हापुड़ (उत्तर प्रदेश)। जनपद हापुड़ के पिलखुवा क्षेत्र में रविवार को निकाली गई श्रीराम बारात में भगवान के स्वरूपों द्वारा किए गए नृत्य को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कथित अशोभनीय प्रस्तुति से नाराज विश्व हिंदू परिषद (विहिप), बजरंग दल और हिंदू जागरण मंच समेत अन्य हिंदू संगठनों के पदाधिकारियों ने क्षेत्राधिकारी (सीओ) मुनीश चंद्र से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

हिंदू संगठनों का आरोप है कि श्रीराम बारात के दौरान भगवान के स्वरूपों ने अशोभनीय नृत्य किया, जो धार्मिक परंपराओं और मर्यादाओं के विरुद्ध है। संगठनों ने इस प्रस्तुति पर कड़ी नाराजगी जताते हुए प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेने की मांग की है।

बैठक में पहले ही जताई गई थी आपत्ति

हिंदू संगठनों के पदाधिकारियों के अनुसार, इस विवाद को लेकर पहले ही आयोजन कमेटी को सचेत किया गया था। श्रीराम बारात निकलने से एक दिन पहले कमेटी के साथ हुई बैठक में संगठनों ने अपनी आपत्ति स्पष्ट रूप से रखी थी। उन्होंने कहा था कि झांकियों में देवी-देवताओं के स्वरूपों को शामिल करते समय और उनसे नृत्य कराने के दौरान धार्मिक मर्यादाओं का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।

पदाधिकारियों ने आयोजन कमेटी से ऐसी प्रस्तुति सुनिश्चित करने की मांग की थी, जिससे श्रद्धालुओं की आस्था और धार्मिक भावनाएं आहत न हों। इसके बावजूद बारात के दौरान कथित रूप से मर्यादाओं का उल्लंघन होने पर संगठनों ने प्रशासन का दरवाजा खटखटाया और जांच की मांग उठाई।

धार्मिक आयोजन मनोरंजन का माध्यम नहीं

हिंदू संगठनों ने स्पष्ट किया कि उनकी आपत्ति श्रीराम बारात निकालने की परंपरा को लेकर नहीं, बल्कि उसमें शामिल धार्मिक स्वरूपों की कथित अशोभनीय प्रस्तुति को लेकर है। उनका कहना है कि श्रीराम बारात जैसे पावन धार्मिक आयोजन केवल मनोरंजन का जरिया नहीं हैं, बल्कि श्रद्धालुओं की अगाध आस्था और सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं।

संगठनों के मुताबिक, ऐसे आयोजनों में देवी-देवताओं के स्वरूपों की प्रस्तुति के दौरान श्रद्धा और सम्मान का भाव बनाए रखना आवश्यक है। धार्मिक कार्यक्रमों में परंपराओं और मर्यादाओं का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि किसी की धार्मिक भावनाएं आहत न हों।

हिंदू जागरण मंच ने की कार्रवाई और स्पष्ट व्यवस्था की मांग

इस मामले पर हिंदू जागरण मंच के जिला अध्यक्ष पवन तोमर ने कहा कि धार्मिक आयोजनों में मर्यादा और परंपराओं का पालन अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए। देवी-देवताओं के स्वरूपों की प्रस्तुति में विशेष सावधानी बरतना जरूरी है, क्योंकि इनसे बड़ी संख्या में लोगों की भावनाएं जुड़ी होती हैं।

पवन तोमर ने संबंधित प्रकरण की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग दोहराई। साथ ही, उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी विवादास्पद स्थितियां उत्पन्न न हों, इसके लिए आयोजन कमेटियों को पहले से ही धार्मिक मर्यादाओं के पालन के संबंध में स्पष्ट और ठोस व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।

फिलहाल, हिंदू संगठनों ने सीओ मुनीश चंद्र को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच और आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। इस प्रकरण में संगठनों की प्रमुख मांग धार्मिक आयोजनों की गरिमा बनाए रखने और भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित करने की है।

Sunil Giri

Sunil Giri

नाम: सुनील गिरि

वर्तमान पद: जिला संवाददाता

कार्यक्षेत्र: हापुड़ (उत्तर प्रदेश)

बीट (मुख्य विषय): क्राइम, राजनीति एवं जिला स्तर की सभी बीट

विशेषज्ञता: राजनीतिक विश्लेषण, अपराध संबंधी कवरेज और जिला स्तरीय रिपोर्टिंग

परिचय 

सुनील गिरि उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह हापुड़ से जिला संवाददाता के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सुनील गिरि मुख्य रूप से राजनीति और क्राइम (अपराध) से जुड़ी खबरों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। राजनीतिक विषयों पर सटीक विश्लेषण करने के साथ-साथ वह जिले की हर छोटी-बड़ी गतिविधि और जनसरोकार के सभी मुद्दों को नियमित रूप से कवर करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव

सुनील गिरि को टीवी, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में 2002 से (20 से अधिक वर्षों का) लंबा और व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह निम्नलिखित प्रमुख मीडिया संस्थानों व न्यूज़ चैनलों के साथ जुड़कर अपनी सेवाएं दे रहे हैं:

  • पंजाब केसरी टीवी
  • इंडिया डेली 24×7 न्यूज़ चैनल
  • MH1 न्यूज़ चैनल
  • रॉयल न्यूज़ (वेबसाइट)
  • इंडिया पब्लिक खबर (वेबसाइट)

शैक्षणिक योग्यता

उन्होंने अपनी शिक्षा 12वीं (12th Pass) तक पूरी की है। दो दशकों से अधिक समय से हापुड़ जिले में लगातार सक्रिय रहने के कारण क्षेत्र की सामाजिक, प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव बहुत गहरा है।

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