गरौठा। तहसील गरौठा के अंतर्गत ग्राम झवरा में प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के निर्णय ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। अपनी पुश्तैनी और उपजाऊ कृषि भूमि छिनने की सूचना मिलते ही गांव में आक्रोश और चिंता का माहौल व्याप्त हो गया है। इस गंभीर संकट को देखते हुए ग्रामीणों ने एकजुट होकर प्रशासन के समक्ष अपनी पीड़ा व्यक्त की और भूमि अधिग्रहण के विरोध में एक औपचारिक प्रार्थना पत्र सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है।

ग्रामीणों के अनुसार, उन्हें इस प्रस्तावित अधिग्रहण की जानकारी समाचार पत्रों के माध्यम से प्राप्त हुई, जिसके बाद से ही पूरे गांव में खलबली मची है। किसानों का स्पष्ट कहना है कि अधिग्रहण के दायरे में आ रही भूमि अत्यंत उपजाऊ है और गांव के अधिकांश परिवारों की जीविका का यह एकमात्र आधार है। ग्रामीणों के पास खेती के अतिरिक्त आय का कोई अन्य साधन उपलब्ध नहीं है और न ही गांव से बाहर जाकर रोजगार तलाशना उनके लिए व्यावहारिक रूप से संभव है। अपनी रोजी-रोटी पर मंडराते संकट को भांपते हुए ग्रामवासियों ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि उनकी कृषि भूमि को अधिग्रहण की प्रक्रिया से पूर्णतः मुक्त रखा जाए।

विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रमोद कुमार, राजकुमार, बृजेशकुमार, भगवतशरण, राजेशकुमार, साधा देवी, बहादर, मीना देवी, मेवरानी, शुभम सिंह, संजय सिंह, देबलीनन्दन, जुगल किशोर, हरीशंकर, दशरथ, लक्ष्मी प्रसाद, फूलचन्द्र, उदयभान, काशीराम, बद्रीप्रसाद, विजयराम, रामप्रकाश, राजाराम, चहाना देवी, रामशरण, अभिलाष देवी, शिरोवन, अरविन्द, नरेन्द्र एवं राम आरसे सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

ग्रामीणों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि यदि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया और अधिग्रहण का निर्णय वापस नहीं लिया गया, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए विवश होंगे। इस पूरे घटनाक्रम की गंभीरता को देखते हुए प्रार्थना पत्र की एक प्रतिलिपि आवश्यक कार्रवाई हेतु मंडलायुक्त झांसी को भी प्रेषित कर दी गई है। यह मामला अब स्थानीय प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि किसानों का भविष्य सीधे तौर पर उनकी भूमि से जुड़ा हुआ है।

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