एटा गल्ला मंडी में मक्का कारोबार पर टैक्स चोरी का शक, चार फर्में जांच के घेरे में, रेलवे रिकॉर्ड तलब
एटा गल्ला मंडी में मक्का कारोबार के दौरान संभावित टैक्स चोरी और दस्तावेजी अनियमितताओं की जांच तेज हो गई है। चार फर्में जांच के घेरे में हैं, जबकि डीआरएम प्रयागराज से रेलवे रिकॉर्ड मांगा गया है। सात लाख कुंतल मक्का कारोबार से जुड़े पूरे मामले पर प्रशासन की पैनी नजर बनी हुई है।

एटा रेलवे स्टेशन पर जांच के दौरान अधिकारी और सुरक्षा बल मौजूद।
एटा कृषि उत्पादन मंडी समिति में मक्का कारोबार के दौरान संभावित टैक्स चोरी और दस्तावेजी अनियमितताओं की आशंका के बाद जिला प्रशासन ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। प्रारंभिक जांच में चार कारोबारी फर्मों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। प्रशासन को आशंका है कि मंडी से बड़ी मात्रा में मक्का निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना रेलवे के माध्यम से बाहर भेजी गई हो सकती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए रेलवे से विस्तृत रिकॉर्ड तलब किया गया है और संभावित राजस्व नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
जिलाधिकारी अरविंद सिंह के निर्देश पर गठित जांच समिति ने मंडी के खरीद-बिक्री अभिलेख, गेट पास, शुल्क रजिस्टर और रेलवे से भेजे गए माल का मिलान शुरू कर दिया है। जांच के दौरान सामने आया कि एटा रेलवे स्टेशन से इस सीजन में मक्का से लदी 10 से अधिक रेलवे रैक विभिन्न राज्यों एवं बंदरगाहों के लिए रवाना की गई हैं। अब यह जांच की जा रही है कि इन रैकों में भेजे गए माल के संबंध में मंडी शुल्क और अन्य देय करों का नियमानुसार भुगतान किया गया था या नहीं।
प्रारंभिक जांच में विवेक इंटरप्राइजेज, मां शारदा ट्रेडर्स, श्यामजी ट्रेडर्स समेत चार फर्मों के नाम सामने आए हैं। प्रशासन ने इन फर्मों के कारोबार और दस्तावेजों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। यदि जांच में अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जांच अधिकारियों के अनुसार, मंडी में कृषि उपज की खरीद के समय निर्धारित मंडी शुल्क और अन्य देयकों का विवरण आर-6 अभिलेख में दर्ज किया जाता है। वहीं, मंडी परिसर से माल बाहर ले जाने के लिए आर-9 गेट पास जारी किया जाता है। जांच में आशंका जताई जा रही है कि कुछ मामलों में आर-9 गेट पास जारी किए बिना ही मक्का मंडी से बाहर भेज दी गई। यदि यह तथ्य सही पाया जाता है तो इससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने की संभावना है।
इसी आधार पर जांच समिति अब मंडी के अभिलेखों का रेलवे से प्राप्त होने वाले रिकॉर्ड के साथ मिलान कर रही है, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जा सके और यह पता लगाया जा सके कि कहीं निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन तो नहीं हुआ।
जांच के दौरान मंडी प्रशासन को रेलवे से रवाना हुई सभी रैकों का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिला। स्थानीय स्तर पर जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया गया, लेकिन रेलवे अधिकारियों ने उच्च स्तर की अनुमति का हवाला दिया। इसके बाद प्रशासन ने डीआरएम, प्रयागराज मंडल को पत्र भेजकर एटा से रवाना प्रत्येक रेलवे रैक का वजन, लोडिंग तिथि, गंतव्य और संबंधित दस्तावेजों का पूरा विवरण उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।
रेलवे से रिकॉर्ड प्राप्त होने के बाद प्रत्येक रैक का मिलान मंडी के आर-9 गेट पास और शुल्क अभिलेखों से किया जाएगा। इसी आधार पर यह तय होगा कि कहीं कर चोरी या प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता तो नहीं हुई।
जांच के दौरान मंडी की प्रवेश और निकास व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है। अधिकारियों के अनुसार, मंडी के प्रवेश और निकास द्वारों पर माल की आवाजाही की पर्याप्त निगरानी व्यवस्था नहीं मिली। अलीगंज रोड स्थित गेट पर मुख्य रूप से सुरक्षा गार्ड वाहनों का आवागमन दर्ज करते हैं, लेकिन यह सुनिश्चित करने की प्रभावी व्यवस्था नहीं है कि बाहर जाने वाले प्रत्येक वाहन के पास वैध आर-9 गेट पास मौजूद है या नहीं। ऐसे में बिना पूरी औपचारिकता के माल बाहर जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
एटा गल्ला मंडी जनपद की प्रमुख कृषि मंडियों में शामिल है। यहां लगभग 60 आढ़ती मक्का खरीद का कारोबार करते हैं। दिल्ली, हरदोई समेत कई जिलों और अन्य राज्यों की फर्में यहां से बड़ी मात्रा में मक्का खरीदती हैं। एक रेलवे रैक में औसतन करीब 25 हजार कुंतल मक्का लोड किया जाता है। इस सीजन में अब तक मंडी में लगभग सात लाख कुंतल मक्का की खरीद दर्ज की जा चुकी है। कारोबार का इतना बड़ा दायरा होने के कारण प्रशासन इस पूरे मामले को राजस्व की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मान रहा है।
एडीएम (प्रशासन) संगमलाल ने बताया कि प्रारंभिक जांच के आधार पर चार फर्मों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए समिति गठित की गई है। रेलवे से भी संबंधित रिकॉर्ड मांगा गया है। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद तथ्यों के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। अब पूरे मामले में रेलवे से मिलने वाले रिकॉर्ड और मंडी अभिलेखों के मिलान पर जांच की दिशा और आगे की कार्रवाई निर्भर करेगी।

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