Fएटा के निधौली कलां थाना क्षेत्र के गांव जिटौली में प्रेमा देवी की मौत के बाद सरकारी अभिलेखों से जुड़ा विवाद सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि प्रेमा देवी को वर्ष 2014 में ही सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर उनके नाम से मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करा लिया गया था, जबकि वह इसके बाद करीब 12 वर्ष तक जीवित रहीं। अब 2 अक्टूबर 2026 को उनकी वास्तविक मृत्यु के बाद परिजन शव को एटा मोर्चरी लेकर पहुंचे, जहां पोस्टमार्टम कराया गया।

परिजनों के अनुसार, पोस्टमार्टम कराने का उद्देश्य प्रेमा देवी की वास्तविक मृत्यु की पुष्टि के साथ उनका सही मृत्यु रिकॉर्ड तैयार कराना है। उनके नाम से पहले जारी कथित मृत्यु प्रमाणपत्र को लेकर विवाद चल रहा है।

गांव जिटौली निवासी विशेष कुमार यादव पुत्र कायम सिंह, उम्र 49 वर्ष, ने बताया कि उनकी मां प्रेमा देवी पहले गंगा सिंह की पत्नी थीं। गंगा सिंह की मृत्यु के करीब सात-आठ वर्ष बाद प्रेमा देवी ने दूसरी शादी कर ली थी। इसके बाद परिवार में दिनेश कुमार, विशेष कुमार, गिरजा देवी और दुर्गेश कुमारी संतान हुईं। विशेष कुमार के अनुसार, उनकी मां बाद में कायम सिंह की पत्नी के रूप में परिवार के साथ रह रही थीं और 2 अक्टूबर 2026 तक जीवित थीं।

विशेष कुमार ने आरोप लगाया कि उनके ताऊ के बेटे सुरेश चंद्र और नरेश कुमार पुत्र कोमल सिंह ने वर्ष 2014 में उनकी मां प्रेमा देवी पत्नी गंगा सिंह को मृत घोषित करा दिया। आरोप है कि शीतलपुर ब्लॉक से उनके नाम का मृत्यु प्रमाणपत्र भी बनवा लिया गया। उन्होंने बताया कि इसी नाम से राशन कार्ड और बैंक पासबुक भी बनाए जाने की बात सामने आई है।

विशेष कुमार का दावा है कि दस्तावेजों में जिस प्रेमा देवी का नाम दर्ज है, वह उनकी मां थीं, जबकि उनके ताऊ के बेटों की मां का नाम भी प्रेम देवी पत्नी कोमल सिंह था। उनके अनुसार, ताऊ के बेटों की मां प्रेम देवी पत्नी कोमल सिंह की मृत्यु वर्ष 2011 में ही हो चुकी थी। आरोप है कि नाम में समानता के कारण दोनों महिलाओं की पहचान को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हुई और इसी का फायदा उठाकर उनकी मां प्रेमा देवी के नाम से वर्ष 2014 में कथित तौर पर मृत्यु प्रमाणपत्र बनवा दिया गया।

परिजनों का कहना है कि पूरे मामले में तैयार किए गए दस्तावेजों की जांच होने पर वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

इस विवाद में करीब 16 बीघा जमीन के दाखिल-खारिज का मामला भी जुड़ा है। विशेष कुमार ने आरोप लगाया कि उनकी करीब 16 बीघा जमीन का दाखिल-खारिज 18 जून 2025 को सुरेश चंद्र और नरेश कुमार ने कथित रूप से फर्जी तरीके से करा लिया। उनका कहना है कि जमीन से संबंधित राजस्व अभिलेखों में की गई इस कार्रवाई को लेकर उन्होंने आपत्ति दर्ज कराई है। परिजनों के मुताबिक, मृत्यु प्रमाणपत्र और जमीन के दाखिल-खारिज से जुड़े दस्तावेजों की जांच इस विवाद में महत्वपूर्ण हो सकती है।

विशेष कुमार ने बताया कि उनकी मां प्रेमा देवी की वास्तविक मृत्यु 2 अक्टूबर 2026 की शाम करीब साढ़े छह बजे हुई। इसके बाद परिजन शव को एटा मोर्चरी लेकर पहुंचे। उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम कराने का फैसला इसलिए लिया गया, ताकि उनकी मां की वास्तविक मृत्यु की तारीख और परिस्थितियों का आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार हो सके।

विशेष कुमार का कहना है कि यदि वर्ष 2014 में उनकी मां के नाम से मृत्यु प्रमाणपत्र जारी हुआ था तो उसके बावजूद वह इतने वर्षों तक जीवित कैसे रहीं, यह जांच का विषय है।

विशेष कुमार के अनुसार, कथित मृत्यु प्रमाणपत्र और जमीन के विवाद को लेकर उनकी अपील एसडीएम न्यायिक, एटा सदर तहसील में विचाराधीन है। इसके अलावा मामला अपर जिला जज की अदालत में भी चल रहा है। उनका कहना है कि न्यायालय में चल रही कार्यवाही के दौरान संबंधित दस्तावेजों, राजस्व अभिलेखों और मृत्यु प्रमाणपत्र की जांच कराई जा रही है।

अब प्रेमा देवी की वास्तविक मृत्यु के बाद जारी होने वाला नया मृत्यु प्रमाणपत्र और पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी मामले में महत्वपूर्ण दस्तावेज हो सकते हैं। मृत्यु प्रमाणपत्र किस आधार पर जारी हुआ, उसमें दर्ज महिला की पहचान किस दस्तावेज के आधार पर तय की गई और 16 बीघा जमीन का दाखिल-खारिज किन अभिलेखों के आधार पर हुआ, इसकी जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

फिलहाल फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने और जमीन का दाखिल-खारिज फर्जी तरीके से कराने के आरोप विशेष कुमार यादव की ओर से लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित विभागीय अभिलेखों और न्यायालय की कार्यवाही से होना बाकी है। दस्तावेजों और न्यायालयीन कार्यवाही की जांच से ही वर्ष 2014 में जारी कथित मृत्यु प्रमाणपत्र और 2025 में हुए जमीन के दाखिल-खारिज की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

Vikas Dube, Etah and Kasganj (Uttar pradesh)

Vikas Dube, Etah and Kasganj (Uttar pradesh)

विकास दुबे एटा और कासगंज जनपद में सक्रिय पत्रकार हैं, जो स्थानीय मुद्दों, प्रशासनिक गतिविधियों, स्वास्थ्य, शिक्षा और अपराध से जुड़ी खबरों की गहन और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करते हैं। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों की जमीनी हकीकत को सरल एवं प्रभावशाली भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी विशेष पहचान है। जनसरोकार से जुड़े विषयों पर सतत सक्रिय रहते हुए वे क्षेत्र की महत्वपूर्ण घटनाओं को प्रमुखता से सामने लाने का कार्य कर रहे हैं।

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      • वर्तमान में दैनिक भास्कर ऐप डिजिटल, पब्लिक ऐप और एबीसी चैनल में रिपोर्टर हूं और टाइम्स ऑफ इंडिया के लिए इनपुट भेजता हूं।



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