हापुड़: यूट्यूब पर ड्राई फ्रूट्स का विज्ञापन देख पूर्व एयरफोर्स अफसर से ₹84 हजार की ठगी
₹1080 के काजू-बादाम का ऑर्डर न पहुंचने पर रिफंड और जीएसटी के नाम पर ठगों ने मर्चेंट पे कोड के जरिए 5-6 बार में रकम उड़ाई।

तस्वीर में दिख रहे चश्मा और सूट पहने व्यक्ति सेवानिवृत्त एयरफोर्स फ्लाइंग ऑफिसर नरेंद्र कुमार गोस्वामी।
हापुड़ में साइबर ठगों ने यूट्यूब पर ड्राई फ्रूट्स के विज्ञापन के जरिए एक सेवानिवृत्त एयरफोर्स फ्लाइंग ऑफिसर को साइबर ठगी का शिकार बना लिया। ₹1080 के काजू, बादाम और किशमिश का ऑर्डर करने वाले नरेंद्र कुमार गोस्वामी से रिफंड और जीएसटी की समस्या दूर करने के नाम पर ठगों ने 5 से 6 बार में कुल ₹84,325 की रकम पार कर दी। पीड़ित ने मामले की शिकायत साइबर सेल के 1930 नंबर और एसबीआई हेल्पलाइन पर दर्ज कराई है।
थाना हापुड़ देहात के कृष्णा नगर निवासी नरेंद्र कुमार गोस्वामी, जो एयरफोर्स में रिटायर्ड फ्लाइंग ऑफिसर हैं, ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 29 जून 2026 को उन्होंने यूट्यूब पर ‘श्रीराम ड्राईफ्रूट’ नाम का विज्ञापन देखा था। विज्ञापन देखकर उन्होंने काजू, बादाम और किशमिश का ऑर्डर किया और भीम पे (BHIM Pay) ऐप के जरिए ₹1080 का ऑनलाइन भुगतान कर दिया।
ऑर्डर करने के बाद जब सामान उनके पास नहीं पहुंचा तो उन्होंने दोबारा वही विज्ञापन देखा और उसमें दिए गए नंबर पर संपर्क किया। फोन उठाने वाले व्यक्ति ने अपना नाम राजेश दीवान बताया। उसने कहा कि जीएसटी (GST) की कुछ समस्या के कारण ऑर्डर कैंसिल करना पड़ेगा। साथ ही उसने भरोसा दिलाया कि ₹1080 की रकम उनके खाते में रिफंड कर दी जाएगी और सामान कैश ऑन डिलीवरी (COD) के माध्यम से भेजा जाएगा।
इसके बाद ठग ने पीड़ित को फोनपे (PhonePe) पर मर्चेंट पेमेंट की प्रक्रिया बताई। उसने एक कोड भेजकर मैसेज पर ‘11’ लिखकर सेंड करने को कहा। जैसे ही नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने ऐसा किया, उनके खाते में ₹1 जमा हुआ। इससे उन्हें रिफंड की प्रक्रिया सही होने का भरोसा हो गया।
इसके बाद ठग ने कहा कि ₹1080 वापस पाने के लिए इस रकम के आगे ‘1’ लगाना होगा और ₹10,801 भरकर पे करना होगा। पीड़ित ने बताए गए कोड के अनुसार प्रक्रिया पूरी की, लेकिन उनके खाते में रकम आने के बजाय ₹10,801 कट गए।
जब पीड़ित ने रकम कटने की बात कही तो ठग ने कहा कि वह जल्दी प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं और सर्वर एरर की वजह से पैसा अटक गया है। रकम वापस पाने के चक्कर में पीड़ित ठग के बताए नए-नए कोड पर लगातार ट्रांजेक्शन करते रहे। इस तरह 5 से 6 बार में उनके खाते से कुल ₹84,325 की रकम उड़ा ली गई।
जब खाता खाली होने लगा तो ठग ने तकनीकी समस्या का बहाना बनाते हुए पीड़ित से कहा कि अपना अकाउंट नंबर दे दें, अगले दिन पैसे वापस आ जाएंगे। इसके बाद नरेंद्र कुमार गोस्वामी को ठगी का अहसास हुआ।
धोखाधड़ी का पता चलने के बाद पीड़ित ने तुरंत साइबर सेल के 1930 नंबर और एसबीआई (SBI) हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। हापुड़ देहात थाना प्रभारी पारस मलिक ने बताया कि पीड़ित की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस की टीमें साइबर गिरोह का पर्दाफाश करने में जुटी हैं।
साइबर ठगी से बचने के लिए यह समझना जरूरी है कि पैसे प्राप्त करने के लिए यूपीआई पिन (UPI PIN) डालने या किसी कोड पर ‘पे’ (Pay) करने की आवश्यकता नहीं होती। सोशल मीडिया और यूट्यूब पर दिखने वाले अनजान तथा भारी छूट वाले विज्ञापनों की सत्यता जांचे बिना भुगतान नहीं करना चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति द्वारा रिफंड के नाम पर कोई ऐप डाउनलोड करने या लिंक पर क्लिक करने के लिए कहे जाने पर भी तुरंत सतर्क रहना जरूरी है।

Sunil Giri
नाम: सुनील गिरि
वर्तमान पद: जिला संवाददाता
कार्यक्षेत्र: हापुड़ (उत्तर प्रदेश)
बीट (मुख्य विषय): क्राइम, राजनीति एवं जिला स्तर की सभी बीट
विशेषज्ञता: राजनीतिक विश्लेषण, अपराध संबंधी कवरेज और जिला स्तरीय रिपोर्टिंग
परिचय
सुनील गिरि उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह हापुड़ से जिला संवाददाता के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सुनील गिरि मुख्य रूप से राजनीति और क्राइम (अपराध) से जुड़ी खबरों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। राजनीतिक विषयों पर सटीक विश्लेषण करने के साथ-साथ वह जिले की हर छोटी-बड़ी गतिविधि और जनसरोकार के सभी मुद्दों को नियमित रूप से कवर करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव
सुनील गिरि को टीवी, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में 2002 से (20 से अधिक वर्षों का) लंबा और व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह निम्नलिखित प्रमुख मीडिया संस्थानों व न्यूज़ चैनलों के साथ जुड़कर अपनी सेवाएं दे रहे हैं:
- पंजाब केसरी टीवी
- इंडिया डेली 24×7 न्यूज़ चैनल
- MH1 न्यूज़ चैनल
- रॉयल न्यूज़ (वेबसाइट)
- इंडिया पब्लिक खबर (वेबसाइट)
शैक्षणिक योग्यता
उन्होंने अपनी शिक्षा 12वीं (12th Pass) तक पूरी की है। दो दशकों से अधिक समय से हापुड़ जिले में लगातार सक्रिय रहने के कारण क्षेत्र की सामाजिक, प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव बहुत गहरा है।
