आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर विपक्षी दलों के गठबंधन, भाजपा के खिलाफ चुनावी रणनीति, ईवीएम के स्थान पर बैलेट पेपर से मतदान और विपक्षी दलों की कार्यशैली पर खुलकर अपनी बात रखी। एटा में उन्होंने कहा कि विपक्ष के साथ गठबंधन के दरवाजे खुले हुए हैं और भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए सभी दलों को अहंकार छोड़कर मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों की गुटबाजी और आपसी मतभेदों के कारण भाजपा को सत्ता से बाहर नहीं किया जा सका।

चंद्रशेखर आजाद ने बताया कि विधानसभा चुनाव 2022 के बाद से आजाद समाज पार्टी उत्तर प्रदेश के एक-एक जिले और विधानसभा क्षेत्र में जाकर संगठन को मजबूत करने का काम कर रही है। पार्टी की ओर से 18 से अधिक प्रबुद्धजन सम्मेलन आयोजित किए गए हैं। इसके अलावा प्रदेश में 10 बड़ी रैलियां और सभाएं भी की गई हैं। एटा के जलेसर में पार्टी का कार्यक्रम प्रभारियों की बूथ समीक्षा के लिए आयोजित किया गया।



गठबंधन के सवाल पर चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि यदि कोई दल आजाद समाज पार्टी के साथ गठबंधन करता है तो उसे फायदा मिल सकता है, भले ही उनकी पार्टी को फायदा हो या नहीं। उन्होंने कहा कि गठबंधन से सभी को लाभ होता है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में विपक्ष की हार और 2022 में 10 पार्टियों के मिलकर चुनाव लड़ने के बावजूद भाजपा को सत्ता से नहीं हटाए जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में भी बड़ा गठबंधन हुआ था, लेकिन अब वह बिखर चुका है और कई गुटों में बंट गया है। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस अलग-अलग चुनाव लड़ रही थीं। अन्य दलों के साथ वामपंथी दल भी मौजूद थे, फिर भी भाजपा को सत्ता से बाहर नहीं किया जा सका। चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि वह विपक्ष के साथियों पर टिप्पणी नहीं करना चाहते, क्योंकि वह बहुजन समाज के मिशनरी कार्यकर्ता हैं और महापुरुषों के आंदोलनों को समझते हैं।

उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि भाजपा के सत्ता में बने रहने से दलितों, पिछड़ों, कर्मचारियों, व्यापारियों, मुसलमानों, सिखों, बौद्धों और ईसाइयों को सबसे अधिक नुकसान होगा। उनके अनुसार, भाजपा की नीतियों और एजेंडे में इन वर्गों के हित प्रभावित होते हैं। उन्होंने दोहराया कि विपक्ष के साथ गठबंधन के दरवाजे खुले हैं, क्योंकि उनमें अहंकार नहीं है।

चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि उनका उद्देश्य विपक्ष से लड़ना नहीं, बल्कि प्रदेश की 25 करोड़ जनता के हितों की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति के अधिकार की बात नहीं, बल्कि बहुसंख्यक आबादी के हितों का सवाल है। सरकार का कार्यकाल लोग देख चुके हैं। जो नेता आज अहंकार में हैं और कह रहे हैं कि उन्हें गठबंधन नहीं करना है, उनका भी वह स्वागत करते हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि ऐसे नेता यह नहीं समझ रहे कि सत्ता के खिलाफ संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं को लाठीचार्ज, जेल और एनकाउंटर जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। उनके अनुसार, कार्यकर्ताओं के खिलाफ बुलडोजर की कार्रवाई भी होती है, चाहे वे संबंधित दल के नेताओं की जाति के हों या नहीं।

उन्होंने विपक्षी नेताओं से जमीन की नब्ज समझने और अपने कार्यकर्ताओं के साथ बैठकर बातचीत करने की अपील की। चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि ऐसा करने पर उन्हें पता चलेगा कि कार्यकर्ता क्या चाहते हैं। उन्होंने कहा कि बहुजन होने के नाते वह अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। बहुजन समाज के लोग लंबे समय से सत्ता में भागीदारी की कल्पना कर रहे हैं। उनकी अपेक्षा है कि शिक्षा, अधिकार और आरक्षण सुरक्षित रहें तथा जमीनों से जुड़े मामलों में जो हो रहा है, वह रुके।

चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि उन्हें आशंका है कि भाजपा सत्ता में बनी रही तो हाथरस जैसी घटनाएं होंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि गठबंधन के लिए हाथ बढ़ाने का कारण उनकी कमजोरी नहीं है। उन्होंने कहा, "मैं बड़ा स्वाभिमानी व्यक्ति हूं। मुझे अपने स्वाभिमान और सम्मान से ज्यादा लोगों के स्वाभिमान, हितों और सुरक्षा की चिंता है।" इसी वजह से उन्होंने गठबंधन की पहल की है। उन्होंने कहा कि गठबंधन हो या न हो, उनकी पार्टी चुनाव की तैयारी कर रही है।

उन्होंने अपने आंदोलनों और विभिन्न वर्गों के मुद्दों पर काम करने का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने कभी छात्र प्रदर्शनों के दौरान जाति या धर्म नहीं पूछा। यूपी पीसीएस और यूपीएससी की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों, भोजन माताओं, पंचायत रोजगार सेवकों, पुलिस भर्ती के अभ्यर्थियों और 69 हजार शिक्षक भर्ती से जुड़े लोगों के साथ वह खड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी मुद्दों पर चंद्रशेखर आजाद ने साथ दिया है।

एमएलसी चुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि भाजपा के खिलाफ लोगों में गुस्सा है। इस चुनाव में बसपा और कांग्रेस का प्रत्याशी नहीं था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सभी दल चुनाव लड़ेंगे तो परिणाम क्या होगा। लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी दो सीटों पर चुनाव लड़ी थी। एक सीट पर पार्टी ने एक लाख इक्यावन हजार वोटों से जीत दर्ज की और वहां विपक्ष की जमानत जब्त हो गई। दूसरी सीट डुमरियागंज में पार्टी को 80 वोट मिले और वह तीसरे नंबर पर रही।

चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि वह वोटों का बिखराव नहीं चाहते। उन्होंने विपक्षी दलों से अपील की कि चुनाव हारने के बाद एक-दूसरे पर आरोप लगाने के बजाय पहले ही अहंकार छोड़कर मिलकर काम किया जाए। उन्होंने कहा कि कमजोर वर्गों को आगे बढ़ाने की उनकी इच्छा है। उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी, बुलडोजर कार्रवाई, एनकाउंटर और कर्मचारियों के शोषण जैसे मुद्दे मौजूद हैं। उनके अनुसार, मस्जिदें और मदरसे तोड़े जा रहे हैं, सरकारी कर्मचारी और व्यापारी परेशान हैं तथा किसानों के गन्ने का मूल्य बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष को सरकार के खिलाफ इन मुद्दों पर संघर्ष करना चाहिए।

बैलेट पेपर से चुनाव कराने और ईवीएम को लेकर पूछे गए सवाल पर चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि यदि भाजपा बैलेट पेपर से चुनाव कराने की बात कर रही है तो विधानसभा चुनाव बैलेट पेपर से करा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा को अपनी लोकप्रियता पर भरोसा है तो वह बैलेट पेपर से चुनाव कराकर साबित कर सकती है कि जनता उसके साथ है। उन्होंने सभी चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग की।

हालांकि, चंद्रशेखर आजाद ने यह भी कहा कि वह जानते हैं कि पहले बैलेट पेपर से चुनाव होने के दौरान वोटों की लूट होती थी, बूथ लूटे जाते थे और मतपेटियां भी लूटी जाती थीं। उन्होंने कहा कि आज हमारे पास इतने फोर्स हैं। उन्होंने मीरापुर का एक मामला भी याद दिलाया, जिसमें उनके अनुसार एक व्यक्ति के 40 वोट थे। उन्होंने सवाल किया कि क्या इस चुनाव को निष्पक्ष माना जा रहा है। उन्होंने दोहराया कि बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाने चाहिए। उनके मुताबिक, इससे जनता के साथ खड़े होने का अवसर मिलेगा और विपक्ष तथा सत्ता पक्ष का भ्रम भी समाप्त होगा।

वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर चंद्रशेखर आजाद ने विपक्षी दलों से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि सभी पार्टी प्रमुख मिलकर यह फैसला कर सकते हैं। वह चाहते हैं कि उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हो और हर पांच वर्ष बाद सरकार बदले। उन्होंने कहा कि सत्ता परिवर्तन की संभावना रहने से प्रतिस्पर्धा बनी रहती है और राजनीतिक दल काम करने के लिए प्रेरित होते हैं। उनके अनुसार, यदि लोग लगातार सत्ता में बने रहेंगे तो उनमें अहंकार आ जाएगा।

उन्होंने आंदोलनों के दौरान बल प्रयोग का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आज ऐसा कौन-सा आंदोलन है, जिसमें लाठी नहीं चल रही है। उन्होंने एएनएम बहनों के मामले का उल्लेख करते हुए विपक्ष से सवाल किया कि संविधान बचाने और वोट बचाने के नारे देने वाले दलों ने अपने कार्यकाल में क्या किया। उन्होंने कहा कि भाजपा हटाओ, संविधान बचाओ और ईवीएम हटाओ, लोकतंत्र बचाओ जैसे नारे देने वाले दलों को अपने कामकाज का जवाब देना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जनता से कितनी बार झूठ बोला जाएगा।

चंद्रशेखर आजाद ने छात्रवृत्ति, पदोन्नति और आरक्षण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 से 2017 की सरकार के दौरान बच्चों की छात्रवृत्ति बंद हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कक्षा एक से आठ तक की छात्रवृत्ति बंद कर दी गई और पदोन्नति में आरक्षण भी समाप्त कर दिया गया। उन्होंने पिछड़ों का हितैषी होने का दावा करने वाले दलों की कार्यशैली पर सवाल उठाए। मायावती से जुड़े सवाल पर वह जवाब देने से बचते नजर आए। उन्होंने कहा कि चुनावी राजनीति में आरोप और आलोचना झेलनी पड़ती है। यदि वह कोई व्यापार करते तो लोग उन पर टिप्पणी क्यों करते।

उत्तर प्रदेश में असदुद्दीन ओवैसी की सक्रियता और इससे मुस्लिम मतों के बिखराव तथा भाजपा को लाभ मिलने की आशंका को लेकर पूछे गए सवाल पर चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि उन्हें भी साथ ले लो।

चंद्रशेखर आजाद के बयान में 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए विपक्षी एकता, गठबंधन की संभावनाएं, बैलेट पेपर से मतदान और दलितों, पिछड़ों, कर्मचारियों, किसानों तथा अन्य कमजोर वर्गों से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। उन्होंने विपक्षी दलों से आपसी मतभेद दूर कर साझा रणनीति बनाने की अपील की और कहा कि उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के लिए एकजुट होकर काम करना जरूरी है।

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Vikas Dube, Etah and Kasganj (Uttar pradesh)

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विकास दुबे एटा और कासगंज जनपद में सक्रिय पत्रकार हैं, जो स्थानीय मुद्दों, प्रशासनिक गतिविधियों, स्वास्थ्य, शिक्षा और अपराध से जुड़ी खबरों की गहन और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करते हैं। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों की जमीनी हकीकत को सरल एवं प्रभावशाली भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी विशेष पहचान है। जनसरोकार से जुड़े विषयों पर सतत सक्रिय रहते हुए वे क्षेत्र की महत्वपूर्ण घटनाओं को प्रमुखता से सामने लाने का कार्य कर रहे हैं।

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      • वर्तमान में दैनिक भास्कर ऐप डिजिटल, पब्लिक ऐप और एबीसी चैनल में रिपोर्टर हूं और टाइम्स ऑफ इंडिया के लिए इनपुट भेजता हूं।



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