68 हजार प्राइवेट स्कूलों में मुफ्त एडमिशन! 6 लाख बच्चों को मिलने जा रही है मुफ्त शिक्षा, यहाँ है आवेदन की सीधी लिंक
उत्तर प्रदेश में RTE Act 2009 के तहत निजी स्कूलों की 25% आरक्षित सीटों पर निशुल्क प्रवेश प्रक्रिया 2 फरवरी 2026 से शुरू हो गई है। लगभग 6 लाख सीटों पर होने वाले इस दाखिले के लिए गरीब और वंचित वर्ग के अभिभावक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। जानिए तीन चरणों वाली आवेदन प्रक्रिया, पात्रता नियम और आवश्यक दस्तावेजों की पूरी जानकारी इस विस्तृत रिपोर्ट में, जो आपके बच्चे के भविष्य को बदल सकती है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के वंचित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए स्वर्णिम भविष्य के द्वार खुल गए हैं। भारत सरकार के शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE Act, 2009) की भावना को धरातल पर उतारते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए निजी स्कूलों की 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर प्रवेश की प्रक्रिया का औपचारिक आगाह कर दिया है। यह पहल न केवल सामाजिक असमानता की खाई को पाटने का प्रयास है, बल्कि उन हजारों परिवारों की उम्मीदों को नई उड़ान देने वाली है, जो अपने बच्चों को बड़े निजी स्कूलों में पढ़ाने का सपना तो देखते थे, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण कदम ठिठक जाते थे। आज, 2 फरवरी 2026 से प्रदेश भर के लगभग 68,000 निजी विद्यालयों में करीब 6 लाख सीटों पर ऑनलाइन आवेदन की खिड़की खुल गई है, जो प्राथमिक शिक्षा के ढांचे में एक समावेशी बदलाव का संकेत दे रही है।
इस विशाल नामांकन अभियान को सुव्यवस्थित बनाए रखने के लिए प्रशासन ने इसे तीन महत्वपूर्ण चरणों में विभाजित किया है। प्रथम चरण की प्रक्रिया आज से प्रारंभ होकर 16 फरवरी 2026 तक चलेगी, जिसके पश्चात 20 फरवरी को पारदर्शी लॉटरी सिस्टम के माध्यम से भाग्यशाली छात्रों का चयन किया जाएगा। जो परिवार प्रथम चरण में आवेदन से चूक जाएंगे, उनके लिए द्वितीय चरण 21 फरवरी से 7 मार्च तक और अंतिम तृतीय चरण 12 मार्च से 25 मार्च तक संचालित होगा। सरकार की इस त्रि-स्तरीय योजना का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदेश का कोई भी पात्र बच्चा तकनीकी या समय की कमी के चलते शिक्षा के इस मौलिक अधिकार से वंचित न रह जाए।
पात्रता के मानकों को लेकर शासन ने अत्यंत स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक का उत्तर प्रदेश का मूल निवासी होना अनिवार्य है, साथ ही परिवार की वार्षिक आय एक लाख रुपये से कम होनी चाहिए। आयु सीमा के निर्धारण में भी संवेदनशीलता बरती गई है, जहाँ 1 अप्रैल 2026 की स्थिति के अनुसार नर्सरी से लेकर कक्षा एक तक के बच्चों के लिए अलग-अलग आयु वर्ग निर्धारित किए गए हैं। आवेदन की प्रक्रिया को पूर्णतः डिजिटल रखते हुए 'rte25.upsdc.gov.in' पोर्टल को सक्रिय कर दिया गया है, जहाँ अभिभावकों को अपने निवास, आय और बच्चे के जन्म से संबंधित वैध दस्तावेजों के साथ अपनी पसंद के 10 स्कूलों को प्राथमिकता क्रम में चुनने की स्वतंत्रता दी गई है।
कानूनी दृष्टिकोण से देखें तो यह अधिनियम केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक संवैधानिक गारंटी है जो कक्षा 8 तक की शिक्षा को पूर्णतः निःशुल्क और अनिवार्य बनाती है। इस प्रक्रिया का सबसे पारदर्शी पहलू 'लॉटरी सिस्टम' है, जो किसी भी प्रकार के मानवीय हस्तक्षेप या पक्षपात की संभावना को समाप्त करता है। जैसे ही लॉटरी में बच्चे का नाम आवंटित होता है, संबंधित विद्यालय को बिना किसी हीला-हवाली के छात्र का प्रवेश सुनिश्चित करना होगा। यह कदम न केवल शिक्षा के लोकतंत्रीकरण की दिशा में एक बड़ा प्रहार है, बल्कि यह उस संकल्प की भी सिद्धि है जहाँ ज्ञान के मंदिर में अमीरी और गरीबी की दीवारें ढह जाती हैं। अंततः, यह मुहिम प्रदेश के लाखों नौनिहालों के जीवन में शिक्षा का उजियारा भरने और एक समतामूलक समाज की नींव रखने की दिशा में एक क्रांतिकारी मील का पत्थर साबित होगी।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
