चंदौली। पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर पालिका परिषद के कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। नगर के सामान्य कूड़े की छंटाई और पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को अलग करने के लिए स्थापित मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) प्लांट में अस्पतालों से निकलने वाला बायोमेडिकल वेस्ट पहुंचने की चर्चा है। यदि यह जानकारी सही पाई जाती है, तो मामला नगर की सफाई व्यवस्था के साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा से भी जुड़ जाएगा।

नगर पालिका क्षेत्र के 25 वार्डों में सफाई व्यवस्था के लिए लगभग 246 आउटसोर्स सफाईकर्मियों की तैनाती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, नगर से प्रतिदिन करीब पांच टन कूड़ा निकलता है। इसके निस्तारण के लिए नगर से लगभग सात किलोमीटर दूर जमुनीपुर गांव के पास करीब एक हेक्टेयर क्षेत्र में एमआरएफ प्लांट स्थापित किया गया है। यहां कूड़े को अलग-अलग श्रेणियों में छांटने के लिए लगभग एक दर्जन कर्मचारियों की तैनाती की जानकारी है।

हालांकि, प्लांट की पड़ताल के दौरान कर्मचारियों के काम करते नहीं दिखने और वहां नियमित रूप से कूड़ा पहुंचने की व्यवस्था स्पष्ट नहीं होने से इसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच अस्पतालों से निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट के प्लांट तक पहुंचने की चर्चा ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है।

अब जांच का प्रमुख बिंदु यह है कि एमआरएफ प्लांट में केवल नगर का सामान्य कूड़ा पहुंच रहा है या अस्पतालों से निकलने वाला अपशिष्ट भी वहां लाया जा रहा है। यदि बायोमेडिकल वेस्ट प्लांट तक पहुंच रहा है, तो यह पता लगाना जरूरी है कि वह किस अस्पताल से आ रहा है, उसकी प्रकृति क्या है और उसका निस्तारण किस प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है।

बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 के तहत लागू प्रावधानों के अनुसार, संबंधित अपशिष्ट का पृथक्करण, सुरक्षित परिवहन तथा अधिकृत व्यवस्था के माध्यम से उपचार और निस्तारण आवश्यक है। संक्रमणकारी कचरे को सामान्य कूड़े के साथ मिलाकर छांटने से कर्मचारियों और आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा हो सकता है।

ऐसे में नगर पालिका प्रशासन, मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मामले की जांच कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठ रही है। एमआरएफ प्लांट तक पहुंचने वाले कचरे के स्रोत, उसके परिवहन से जुड़े रिकॉर्ड और निस्तारण की प्रक्रिया की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि डीडीयू नगर के एमआरएफ प्लांट में वास्तव में किस तरह का कचरा पहुंच रहा है और क्या अस्पतालों के बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण में निर्धारित नियमों का पालन किया जा रहा है। जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर यह भी स्पष्ट करना होगा कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है।

Manmohan, Chandauli (Uttar pradesh)

Manmohan, Chandauli (Uttar pradesh)

नाम: मनमोहन

पद: रिपोर्टर (प्रातः काल)

कार्यक्षेत्र: चंदौली (उत्तर प्रदेश)

बीट (मुख्य विषय): क्राइम (अपराध) और प्रशासन

मूलमंत्र: निष्पक्ष, बेबाक और तथ्यपरक पत्रकारिता

परिचय (About Manmohan)

मनमोहन उत्तर प्रदेश के चंदौली क्षेत्र के एक सजग, निडर और समर्पित पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल' समाचार पत्र में रिपोर्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मनमोहन मुख्य रूप से क्राइम (अपराध) और स्थानीय प्रशासन से जुड़े मामलों को कवर करते हैं। उनका पत्रकारिता दृष्टिकोण पूरी तरह से "निष्पक्ष, बेबाक और तथ्यपरक" खबरों पर आधारित है, जिससे वे क्षेत्र की जनता के मुद्दों और प्रशासनिक सच्चाई को बिना किसी दबाव के सामने लाते हैं।

पत्रकारिता कौशल एवं अनुभव (Skills & Experience)

मनमोहन को चंदौली जिले के जमीनी मुद्दों, भौगोलिक परिस्थितियों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली की गहरी समझ है। अपराध से जुड़ी घटनाओं की सटीक रिपोर्टिंग और प्रशासनिक कमियों व सुधारों को प्रमुखता से उठाना उनकी मुख्य विशेषता है। तथ्यों की गहराई में जाकर खबर की प्रामाणिकता जांचना उनके काम की शैली का हिस्सा है।

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

एम.जे. (M.J. - Master of Journalism): मनमोहन पत्रकारिता में परास्नातक (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म) की डिग्री से योग्य हैं। उनकी यह उच्च प्रोफेशनल डिग्री और पत्रकारिता की सैद्धांतिक समझ उन्हें जटिल खबरों का तार्किक विश्लेषण करने और समाज के सामने एक जिम्मेदार मीडिया रिपोर्ट प्रस्तुत करने में सक्षम बनाती है।

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