उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों के सरकारी खर्च और वित्तीय जवाबदेही से जुड़ी डिजिटल व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर 41 जिलों की ऑडिट रिपोर्ट अपलोड संख्या शून्य दिखाई देने की जानकारी सामने आई है। वहीं, शामली जिले की ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के भुगतान के समर्थन में वास्तविक बिल-बाउचर के बजाय कोरे कागज, धुंधले दस्तावेज और मजदूरों की उपस्थिति पत्रक अपलोड किए जाने के मामले ने अभिलेखों के सत्यापन पर सवाल खड़े किए हैं। जिला प्रशासन ने प्रकरण की विस्तृत जांच कराने की बात कही है।

ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों पर खर्च होने वाली सरकारी धनराशि का हिसाब ऑनलाइन सार्वजनिक करने और वित्तीय अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से ई-ग्राम स्वराज जैसी डिजिटल व्यवस्था शुरू की गई है। इसके माध्यम से पंचायतों की योजनाओं, बजट, विकास कार्यों, लेखांकन और भुगतान से संबंधित जानकारी दर्ज की जाती है। लेकिन शामली में सामने आए दस्तावेजों की स्थिति और 41 जिलों की ऑडिट रिपोर्ट के आंकड़ों ने ऑनलाइन निगरानी तथा वित्तीय पारदर्शिता की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर उत्तर प्रदेश के 41 जिलों की ऑडिट रिपोर्ट अपलोड संख्या शून्य दिखाई देने की जानकारी सामने आई है। इनमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली, बागपत, बिजनौर, मेरठ और मुरादाबाद समेत कई जिले शामिल बताए गए हैं। इसके विपरीत, उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार सहारनपुर जिले की 96, मुजफ्फरनगर जिले की 26 और बुलंदशहर जिले की 188 ऑडिट रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड की गई हैं। इन आंकड़ों से जिलों के बीच ऑनलाइन रिपोर्टिंग की स्थिति में अंतर दिखाई देता है।

हालांकि, पोर्टल पर ऑडिट रिपोर्ट की संख्या शून्य प्रदर्शित होने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित जिले की किसी भी ग्राम पंचायत का ऑडिट नहीं हुआ। रिपोर्ट तैयार होने में देरी, पोर्टल पर अपलोड नहीं होना, आंकड़ों के अद्यतन की स्थिति या संबंधित वित्तीय वर्ष के अभिलेख उपलब्ध नहीं होने जैसे कारण भी इसकी वजह हो सकते हैं। वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए वित्तीय वर्ष, कुल ग्राम पंचायतों की संख्या, निर्धारित ऑडिट, पूर्ण ऑडिट और पोर्टल पर अपलोड रिपोर्टों का तुलनात्मक विवरण आवश्यक है।

ई-ग्राम स्वराज भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय की डिजिटल पहल है। इसका उद्देश्य ग्राम पंचायतों की योजना, बजट, विकास कार्यों, लेखांकन और भुगतान से संबंधित जानकारी को डिजिटल माध्यम से व्यवस्थित करना तथा पारदर्शिता बढ़ाना है। इससे निगरानी करने वाले अधिकारियों और आम नागरिकों को पंचायतों के कामकाज से जुड़ी जानकारी उपलब्ध हो सकती है।

पंचायतों के वित्तीय लेखों की जांच के लिए ऑडिट भी महत्वपूर्ण व्यवस्था है। इसके माध्यम से आय-व्यय का परीक्षण, अभिलेखों का मिलान, वित्तीय अनियमितताओं की पहचान और आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई की जा सकती है। ऑडिट में सामने आने वाली आपत्तियों का निस्तारण और अनुपालन सुनिश्चित करना भी जरूरी है। इस व्यवस्था की प्रभावशीलता के लिए पोर्टल पर आंकड़ों का अद्यतन होना, दस्तावेजों का स्पष्ट और सत्यापन योग्य होना तथा भुगतान से संबंधित मूल अभिलेखों का नियमानुसार सुरक्षित रखा जाना आवश्यक है।

शामली जिले की ग्राम पंचायत युसुफपुर में दर्ज विकास कार्यों के दस्तावेजों की पड़ताल के दौरान भुगतान से जुड़े गंभीर सवाल सामने आए हैं। यहां नाली की दीवार के निर्माण पर 72,259 रुपये खर्च दर्शाए गए हैं, लेकिन भुगतान के समर्थन में बिल-बाउचर के स्थान पर मजदूरों की उपस्थिति पत्रक यानी अटेंडेंस शीट अपलोड मिली।

इसी ग्राम पंचायत में दरबार सिंह के डेरे से कश्मीर सिंह के मकान तक खड़ंजा निर्माण के लिए 77,885 रुपये खर्च दर्ज किए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस कार्य के बिल-बाउचर के स्थान पर पोर्टल पर कोरा कागज अपलोड मिला। दोनों मामलों में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि भुगतान किस सामग्री, श्रम और निर्माण कार्य के लिए किया गया तथा संबंधित अधिकारियों ने अभिलेखों का सत्यापन किस आधार पर किया।

ग्राम पंचायत बिडौली में तालाब के पास सीसी सड़क निर्माण पर 1.21 लाख रुपये से अधिक का खर्च दर्ज है। पोर्टल पर अपलोड किए गए बिल कथित तौर पर इतने धुंधले हैं कि उनमें दर्ज विवरण पढ़ना मुश्किल है। इसी गांव में सफाई कार्य के नाम पर 24,225 रुपये का भुगतान दर्ज किया गया है। इस मामले में भी स्पष्ट बिलों के बजाय धुंधली पर्चियों और मजदूरों की उपस्थिति से संबंधित दस्तावेजों का उल्लेख किया गया है।

उधर, ग्राम पंचायत काबड़ौत में मोहर सिंह के मकान से विनोद के मकान तक सीसी सड़क निर्माण और हैंडपंप रिबोर के कार्यों पर कुल मिलाकर 1.22 लाख रुपये से अधिक की धनराशि खर्च दर्शाई गई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, यहां भी अपलोड किए गए दस्तावेज स्पष्ट नहीं हैं। ऐसे में संबंधित कार्यों की लागत, भुगतान प्राप्त करने वाले व्यक्ति या फर्म, सामग्री की खरीद और काम पूरा होने के प्रमाणों की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।

ग्राम पंचायतों में नाली निर्माण, सीसी सड़क, खड़ंजा, सफाई और हैंडपंप रिबोर जैसे कार्यों पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। इन कार्यों के खर्च का सत्यापन संबंधित अभिलेखों के आधार पर किया जाना चाहिए। भुगतान के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं होने पर खर्च की वास्तविकता और उसकी वित्तीय जांच को लेकर सवाल उठते हैं। हालांकि, पोर्टल पर दस्तावेजों का अस्पष्ट या अनुपलब्ध होना अपने आप में भ्रष्टाचार का अंतिम प्रमाण नहीं है। इसके लिए मूल अभिलेखों, भुगतान विवरण और मौके पर कराए गए कार्यों की भौतिक स्थिति की जांच जरूरी है।

सरकारी धन से बनने वाली सड़कें, नालियां, खड़ंजे, पेयजल सुविधाएं और सफाई व्यवस्था सीधे ग्रामीणों के जीवन से जुड़ी हैं। इसलिए वित्तीय रिकॉर्ड की जांच केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। संबंधित निर्माण कार्यों की मौके पर स्थिति, स्वीकृत लागत, माप पुस्तिका, सामग्री खरीद के बिल, भुगतान विवरण और कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र का मिलान भी किया जाना चाहिए। भुगतान होने की स्थिति में यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि उसके अनुरूप काम वास्तव में हुआ हो और संबंधित अभिलेख नियमानुसार उपलब्ध हों। दस्तावेज अस्पष्ट होने पर मूल बिलों और संबंधित रजिस्टरों की जांच से स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

शामली के जिलाधिकारी आलोक यादव ने पोर्टल पर कोरे और धुंधले दस्तावेज अपलोड किए जाने के मामले को गंभीर बताते हुए विस्तृत जांच कराने की बात कही है। इस संबंध में जिला पंचायत राज अधिकारी से भी स्पष्टीकरण और जवाब-तलबी किए जाने की जानकारी सामने आई है।

जिला पंचायत राज अधिकारी संदीप अग्रवाल के अनुसार, विकास कार्यों के नाम पर अस्पष्ट अथवा कोरे बिल अपलोड किए जाने का मामला गंभीर है। पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा अनियमितता सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अब जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित ग्राम पंचायतों में दर्ज विकास कार्य वास्तव में कराए गए या नहीं, भुगतान के लिए कौन से मूल दस्तावेज इस्तेमाल किए गए, अभिलेखों को पोर्टल पर अपलोड करने की जिम्मेदारी किसकी थी और सत्यापन के दौरान इन कमियों पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया।

जवाबदेही तय करने के लिए शामली की संबंधित ग्राम पंचायतों में दर्ज भुगतानों और अपलोड किए गए दस्तावेजों की मूल अभिलेखों से जांच आवश्यक है। इसके साथ ही स्वीकृत बजट, भुगतान, माप पुस्तिका और मौके पर कराए गए कार्यों का मिलान किया जाना चाहिए। उत्तर प्रदेश के जिन 41 जिलों में ऑडिट रिपोर्ट शून्य दिखाई दे रही है, वहां वित्तीय वर्षवार ऑडिट और रिपोर्ट अपलोड करने की वास्तविक स्थिति भी सार्वजनिक किए जाने की जरूरत है। जहां रिपोर्टिंग में देरी, दस्तावेजों की कमी या वित्तीय अनियमितता सामने आए, वहां जिम्मेदारी निर्धारित कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

ई-ग्राम स्वराज जैसी डिजिटल व्यवस्था ग्रामीणों को अपने गांव के विकास कार्यों और सरकारी खर्च की जानकारी उपलब्ध कराने का माध्यम है। लेकिन इसकी उपयोगिता तभी सुनिश्चित हो सकती है, जब पोर्टल पर दर्ज हिसाब पूरा, स्पष्ट और सत्यापन योग्य हो। शामली में भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की स्थिति और 41 जिलों की ऑडिट रिपोर्ट शून्य होने के आंकड़े प्रशासनिक समीक्षा की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं। जांच के निष्कर्ष और ऑडिट रिपोर्टों की वास्तविक स्थिति से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इन मामलों में अभिलेखों की कमी कहां तक सीमित है और कहां जवाबदेही तय करने की जरूरत है।

Om Prakash Pal

Om Prakash Pal

नाम: ओम प्रकाश पाल

वर्तमान पद: स्वतंत्र पत्रकार, लेखक एवं स्तंभकार

कार्यक्षेत्र: नेशनल ब्यूरो (राष्ट्रीय स्तर)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, संसद, केंद्रीय मंत्रालय, कृषि, साहित्य, खेल एवं प्रशासन (बिजनेस को छोड़कर सभी विषयों पर कार्य)

पत्रकारिता अनुभव: लगभग 39 वर्ष

परिचय एवं अनुभव 

ओम प्रकाश पाल पिछले 39 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर नेशनल ब्यूरो में विशेष संवाददाता के रूप में लगभग 20 वर्षों तक संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) की रिपोर्टिंग की है।

एक मान्यता प्राप्त पत्रकार के रूप में उन्होंने केंद्रीय गृह, रक्षा, रेलवे, सड़क परिवहन, श्रम एवं रोजगार, जलशक्ति और कृषि जैसे प्रमुख केंद्रीय मंत्रालयों को कवर किया है।

विभिन्न समाचार पत्रों में योगदान:

  • अमर उजाला एवं दैनिक जागरण: पत्रकारिता के शुरुआती वर्षों का अनुभव।
  • शाह टाइम्स: न्यूज़ एडिटर (News Editor) के पद पर सेवाएं।
  • हरिभूमि (दिल्ली): वरिष्ठ संवाददाता के रूप में कार्य।

राजनीति विज्ञान और कृषि विषयों के जानकार होने के साथ-साथ उन्होंने साहित्य और खेल के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्य किया है। वर्तमान में वह एक स्वतंत्र पत्रकार, लेखक और स्तंभकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

शैक्षणिक योग्यता 

  • स्नातक (Graduate)
  • B.Ed (बैचलर ऑफ एजुकेशन)
  • पत्रकारिता में डिप्लोमा (Diploma in Journalism)
  • साहित्य रत्न
  • कृषि विशारद

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