हापुड़ में मिलावटी दही-क्रीम का खुलासा, FSDA जांच में 11 सैंपल फेल, मुकदमे के बाद भी कारोबार जारी
एफएसडीए की जांच में हापुड़ की फैक्ट्री के 11 सैंपल फेल मिले, जिनमें 3 असुरक्षित और 8 सब-स्टैंडर्ड हैं।

खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी हापुड़ की फैक्ट्री में लिए गए खाद्य पदार्थों के सीलबंद नमूनों की जांच करते हुए।
उत्तर प्रदेश के हापुड़ में खाद्य पदार्थों में मिलावट का गंभीर मामला सामने आया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की जांच रिपोर्ट में शहर की देव मैन्युफैक्चरिंग यूनिट से लिए गए दही और क्रीम के 11 सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें 3 सैंपल असुरक्षित और 8 सैंपल सब-स्टैंडर्ड पाए गए। मामले में मुकदमा दर्ज होने के बावजूद कारोबार जारी रहने से विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक, मामला हापुड़ के उत्तर एलएन रोड स्थित देव मैन्युफैक्चरिंग का है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन को इस यूनिट में बड़े पैमाने पर मिलावट की शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद विभागीय टीम ने फैक्ट्री से खाद्य पदार्थों के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे थे। हाल ही में सामने आई प्रयोगशाला रिपोर्ट में दही और क्रीम के कुल 11 सैंपल फेल पाए गए।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, इनमें 3 सैंपल पूरी तरह असुरक्षित और 8 सैंपल सब-स्टैंडर्ड श्रेणी के हैं। आरोप है कि फैक्ट्री में बड़ी मात्रा में सिंथेटिक दही और वनस्पति फैट वाली मिलावटी क्रीम तैयार की जा रही थी। इस खुलासे ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं की सेहत को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह पहली बार नहीं है, जब देव मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के खाद्य उत्पादों पर सवाल उठे हों। सूत्रों के मुताबिक, इससे पहले भी दो बार विशेषज्ञों की टीमें यहां के खाद्य पदार्थों को असुरक्षित घोषित कर चुकी हैं। आरोप है कि कानूनी कार्रवाई और सीलिंग से बचने के लिए कारोबार से जुड़े लोग लगातार जगह बदलकर गुपचुप तरीके से इस गतिविधि को संचालित कर रहे हैं।
मामले में सबसे अहम सवाल विभागीय कार्रवाई को लेकर उठ रहा है। जब खाद्य पदार्थों के सैंपल जांच में फेल हो चुके हैं और कोर्ट में मुकदमा भी दर्ज हो चुका है, तो मिलावटी उत्पादों को अब तक नष्ट क्यों नहीं किया गया? उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, विभाग की ओर से नष्टीकरण की कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
नियमों के मुताबिक, ऐसे घातक केमिकल और वनस्पति क्रीम को तत्काल जब्त कर नष्ट किया जाना चाहिए। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं होने के आरोपों के बीच फैक्ट्री का संचालन जारी रहने की बात कही जा रही है। इससे स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर खतरे की आशंका बनी हुई है। अब निगाहें खाद्य सुरक्षा विभाग की अगली कार्रवाई पर हैं, ताकि मिलावटी खाद्य पदार्थों के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

Sunil Giri
नाम: सुनील गिरि
वर्तमान पद: जिला संवाददाता
कार्यक्षेत्र: हापुड़ (उत्तर प्रदेश)
बीट (मुख्य विषय): क्राइम, राजनीति एवं जिला स्तर की सभी बीट
विशेषज्ञता: राजनीतिक विश्लेषण, अपराध संबंधी कवरेज और जिला स्तरीय रिपोर्टिंग
परिचय
सुनील गिरि उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह हापुड़ से जिला संवाददाता के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सुनील गिरि मुख्य रूप से राजनीति और क्राइम (अपराध) से जुड़ी खबरों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। राजनीतिक विषयों पर सटीक विश्लेषण करने के साथ-साथ वह जिले की हर छोटी-बड़ी गतिविधि और जनसरोकार के सभी मुद्दों को नियमित रूप से कवर करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव
सुनील गिरि को टीवी, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में 2002 से (20 से अधिक वर्षों का) लंबा और व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह निम्नलिखित प्रमुख मीडिया संस्थानों व न्यूज़ चैनलों के साथ जुड़कर अपनी सेवाएं दे रहे हैं:
- पंजाब केसरी टीवी
- इंडिया डेली 24×7 न्यूज़ चैनल
- MH1 न्यूज़ चैनल
- रॉयल न्यूज़ (वेबसाइट)
- इंडिया पब्लिक खबर (वेबसाइट)
शैक्षणिक योग्यता
उन्होंने अपनी शिक्षा 12वीं (12th Pass) तक पूरी की है। दो दशकों से अधिक समय से हापुड़ जिले में लगातार सक्रिय रहने के कारण क्षेत्र की सामाजिक, प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव बहुत गहरा है।
