ऐतिहासिक अजगर बसंती माता मेले में उमड़ा जनसैलाब, सुरक्षा में पुलिस ने संभाली कमान
हापुड़ के बनखंडा गांव में 500 वर्ष पुराने माने जाने वाले श्री अजगर बसंती माता मेले में लाखों श्रद्धालु पहुंचे। पुलिस ने सुरक्षा, यातायात और महिला-बच्चों की सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए, जबकि दंगल भी आकर्षण का केंद्र रहा।

तस्वीर में हापुड़ के बनखंडा में स्थित श्री अजगर बसंती माता मंदिर के बाहर मेले में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ और तैनात पुलिसकर्मी नजर आ रहे हैं।
हापुड़ जिले के बाबूगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम बनखंडा में हर साल की तरह इस वर्ष भी ऐतिहासिक श्री अजगर बसंती माता मेले का आयोजन किया गया। भाद्रपद यानी भादों महीने के आखिरी सोमवार से शुरू हुए दो दिवसीय मेले में उत्तर प्रदेश के अलावा आसपास के कई राज्यों से लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचे। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा।
मेले की संवेदनशीलता को देखते हुए बाबूगढ़ थाना प्रभारी ने मेला परिसर में तैनात महिला और पुरुष पुलिसकर्मियों को श्रद्धालुओं की सुरक्षा तथा कानून व्यवस्था बनाए रखने को लेकर कड़े दिशा-निर्देश दिए। थाना प्रभारी ने पुलिसकर्मियों को संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रखने और भीड़ के बीच किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए सतर्क रहने के निर्देश दिए।
महिला श्रद्धालुओं और बच्चों की सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता देते हुए पुलिस प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की। महिलाओं के साथ किसी भी प्रकार की अभद्रता या छेड़छाड़ की घटनाओं को रोकने के लिए सादे कपड़ों में भी पुलिस बल तैनात किया गया। मेले में चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल की मौजूदगी रही और थाना प्रभारी ने खुद सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाली।
भारी भीड़ को देखते हुए यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए रूट डायवर्जन और पार्किंग की विशेष व्यवस्था भी की गई। पुलिस प्रशासन की ओर से मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी गई।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, श्री अजगर बसंती माता मेले का इतिहास करीब 250 से 500 वर्ष पुराना बताया जाता है। इसका संबंध कुचेसर रियासत के समय से जुड़ा माना जाता है। बताया जाता है कि सदियों पहले इस क्षेत्र में भयंकर सूखा और महामारी फैल गई थी। इससे निजात पाने के लिए चामुंडा माता मंदिर के पवित्र स्थान पर एक विशाल महायज्ञ का आयोजन किया गया था।
मान्यता के अनुसार, इस महायज्ञ में बनखंडा गांव के त्यागी समाज के एक परिवार की दो सगी कन्याओं अजगर और बसंती ने लोक कल्याण के लिए क्षेत्र की जनता के सामने ही यज्ञवेदी में अपनी आहुति यानी अग्नि समाधि दे दी थी। उनके परमधाम जाते ही क्षेत्र में मूसलाधार वर्षा हुई, जिससे सूखा और महामारी का अंत हो गया। इसके बाद दोनों कन्याओं को देवी का रूप मानकर उनकी पुण्य स्मृति में यहां मंदिर बनाया गया और हर साल मेले का आयोजन होने लगा।
मेले से जुड़ी एक प्रमुख परंपरा के तहत दूर-दराज के शहरों में ब्याही गईं गांव की बेटियां और रिश्तेदार विशेष रूप से माता की पूजा करने बनखंडा पहुंचते हैं। उनके आगमन से पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल बन जाता है। दो दिनों तक चलने वाले मेले में पूजा-अर्चना और धार्मिक भजनों के साथ विशाल कुश्ती प्रतियोगिता यानी दंगल का भी आयोजन किया गया।
दंगल में देश के कोने-कोने से आए नामी पहलवानों ने अपने दांव-पेंच दिखाए। कुश्ती प्रतियोगिता मेले में पहुंचे दर्शकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रही। प्रशासन और पुलिस की कड़ी मुस्तैदी के बीच ऐतिहासिक श्री अजगर बसंती माता मेला शांतिपूर्ण और सुरक्षित माहौल में चल रहा है।

Sunil Giri
नाम: सुनील गिरि
वर्तमान पद: जिला संवाददाता
कार्यक्षेत्र: हापुड़ (उत्तर प्रदेश)
बीट (मुख्य विषय): क्राइम, राजनीति एवं जिला स्तर की सभी बीट
विशेषज्ञता: राजनीतिक विश्लेषण, अपराध संबंधी कवरेज और जिला स्तरीय रिपोर्टिंग
परिचय
सुनील गिरि उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह हापुड़ से जिला संवाददाता के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सुनील गिरि मुख्य रूप से राजनीति और क्राइम (अपराध) से जुड़ी खबरों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। राजनीतिक विषयों पर सटीक विश्लेषण करने के साथ-साथ वह जिले की हर छोटी-बड़ी गतिविधि और जनसरोकार के सभी मुद्दों को नियमित रूप से कवर करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव
सुनील गिरि को टीवी, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में 2002 से (20 से अधिक वर्षों का) लंबा और व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह निम्नलिखित प्रमुख मीडिया संस्थानों व न्यूज़ चैनलों के साथ जुड़कर अपनी सेवाएं दे रहे हैं:
- पंजाब केसरी टीवी
- इंडिया डेली 24×7 न्यूज़ चैनल
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- रॉयल न्यूज़ (वेबसाइट)
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शैक्षणिक योग्यता
उन्होंने अपनी शिक्षा 12वीं (12th Pass) तक पूरी की है। दो दशकों से अधिक समय से हापुड़ जिले में लगातार सक्रिय रहने के कारण क्षेत्र की सामाजिक, प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव बहुत गहरा है।
