गढ़मुक्तेश्वर के नक्का कुआं मंदिर में रामचरितमानस पाठ शुरू, महंत बराहा गिरी ने दिया एकता का संदेश
हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर स्थित पौराणिक नक्का कुआं मंदिर में दो दिवसीय श्री रामचरितमानस पाठ शुरू हुआ। महंत बराहा गिरी महाराज ने धर्मग्रंथों, पारिवारिक संस्कारों और एकता का संदेश देते हुए महर्षि वाल्मीकि के योगदान को याद किया।

गढ़मुक्तेश्वर के नक्का कुआं मंदिर में महर्षि वाल्मीकि जयंती पर आयोजित कार्यक्रम।
उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के ऐतिहासिक और पौराणिक गढ़मुक्तेश्वर महादेव नक्का कुआं मंदिर में दो दिवसीय श्री रामचरितमानस पाठ का शुभारंभ हुआ। उत्तर प्रदेश सरकार की विशेष पहल पर महर्षि वाल्मीकि जयंती के पावन अवसर पर प्रदेश के सभी पौराणिक मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में नक्का कुआं मंदिर में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में क्षेत्र के श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और प्रभु श्री राम के भजनों का आनंद उठाया।
मंदिर के महंत बराहा गिरी महाराज ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार प्रत्येक वर्ष महर्षि वाल्मीकि जयंती के उपलक्ष्य में सभी पौराणिक मंदिरों में श्री रामचरितमानस पाठ का आयोजन करवाती है। उन्होंने कहा कि इस पाठ का मुख्य उद्देश्य जन-जन तक भगवान श्री राम के पावन चरित्र, उनके आदर्शों और जीवन मूल्यों को पहुंचाना है। रामचरितमानस का श्रवण करने से मनुष्य के जीवन का कल्याण होता है।
धर्मग्रंथों से दूरी को बताया पारिवारिक विवादों का कारण
वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए महंत बराहा गिरी महाराज ने कहा कि आज हर घर में किसी न किसी बात को लेकर वाद-विवाद चल रहा है। परिवारों में माता-पिता और भाई-बहन के प्रति जो सम्मान होना चाहिए, उसमें कमी आ रही है।
उन्होंने कहा कि इसका एकमात्र कारण यह है कि लोग लगातार अपने मूल धर्मग्रंथों और संस्कारों से दूर होते चले गए हैं। रामायण पूरे परिवार को एक सूत्र में बांधकर रखने और एकता बनाए रखने का सबसे बड़ा संदेश देती है।
महर्षि वाल्मीकि को बताया सनातनियों का प्रेरणा स्रोत
महंत बराहा गिरी महाराज ने महर्षि वाल्मीकि के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपने कठिन परिश्रम और कठोर तपस्या से संस्कृत में 'वाल्मीकि रामायण' जैसे महान ग्रंथ की रचना की। महर्षि वाल्मीकि समस्त सनातनियों के परम प्रेरणा स्रोत ऋषि हैं।
उन्होंने कहा कि संत हमेशा अपने तप और साधना के माध्यम से संसार को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने का काम करते हैं। जब संसार संतों के बताए मार्ग पर चलता है, तभी समाज का वास्तविक कल्याण संभव है। इसलिए सभी सनातनियों को अपने धर्मग्रंथों का नियमित अध्ययन करना चाहिए।
धार्मिक आयोजन में संत समाज और गणमान्य लोग रहे मौजूद
नक्का कुआं मंदिर में आयोजित दो दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान के शुभारंभ अवसर पर क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियां और संत समाज के लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से पुजारी गजेंद्र गिरि, स्वामी सत्यानंद गिरी, मनोज भारती, लाला श्री राम गर्ग, मनी गिरी, गोपाल गिरी, प्रहलाद यादव, कैलाश चंद, बबली सिंह, पंडित भवन चंद स्वराडी, पंडित खिलाननद विष्ट और पंडित राम कृष्ण दास जी सहित अन्य भक्त शामिल रहे।
गढ़मुक्तेश्वर के पौराणिक नक्का कुआं मंदिर में आयोजित यह श्री रामचरितमानस पाठ महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर धार्मिक अनुष्ठानों की कड़ी का हिस्सा है। आयोजन के माध्यम से भगवान श्री राम के आदर्शों, पारिवारिक संस्कारों और एकता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।

Sunil Giri
नाम: सुनील गिरि
वर्तमान पद: जिला संवाददाता
कार्यक्षेत्र: हापुड़ (उत्तर प्रदेश)
बीट (मुख्य विषय): क्राइम, राजनीति एवं जिला स्तर की सभी बीट
विशेषज्ञता: राजनीतिक विश्लेषण, अपराध संबंधी कवरेज और जिला स्तरीय रिपोर्टिंग
परिचय
सुनील गिरि उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह हापुड़ से जिला संवाददाता के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सुनील गिरि मुख्य रूप से राजनीति और क्राइम (अपराध) से जुड़ी खबरों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। राजनीतिक विषयों पर सटीक विश्लेषण करने के साथ-साथ वह जिले की हर छोटी-बड़ी गतिविधि और जनसरोकार के सभी मुद्दों को नियमित रूप से कवर करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव
सुनील गिरि को टीवी, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में 2002 से (20 से अधिक वर्षों का) लंबा और व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह निम्नलिखित प्रमुख मीडिया संस्थानों व न्यूज़ चैनलों के साथ जुड़कर अपनी सेवाएं दे रहे हैं:
- पंजाब केसरी टीवी
- इंडिया डेली 24×7 न्यूज़ चैनल
- MH1 न्यूज़ चैनल
- रॉयल न्यूज़ (वेबसाइट)
- इंडिया पब्लिक खबर (वेबसाइट)
शैक्षणिक योग्यता
उन्होंने अपनी शिक्षा 12वीं (12th Pass) तक पूरी की है। दो दशकों से अधिक समय से हापुड़ जिले में लगातार सक्रिय रहने के कारण क्षेत्र की सामाजिक, प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव बहुत गहरा है।
