हापुड़ में एमएलसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र मेरठ मंडल की मतदाता सूची में कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। समाजवादी पार्टी के हापुड़ जिलाध्यक्ष एडवोकेट आनन्द गुर्जर (बबलू प्रधान) ने जिला निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रत्याशियों और नेताओं पर गैर-स्नातक लोगों के फर्जी दस्तावेज तैयार कराकर उन्हें मतदाता सूची में शामिल कराने का आरोप लगाया है। सपा ने मामले में तत्काल जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

ज्ञापन के अनुसार, 30 सितंबर 2026 और 1 अक्टूबर 2026 को विभिन्न जनपदों में भाजपा के संभावित और वर्तमान प्रत्याशियों द्वारा कथित तौर पर छल-कपट और धोखाधड़ी से स्नातक अंतिम वर्ष की फर्जी मार्कशीट और फर्जी आधार कार्ड तैयार कराए गए। सपा जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि थोक में अवैध तरीके से वोट बनवाने की इस प्रक्रिया का भाजपा नेताओं ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर प्रचार-प्रसार भी किया। उनके अनुसार, इस संबंध में वीडियो और फोटो साक्ष्य के रूप में मौजूद हैं।

आनन्द गुर्जर ने ज्ञापन में विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से छात्रों का डेटा उनकी सहमति और हस्ताक्षर के बिना निकाले जाने का भी आरोप लगाया है। सपा का दावा है कि इसके बाद डेटाबेस में हेरफेर कर छात्रों के आधार कार्ड के स्थान पर फर्जी मार्कशीट का इस्तेमाल किया गया, ताकि गैर-स्नातक लोगों को भी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल कराया जा सके।

ज्ञापन में इस कथित फर्जीवाड़े के संबंध में गाजियाबाद, हापुड़, मेरठ, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर जनपदों का प्रमुखता से उल्लेख किया गया है। सपा जिलाध्यक्ष के अनुसार, इन जिलों में बड़े पैमाने पर यह गैर-कानूनी गतिविधि संचालित की जा रही है। पार्टी ने आरोपों को निर्वाचन प्रक्रिया की शुचिता से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप करने की मांग की है।

सपा जिलाध्यक्ष आनन्द गुर्जर ने ज्ञापन में इस कथित कृत्य को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 418, 419, 420, 467, 468, 120 B और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 318(3), 318(2), 336(3), 338, 340, 61(2) के तहत गंभीर और दंडनीय अपराध बताया है। साथ ही उन्होंने इसे लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 30 का खुला उल्लंघन करार दिया है। इन धाराओं का उल्लेख करते हुए पार्टी ने मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

ज्ञापन के माध्यम से जिला निर्वाचन अधिकारी से अपील की गई है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने के लिए फर्जी आधार कार्ड के इस्तेमाल और फर्जी मतदान पर तत्काल रोक लगाई जाए। सपा ने इस कथित अपराध में शामिल दोषियों के खिलाफ तुरंत मुकदमा दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही आम जनता को जागरूक करने की अपील की गई है, ताकि लोग किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े का हिस्सा न बनें। ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि ऐसी गतिविधियों में शामिल पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

10 अक्टूबर 2026 को जारी मतदाता सूची का अवलोकन करने के बाद यह ज्ञापन 17 अक्टूबर 2026 को जिला निर्वाचन अधिकारी, मुख्य निर्वाचन आयुक्त (नई दिल्ली) और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (उत्तर प्रदेश) को संबोधित करते हुए सौंपा गया। अब सपा ने निर्वाचन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर रोक लगाने, मतदाता सूची की शुचिता बनाए रखने और आरोपों में नामित पक्षों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग उठाई है।

Sunil Giri

Sunil Giri

नाम: सुनील गिरि

वर्तमान पद: जिला संवाददाता

कार्यक्षेत्र: हापुड़ (उत्तर प्रदेश)

बीट (मुख्य विषय): क्राइम, राजनीति एवं जिला स्तर की सभी बीट

विशेषज्ञता: राजनीतिक विश्लेषण, अपराध संबंधी कवरेज और जिला स्तरीय रिपोर्टिंग

परिचय 

सुनील गिरि उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह हापुड़ से जिला संवाददाता के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सुनील गिरि मुख्य रूप से राजनीति और क्राइम (अपराध) से जुड़ी खबरों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। राजनीतिक विषयों पर सटीक विश्लेषण करने के साथ-साथ वह जिले की हर छोटी-बड़ी गतिविधि और जनसरोकार के सभी मुद्दों को नियमित रूप से कवर करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव

सुनील गिरि को टीवी, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में 2002 से (20 से अधिक वर्षों का) लंबा और व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह निम्नलिखित प्रमुख मीडिया संस्थानों व न्यूज़ चैनलों के साथ जुड़कर अपनी सेवाएं दे रहे हैं:

  • पंजाब केसरी टीवी
  • इंडिया डेली 24×7 न्यूज़ चैनल
  • MH1 न्यूज़ चैनल
  • रॉयल न्यूज़ (वेबसाइट)
  • इंडिया पब्लिक खबर (वेबसाइट)

शैक्षणिक योग्यता

उन्होंने अपनी शिक्षा 12वीं (12th Pass) तक पूरी की है। दो दशकों से अधिक समय से हापुड़ जिले में लगातार सक्रिय रहने के कारण क्षेत्र की सामाजिक, प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव बहुत गहरा है।

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