एटा जिले में डॉक्टर समेत दो लोगों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सीएचसी स्तर पर तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने जिले की प्रत्येक सीएचसी में कम से कम दो बेड आइसोलेशन के लिए आरक्षित करने के निर्देश दिए हैं। इन बेड को सामान्य ओपीडी से अलग रखने को कहा गया है, ताकि स्वाइन फ्लू के संदिग्ध या संक्रमित मरीजों का सामान्य मरीजों से संपर्क न हो।

सीएमओ के निर्देश के बाद कुछ सीएचसी में तत्काल व्यवस्थाएं शुरू कर दी गईं, लेकिन अलीगंज सीएचसी में निर्देशों के अनुपालन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।

एटा में सामने आए दोनों मामलों में संक्रमण की पुष्टि आगरा में जांच के दौरान हुई। शहर के पटियाली गेट निवासी डॉ. शीलेन्द्र गौड़ की तबीयत खराब होने पर परिजन उन्हें उपचार के लिए आगरा ले गए थे। वहां उपचार के दौरान स्वाइन फ्लू की जांच कराई गई, जिसमें संक्रमण की पुष्टि हुई।

इसी तरह जैन गली निवासी वेदांशी की तबीयत खराब होने पर परिजन उसे आगरा के निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। जांच के दौरान उसके भी स्वाइन फ्लू संक्रमित होने की पुष्टि हुई।

दोनों मामलों की जानकारी आगरा के निजी अस्पतालों की ओर से एटा के मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय को दी गई। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हुआ और दोनों मरीजों के घरों पर टीमें भेजकर उनके संपर्क में आए लोगों की जानकारी जुटाई गई। संभावित संक्रमण को देखते हुए संपर्क में आए लोगों की निगरानी और आवश्यक जांच भी की जा रही है।

दो मरीजों में संक्रमण की पुष्टि के बाद सीएमओ डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने सभी सीएचसी पर आइसोलेशन व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। प्रत्येक सीएचसी में दो बेड आइसोलेशन के लिए आरक्षित करने और उन्हें सामान्य ओपीडी से अलग रखने को कहा गया है। इसका उद्देश्य संदिग्ध मरीज को सामान्य मरीजों से अलग रखना और संक्रमण के संभावित प्रसार को रोकना है।

सीएमओ के निर्देश के बाद जैथरा सीएचसी ने दो के बजाय आठ बेड आइसोलेशन के लिए आरक्षित कर दिए। जैथरा सीएचसी के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनुज कुमार ने बताया कि अस्पताल में आठ बेड आरक्षित कर दिए गए हैं। आइसोलेशन व्यवस्था के लिए स्वास्थ्य कर्मियों की ड्यूटी भी लगा दी गई है।

जैथरा सीएचसी की यह तैयारी बताती है कि निर्देश मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर आइसोलेशन व्यवस्था तत्काल सक्रिय की जा सकती है।

वहीं, अलीगंज सीएचसी में तैयारियों को लेकर स्थिति साफ नहीं हो सकी है। सीएमओ के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद यहां आइसोलेशन के लिए दो बेड अलग आरक्षित किए गए हैं या नहीं और उन्हें ओपीडी से अलग रखने की क्या व्यवस्था है, इसकी जानकारी सामने नहीं आ सकी।

आइसोलेशन व्यवस्था की जानकारी लेने के लिए अलीगंज सीएचसी के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सर्वेश कुमार से कई बार फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। इसके चलते सीएचसी प्रशासन का पक्ष खबर लिखे जाने तक सामने नहीं आ सका।

सीएचसी में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में स्वाइन फ्लू का संदिग्ध मरीज सामान्य ओपीडी में अन्य मरीजों के बीच पहुंचता है तो संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है। इसी वजह से सीएमओ ने आइसोलेशन के लिए निर्धारित बेड को ओपीडी से अलग रखने के निर्देश दिए हैं।

अब सवाल यह है कि अलीगंज सीएचसी में सीएमओ के निर्देशों के अनुसार दो बेड ओपीडी से अलग आरक्षित किए गए हैं या नहीं, आइसोलेशन के लिए आवश्यक संसाधन और स्टाफ तैयार है या नहीं और यदि अचानक स्वाइन फ्लू का संदिग्ध मरीज सीएचसी पहुंचता है तो उसे तत्काल कहां रखा जाएगा।

एक ओर एटा में स्वाइन फ्लू के दो मामले सामने आ चुके हैं, वहीं दूसरी ओर जिले की प्रत्येक सीएचसी में दो बेड अलग रखने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। जैथरा में आठ बेड आरक्षित करने के साथ स्वास्थ्य कर्मियों की ड्यूटी भी लगा दी गई है। ऐसे में अलीगंज सीएचसी की तैयारी को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सीएमओ के निर्देशों का सभी सीएचसी पर जमीन पर पालन होना जरूरी है, क्योंकि संक्रमण बढ़ने की स्थिति में तैयारियों की वास्तविक परीक्षा मरीजों के अस्पताल पहुंचने के बाद ही होगी।

Vikas Dube, Etah and Kasganj (Uttar pradesh)

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विकास दुबे एटा और कासगंज जनपद में सक्रिय पत्रकार हैं, जो स्थानीय मुद्दों, प्रशासनिक गतिविधियों, स्वास्थ्य, शिक्षा और अपराध से जुड़ी खबरों की गहन और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करते हैं। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों की जमीनी हकीकत को सरल एवं प्रभावशाली भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी विशेष पहचान है। जनसरोकार से जुड़े विषयों पर सतत सक्रिय रहते हुए वे क्षेत्र की महत्वपूर्ण घटनाओं को प्रमुखता से सामने लाने का कार्य कर रहे हैं।

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