होते हैं, जो डिवाइस के मॉडल या उसके विशेष प्रकार की पहचान करते हैं। ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्युनिकेशंस एसोसिएशन यानी जीएसएमए टीएसी के वैश्विक आवंटन की देखरेख करता है। जीएसएमए निर्माताओं और ब्रांड मालिकों को टीएसी जारी करता है, जिसके बाद विनिर्माता प्रत्येक डिवाइस को अलग और विशिष्ट आईएमईआई नंबर आवंटित करते हैं। डुअल-सिम फोन में आमतौर पर दो अलग-अलग आईएमईआई नंबर होते हैं, यानी प्रत्येक सिम स्लॉट के लिए एक विशिष्ट पहचान संख्या होती है।
भारत में बनने वाले सभी संबंधित दूरसंचार उपकरणों के आईएमईआई नंबरों को पहली बार बाजार में बेचने, उनकी टेस्टिंग, रिसर्च एंड डेवलपमेंट यानी आरएंडडी या किसी अन्य उपयोग से पहले सरकार के पास पंजीकृत कराना अनिवार्य है। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर मोबाइल डिवाइस इक्विपमेंट आइडेंटिफिकेशन नंबर यानी आईएमईआई को हटाता, मिटाता या उसमें बदलाव करने का प्रयास करता है, तो इसे गंभीर अपराध माना जाएगा।
इसी तरह ऐसे हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर का जानबूझकर इस्तेमाल, निर्माण, तस्करी या उस पर नियंत्रण रखना भी गंभीर अपराध माना जाएगा, जिसके बारे में संबंधित व्यक्ति को पता हो कि उसका इस्तेमाल आईएमईआई से छेड़छाड़ के लिए किया जाएगा। छेड़छाड़ किए गए या कॉन्फिगर किए जा सकने वाले आईएमईआई वाले उपकरणों को बेचना या उनका व्यापार करना भी गंभीर कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है।
भारत सरकार ने दूरसंचार इकोसिस्टम की सुरक्षा, अखंडता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए टेलीकम्युनिकेशन एक्ट, 2023 के तहत कड़े कानूनी प्रावधान किए हैं। अधिनियम की धारा 42(3)(सी) किसी भी रूप में टेलीकम्युनिकेशन आइडेंटिफायर्स के साथ छेड़छाड़ पर रोक लगाती है। वहीं धारा 42(3)(ई) धोखाधड़ी, जालसाजी या किसी अन्य व्यक्ति का रूप धरकर सब्सक्राइबर आइडेंटिटी मॉड्यूल यानी सिम या टेलीकम्युनिकेशन आइडेंटिफायर्स हासिल करने पर प्रतिबंध लगाती है।
इन प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले दोषियों को तीन साल तक की कैद, 50 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजाएं एक साथ दी जा सकती हैं। एक्ट की धारा 42(7) के तहत इस श्रेणी के सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती घोषित किए गए हैं। धारा 42(6) के तहत ऐसे गंभीर अपराधों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से करने में मदद, समर्थन या बढ़ावा देने वाले लोगों को भी मुख्य अपराधियों की तरह समान रूप से दंडित किया जाएगा।
दूरसंचार उपकरणों की सुरक्षा में आयातकों, निर्माताओं और ब्रांड मालिकों की भी जिम्मेदारी तय की गई है। भारत में संबंधित दूरसंचार उपकरणों का आयात करने से पहले आयातकों को केंद्र सरकार के पास उनके आईएमईआई नंबर पंजीकृत कराने होंगे। बिक्री, टेस्टिंग या आरएंडडी के लिए लाए जाने वाले उपकरणों का पंजीकरण भी डिवाइस सेतु–आईसीडीआर पोर्टल के जरिए पूरा करना आवश्यक है।
आयातकों को यह सत्यापित करना होगा कि आयातित उपकरणों पर केवल वैध और अधिकृत आईएमईआई नंबर मौजूद हों। निर्माताओं को सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक डिवाइस को सही, विशिष्ट और छेड़छाड़-मुक्त आईएमईआई नंबर ही आवंटित किया जाए। ब्रांड मालिकों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनके ब्रांड नाम के तहत बेचे जाने वाले सभी उपकरण आईएमईआई पंजीकरण और साइबर सुरक्षा से जुड़ी नवीनतम अनिवार्य शर्तों को पूरी तरह पूरा करते हों।
आईएमईआई से जुड़ी पहचान की सुरक्षा केवल तकनीकी व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि दूरसंचार नेटवर्क, उपभोक्ता सुरक्षा और डिजिटल सेवाओं की विश्वसनीयता से भी जुड़ी है। सख्त कानूनी प्रावधानों, उपकरण पंजीकरण और सत्यापन व्यवस्था तथा सभी हितधारकों की जवाबदेही के जरिए दूरसंचार संसाधनों के दुरुपयोग और आईएमईआई से छेड़छाड़ को रोकने की दिशा में व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।

Om Prakash Pal
नाम: ओम प्रकाश पाल
वर्तमान पद: स्वतंत्र पत्रकार, लेखक एवं स्तंभकार
कार्यक्षेत्र: नेशनल ब्यूरो (राष्ट्रीय स्तर)
बीट (मुख्य विषय): राजनीति, संसद, केंद्रीय मंत्रालय, कृषि, साहित्य, खेल एवं प्रशासन (बिजनेस को छोड़कर सभी विषयों पर कार्य)
पत्रकारिता अनुभव: लगभग 39 वर्ष
परिचय एवं अनुभव
ओम प्रकाश पाल पिछले 39 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर नेशनल ब्यूरो में विशेष संवाददाता के रूप में लगभग 20 वर्षों तक संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) की रिपोर्टिंग की है।
एक मान्यता प्राप्त पत्रकार के रूप में उन्होंने केंद्रीय गृह, रक्षा, रेलवे, सड़क परिवहन, श्रम एवं रोजगार, जलशक्ति और कृषि जैसे प्रमुख केंद्रीय मंत्रालयों को कवर किया है।
विभिन्न समाचार पत्रों में योगदान:
- अमर उजाला एवं दैनिक जागरण: पत्रकारिता के शुरुआती वर्षों का अनुभव।
- शाह टाइम्स: न्यूज़ एडिटर (News Editor) के पद पर सेवाएं।
- हरिभूमि (दिल्ली): वरिष्ठ संवाददाता के रूप में कार्य।
राजनीति विज्ञान और कृषि विषयों के जानकार होने के साथ-साथ उन्होंने साहित्य और खेल के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्य किया है। वर्तमान में वह एक स्वतंत्र पत्रकार, लेखक और स्तंभकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता
- स्नातक (Graduate)
- B.Ed (बैचलर ऑफ एजुकेशन)
- पत्रकारिता में डिप्लोमा (Diploma in Journalism)
- साहित्य रत्न
- कृषि विशारद
